- 130 एमएलडी प्लांट में भंडारित दूषित स्लज की जांच के लिए सात सदस्यीय समिति गठित; प्रदूषण के जिम्मेदारों की पहचान कर ‘प्रदूषणकर्ता भुगतान सिद्धांत’ के तहत तय होगी जवाबदेही
भारत 19/ कानपुर। जाजमऊ स्थित 130 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) परिसर में भंडारित दूषित स्लज के सुरक्षित निस्तारण को लेकर जिला प्रशासन ने जांच की तैयारी शुरू कर दी है। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने मामले की पड़ताल और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप निस्तारण सुनिश्चित कराने के लिए सात सदस्यीय जिला स्तरीय समिति गठित की है। समिति स्लज के भंडारण और निस्तारण से जुड़े पहलुओं की जांच कर प्रदूषण के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान करेगी। इसके बाद ‘प्रदूषणकर्ता भुगतान सिद्धांत’ (Polluter Pays Principle) के तहत जवाबदेही तय करने और आवश्यक कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
एसटीपी परिसर में भंडारित दूषित स्लज की होगी जांच
जिला पर्यावरण समिति की बैठक में जाजमऊ एसटीपी परिसर में कंटामिनेटेड स्लज भंडारित होने का मामला सामने आया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने विस्तृत जांच कराते हुए दूषित सामग्री का सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गठित समिति भंडारण, निस्तारण और पर्यावरणीय मानकों से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि दूषित स्लज के भंडारण और निस्तारण की जिम्मेदारी किन व्यक्तियों या संस्थाओं की है और पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन में कहीं लापरवाही तो नहीं हुई।
प्रदूषण के जिम्मेदारों की तय होगी जवाबदेही
समिति की जांच में प्रदूषण के लिए जिम्मेदार पक्षों की पहचान की जाएगी। इसके बाद ‘प्रदूषणकर्ता भुगतान सिद्धांत’ के तहत उत्तरदायित्व निर्धारित करने और नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। इस सिद्धांत के अनुसार, प्रदूषण फैलाने वाले पक्ष को पर्यावरणीय क्षति की भरपाई और उससे जुड़े खर्चों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। हालांकि, इस मामले में किसकी जिम्मेदारी बनती है, यह जांच के निष्कर्षों और लागू नियमों के आधार पर तय होगा।
नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और IIT कानपुर के प्रतिनिधि शामिल
जिलाधिकारी की ओर से गठित सात सदस्यीय समिति में प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग, कानपुर नगर के साथ नगर निगम, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण एवं नगरीय) और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नामित अधिकारी शामिल हैं। IIT कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर मनोज कुमार तिवारी और जटेटा, जाजमऊ के सचिव रिजवान नादरी को भी समिति में शामिल किया गया है।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
जिलाधिकारी ने समिति को जांच के बाद विस्तृत रिपोर्ट प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग के माध्यम से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में जांच के निष्कर्षों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। अब समिति की जांच से दूषित स्लज के भंडारण और निस्तारण से जुड़े तथ्य सामने आने तथा जिम्मेदार पक्षों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षित निस्तारण और जवाबदेही तय करने के संबंध में आगे के कदम उठाए जाएंगे।
