- मोहाली के वोटर रिकॉर्ड में ‘परमानेंट शिफ्टेड’ दर्ज होने पर चड्ढा ने राजनीतिक बदले का आरोप लगाया, आम आदमी पार्टी (AAP) ने कहा- वोटर सूची तैयार करना चुनाव आयोग का काम
भारत 19 डेस्क
पंजाब में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर होने पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। 13 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में चड्ढा की प्रविष्टि अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, दोहरी प्रविष्टि (ASDD) श्रेणी में दर्ज है और उनके नाम के सामने ‘परमानेंट शिफ्टेड’ लिखा गया है। चड्ढा ने सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।
मोहाली का वोटर आईडी, फिर ‘शिफ्टेड’ कैसे
चड्ढा का कहना है कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं और उनका वोटर आईडी मोहाली में पंजीकृत है। इसके बावजूद SIR के ड्राफ्ट में उन्हें स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता की श्रेणी में डाल दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सामान्य लिपिकीय गलती नहीं लगती और इसके पीछे राजनीतिक बदले की मंशा हो सकती है। चड्ढा ने यह भी सवाल उठाया कि उनके नाम को ‘शिफ्टेड’ किस अधिकारी ने दर्ज और सत्यापित किया। चड्ढा ने यह भी कहा है कि चूंकि यह ड्राफ्ट सूची है, इसलिए उन्हें दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया में अपना नाम ठीक कराने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में समाधान के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
SIR को लेकर चड्ढा ने उठाए नियमों पर सवाल
चड्ढा ने चुनाव आयोग की SIR व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों से जुड़े प्रावधान का हवाला देते हुए सवाल किया है कि मौजूदा सांसद होने के बावजूद उनका नाम इस श्रेणी में कैसे पहुंचा। उनका आरोप है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल अधिकारी राज्य सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में होते हैं और तबादले-पोस्टिंग की व्यवस्था के कारण राजनीतिक दबाव की आशंका रहती है। ये चड्ढा के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
AAP का पलटवार, चुनाव आयोग पर छोड़ी जिम्मेदारी
AAP ने चड्ढा के आरोपों को खारिज कर दिया। पार्टी का कहना है कि SIR चुनाव आयोग की प्रक्रिया है और मतदाता सूची में किसका नाम शामिल या बाहर होगा, इसका फैसला पंजाब सरकार नहीं करती। पार्टी ने चड्ढा के दिल्ली में रहने और वहां वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़े कथित प्रयासों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। AAP ने आरोप लगाया है कि चड्ढा दिल्ली में अपना मतदाता पंजीकरण बैकडेट में कराने की कोशिश कर रहे थे और अब इसके लिए पंजाब सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यह भी AAP का आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हुई है।
पंजाब में 20.66 लाख नाम ड्राफ्ट से बाहर
राघव चड्ढा का मामला ऐसे समय सामने आया है जब पंजाब में SIR के दौरान 20.66 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए हैं। इनमें स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत, अनुपलब्ध और डुप्लीकेट श्रेणियों में रखे गए मतदाता शामिल हैं। यह आंकड़ा राज्य में SIR के पहले मौजूद मतदाता आधार का करीब 9.7 फीसदी है। हालांकि ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होना अंतिम फैसला नहीं है।
12 सितंबर तक सुधार का मौका
SIR की प्रक्रिया में नाम हटाए गए मतदाताओं को 12 सितंबर 2026 तक दावे-आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया गया है। इसके बाद दावों की जांच और निस्तारण होगा। पंजाब की अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर 2026 को जारी होने का कार्यक्रम है। इसलिए फिलहाल चड्ढा का नाम स्थायी रूप से मतदाता सूची से बाहर होना तय नहीं है। अब पूरे विवाद का केंद्र यह है कि मोहाली के रिकॉर्ड में उन्हें ‘Permanently Shifted’ किस आधार पर दर्ज किया गया और दावे की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी क्या फैसला लेते हैं।


