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भाजपा से मुकाबले को तैयार हो रहा समाजवादी ‘महिला मोर्चा’

  • स्मृति ईरानी, रेखा वर्मा और संगीता यादव के मुकाबले डिंपल यादव की अगुवाई में सपा की नई महिला टीम तैयार, 2027 यूपी चुनाव में मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

भारत 19

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 2027 की चुनावी जंग में भाजपा को घेरने के लिए समाजवादी पार्टी अब महिला चेहरों की अपनी अलग टीम तैयार करती दिख रही है। भाजपा के पास स्मृति ईरानी, रेखा वर्मा और संगीता यादव जैसे मजबूत महिला चेहरे हैं तो सपा ने डिंपल यादव को आगे कर युवा महिला नेताओं की ऐसी टोली तैयार की है, जिसे चुनावी मैदान में भाजपा के महिला चेहरों के मुकाबले उतारा जा सकता है। यानी इस बार लड़ाई सिर्फ महिला वोटरों को साधने की नहीं, बल्कि महिला नेतृत्व के जरिए चुनावी नैरेटिव पर पकड़ बनाने की भी हो सकती है।

भाजपा ने संगठन में बढ़ाया महिला चेहरों का वजन

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से स्मृति ईरानी, रेखा वर्मा और संगीता यादव को अहम जिम्मेदारियां मिली हैं। स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है, जबकि रेखा वर्मा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और संगीता यादव राष्ट्रीय सचिव बनी हैं। इन नियुक्तियों का असर संगठन से आगे चुनावी मैदान में भी दिखाई दे सकता है। 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा इन नेताओं को अलग-अलग इलाकों और सामाजिक समीकरणों के बीच पार्टी का संदेश पहुंचाने के लिए इस्तेमाल कर सकती है। खासकर स्मृति ईरानी की राष्ट्रीय पहचान, चुनावी अनुभव और आक्रामक राजनीतिक शैली उन्हें भाजपा के प्रमुख महिला प्रचारकों में शामिल करती है। वहीं रेखा वर्मा और संगीता यादव संगठन तथा सामाजिक समीकरणों के लिहाज से पार्टी के लिए उपयोगी चेहरे हैं।

सपा के जवाब में डिंपल यादव का बढ़ा कद

भाजपा की सक्रियता के बीच समाजवादी पार्टी की रणनीति में डिंपल यादव की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती दिख रही है। मैनपुरी की सांसद डिंपल अब पार्टी के सबसे प्रमुख महिला चेहरों में हैं। संसद में सक्रियता के साथ महिला मुद्दों और चुनावी घोषणाओं को लेकर भी उनकी मौजूदगी बढ़ी है। सपा ने महिला मतदाताओं को साधने के लिए ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ का ऐलान किया है। पार्टी के मुताबिक सरकार बनने पर पात्र महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये देने का प्रस्ताव है। इस पूरी कवायद में डिंपल यादव को प्रमुख चेहरा बनाया गया है। इससे सपा की रणनीति का संकेत साफ है कि महिला वोटरों तक पहुंचने के लिए अब महिला नेतृत्व को भी आगे किया जाए।

डिंपल के साथ तैयार हो रही युवा महिला टीम

डिंपल यादव के साथ सपा जिन महिला नेताओं को आगे बढ़ाती दिख रही है, उनमें रागिनी सोनकर, प्रिय सरोज, इकरा हसन, रुचि वीरा और पूजा सरोज प्रमुख हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले इन चेहरों के जरिए पार्टी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों और सामाजिक समूहों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। रागिनी सोनकर विधानसभा में महिला आरक्षण और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर मुखर रही हैं। प्रिय सरोज और इकरा हसन जैसी युवा सांसदों ने संसद में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। वहीं रुचि वीरा और पूजा सरोज को भी आने वाले चुनावी अभियान में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। इस टीम की खासियत यह है कि सपा के पास अब डिंपल यादव के साथ युवा महिला सांसदों और विधायकों की एक ऐसी तस्वीर बन रही है, जिसे प्रदेशव्यापी चुनाव अभियान में इस्तेमाल किया जा सकता है।

2027 में स्टार प्रचारक बन सकती हैं महिला नेता

विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ इस टीम की भूमिका और बढ़ सकती है। डिंपल यादव के साथ इन महिला नेताओं को महिला सम्मेलन, रोड शो, जनसभाओं और क्षेत्रवार चुनावी अभियानों में उतारा जा सकता है। इसका राजनीतिक फायदा यह होगा कि अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा के पास महिला सुरक्षा, प्रतिनिधित्व, रोजगार, महंगाई और कल्याणकारी योजनाओं जैसे मुद्दों पर अपने प्रभावी महिला चेहरे होंगे। इससे पार्टी का चुनावी संदेश सिर्फ पुरुष नेताओं के भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा। हालांकि इन नेताओं को अभी से स्टार प्रचारक घोषित करना जल्दबाजी होगी, लेकिन 2027 में उन्हें ऐसी भूमिका मिलने की संभावना सपा की रणनीति को नया आयाम दे सकती है।

महिला वोट से आगे महिला नेतृत्व की लड़ाई

उत्तर प्रदेश में महिला मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए भाजपा और सपा दोनों के लिए महिला केंद्रित राजनीति अहम हो गई है। लेकिन 2027 का मुकाबला सिर्फ इस बात पर नहीं टिकेगा कि कौन महिलाओं के लिए ज्यादा घोषणाएं करता है। सवाल यह भी होगा कि कौन सी पार्टी महिला नेताओं को चुनावी मैदान में ज्यादा प्रभावी ढंग से उतार पाती है। भाजपा के पास स्मृति ईरानी जैसे राष्ट्रीय स्तर के चेहरे के साथ संगठन में मजबूत महिला नेतृत्व है। दूसरी ओर सपा डिंपल यादव के नेतृत्व में युवा महिला नेताओं की नई पीढ़ी को सामने लाने की कोशिश कर रही है। यही 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का एक नया सियासी एंगल बन सकता है—महिला वोटरों को साधने की होड़ के साथ महिला नेतृत्व की सीधी राजनीतिक टक्कर। भाजपा का स्थापित महिला नेटवर्क और सपा का उभरता महिला समूह आने वाले चुनाव में प्रचार और राजनीतिक नैरेटिव, दोनों की दिशा बदल सकता है।

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