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आगरा मेट्रो ने फुटओवर ब्रिज बचाकर रखा यू गर्डर

  • एनएच-19 पर राहगीरों की सुविधा बनाए रखने के लिए अपनाई खास इंजीनियरिंग तकनीक; आईएसबीटी-सिकंदरा एलिवेटेड सेक्शन में 272 में से 240 यू गर्डर स्थापित

भारत 19/ आगरा। आगरा मेट्रो के निर्माण में तकनीक के साथ राहगीरों की सुविधा का भी ध्यान रखा जा रहा है। आईएसबीटी से गुरु का ताल के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (एनएच-19) पर पहले से बने फुटओवर ब्रिज (एफओबी) को हटाए बिना उसके ऊपर यू गर्डर स्थापित किया गया। इससे मेट्रो निर्माण के लिए फुटओवर ब्रिज को तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ी और लोगों के सड़क पार करने की सुविधा भी बनी रही। यूपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) के अनुसार, गुरु का ताल मेट्रो स्टेशन के पास क्रेन की मदद से गर्डर को निर्धारित स्थान पर रखा गया। व्यस्त सड़क पर निर्माण के दौरान राहगीरों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर यह तरीका अपनाया गया।

फुटओवर ब्रिज हटाए बिना गर्डर रखने की तकनीक

एलिवेटेड मेट्रो निर्माण के दौरान सड़क पर यातायात और पैदल चलने वालों की आवाजाही बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। गुरु का ताल के पास फुटओवर ब्रिज को हटाए बिना यू गर्डर स्थापित करने से इस चुनौती से निपटने में मदद मिली। इससे मौजूदा पैदल पार पथ को बनाए रखते हुए मेट्रो निर्माण का काम आगे बढ़ाया जा सका।

बॉक्स गर्डर की जगह यू गर्डर का इस्तेमाल

आगरा मेट्रो के एलिवेटेड हिस्से में यू गर्डर लगाए जा रहे हैं। इनका आकार अंग्रेजी के अक्षर ‘यू’ जैसा होता है। यूपीएमआरसी के अनुसार, पारंपरिक बॉक्स गर्डर की तुलना में इस तकनीक से निर्माण में समय और लागत बचाने में मदद मिलती है। गर्डर की बनावट के कारण दोनों ओर सिग्नलिंग उपकरण लगाने के लिए भी पर्याप्त जगह मिलती है। यू गर्डर का निर्माण रुनकता स्थित कास्टिंग यार्ड में प्रीकास्ट तकनीक से किया जाता है। तैयार गर्डरों को ट्रक से निर्माण स्थल तक लाया जाता है और क्रेन की मदद से दो पिलरों के बीच स्थापित किया जाता है। इससे निर्माण स्थल पर लंबे समय तक शटरिंग और अन्य गतिविधियों की जरूरत कम होती है। व्यस्त सड़कों के आसपास इस तकनीक से यातायात और पैदल आवाजाही पर पड़ने वाले असर को भी सीमित रखने में मदद मिलती है।

272 में से 240 यू गर्डर स्थापित

आईएसबीटी से सिकंदरा के बीच बन रहे एलिवेटेड हिस्से में करीब 272 यू गर्डर लगाए जाने हैं। इनमें से 240 का इरेक्शन पूरा हो चुका है। इसके अलावा 52 आई गर्डर में से 40 और 123 पियरकैप में से 117 का निर्माण पूरा कर लिया गया है। इस हिस्से के आईएसबीटी, गुरु का ताल और सिकंदरा मेट्रो स्टेशनों के लिए सभी 24 क्रॉस आर्म भी स्थापित किए जा चुके हैं। गुरु का ताल और सिकंदरा मेट्रो स्टेशन सिंगल पिलर तकनीक से बनाए जा रहे हैं। इस हिस्से के सभी पियर तैयार हो चुके हैं और यू गर्डर की कास्टिंग का काम भी पूरा हो गया है।

सिंगल पिलर तकनीक से कम जगह में बनेगा स्टेशन

आमतौर पर एलिवेटेड मेट्रो स्टेशन बनाने के लिए तीन ग्रिड में पिलर तैयार किए जाते हैं। इसके बाद क्षैतिज बीम की मदद से कॉनकोर्स और प्लेटफॉर्म का निर्माण होता है। आगरा मेट्रो में स्टेशन निर्माण के लिए डबल टी गर्डर और पाई गर्डर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इनकी मदद से स्टेशन के अलग-अलग तल का निर्माण कम समय में किया जा सकता है और सड़क पर यातायात प्रभावित होने की आशंका कम रहती है। सिंगल पिलर तकनीक में स्टेशन के मध्य हिस्से में पिलर बनाकर उन पर क्रॉस आर्म रखी जाती हैं। इसके बाद कॉनकोर्स और प्लेटफॉर्म तैयार किए जाते हैं। इस तकनीक में सड़क के दोनों ओर पिलर बनाने की जरूरत कम होती है। इससे सीमित जगह और भीड़भाड़ वाले इलाकों में निर्माण करना आसान होता है। सड़क चौड़ीकरण के दौरान भी इससे बाधाएं कम होने की संभावना रहती है।

आगरा में दो मेट्रो कॉरिडोर पर चल रहा निर्माण

आगरा में दो मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। मूल विवरण के अनुसार, इनकी कुल लंबाई 29.4 किलोमीटर और कुल 27 स्टेशन प्रस्तावित हैं। पहला कॉरिडोर ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा के बीच 14 किलोमीटर लंबा है। इसमें 13 स्टेशन हैं, जिनमें छह एलिवेटेड और सात भूमिगत हैं। इस कॉरिडोर के छह किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी सेक्शन में मेट्रो का संचालन हो रहा है। यूपीएमआरसी के अनुसार, आगे के पांच स्टेशन यात्री सेवाओं के विस्तार के लिए तैयार हैं। दूसरा कॉरिडोर आगरा कैंट से कालिंदी विहार के बीच करीब 16 किलोमीटर लंबा है। इस पर 14 एलिवेटेड स्टेशन बनाए जा रहे हैं। दोनों कॉरिडोर पूरे होने के बाद शहर के प्रमुख इलाकों के बीच मेट्रो कनेक्टिविटी का विस्तार होगा।

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