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IIT कानपुर के स्टार्टअप बढ़ाएंगे स्वदेशी रक्षा तकनीक की ताकत

  • IIT कानपुर और IIM बेंगलुरु के NSRCEL में करार, रक्षा-एयरोस्पेस के डीप-टेक स्टार्टअप्स को मिलेगा प्रोत्साहन; निगरानी, ड्रोन और सुरक्षित संचार जैसी तकनीकों के विकास को मिल सकती है गति

भारत 19/ कानपुर। सीमाओं की निगरानी से लेकर सैनिकों की सुरक्षा और सुरक्षित संचार तक, स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूती देने की दिशा में IIT कानपुर ने IIM बेंगलुरु के बिजनेस इनक्यूबेटर NSRCEL के साथ साझेदारी की है। दोनों संस्थानों के बीच हुए समझौते का उद्देश्य रक्षा, एयरोस्पेस और नागरिक और रणनीतिक क्षेत्रों में काम करने वाले डीप-टेक स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाना है। इस पहल से नई तकनीकों को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाने और उन्हें वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

रक्षा और एयरोस्पेस स्टार्टअप्स को मिलेगा प्रोत्साहन

आधुनिक रक्षा व्यवस्था में उन्नत निगरानी, सटीक सूचना, सुरक्षित संचार और मानवरहित प्रणालियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। IIT कानपुर और NSRCEL की साझेदारी ऐसे स्टार्टअप्स को सहयोग देने पर केंद्रित है, जो उन्नत तकनीक आधारित समाधान विकसित कर रहे हैं। स्मार्ट निगरानी, ड्रोन, साइबर सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों और सैनिकों के स्वास्थ्य की निगरानी जैसे क्षेत्र इनके संभावित कार्यक्षेत्र हो सकते हैं। हालांकि, इन विशिष्ट तकनीकों के निर्माण या तैनाती की अलग से घोषणा नहीं की गई है। ये संभावित क्षेत्र हैं, जिनमें डीप-टेक स्टार्टअप्स के नवाचार रक्षा और रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप उपयोगी साबित हो सकते हैं।

SCALE Catapult के जरिए स्टार्टअप्स को मिलेगी रफ्तार

IIT कानपुर का स्टार्टअप इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (SIIC) तकनीक आधारित उद्यमों को बढ़ावा देता है। संस्थान की SCALE पहल के तहत SCALE Catapult डीप-टेक स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। इस साझेदारी के शुरुआती चरण में SCALE Catapult को सहयोग दिया जाएगा। इसके तहत स्टार्टअप्स को अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं, तकनीकी विशेषज्ञता, बाजार सत्यापन और उद्यम विकास में मदद मिलेगी। इससे शोध के स्तर पर विकसित तकनीकों की उपयोगिता परखने, बाजार की जरूरतों को समझने और उन्हें व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाने में सहायता मिल सकती है।

IIT की तकनीकी क्षमता और IIM का उद्यमिता अनुभव आएगा साथ

समझौता ज्ञापन पर IIT कानपुर के अधिष्ठाता, अनुसंधान एवं विकास प्रो. जयंधरन गिरिधर राव और NSRCEL की सीईओ रसिका प्रशांत ने हस्ताक्षर किए। प्रो. राव के अनुसार, IIT कानपुर की डीप-टेक क्षमताओं को बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रभावी रास्ते तैयार करना संस्थान की प्राथमिकता है। वहीं, रसिका प्रशांत ने इस साझेदारी को रक्षा और एयरोस्पेस क्षमताओं को मजबूत करने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप बताया। दोनों संस्थान संयुक्त इनक्यूबेशन और एक्सेलरेशन कार्यक्रमों, सह-इनक्यूबेशन, ज्ञान के आदान-प्रदान तथा उद्योग और निवेशकों के साथ सहभागिता को बढ़ावा देंगे। इससे स्टार्टअप्स को तकनीकी विकास के साथ उद्यम स्थापित करने और अपने समाधान बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सैनिकों की सुरक्षा में उपयोगी हो सकती हैं ये तकनीकें

स्मार्ट निगरानी प्रणाली: उन्नत सेंसर और डेटा विश्लेषण पर आधारित तकनीकें सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।

ड्रोन और मानवरहित प्रणालियां: दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों की निगरानी, आपदा के दौरान खोज-बचाव, आवश्यक सामग्री पहुंचाने और जोखिम वाले स्थानों की जानकारी जुटाने में स्वदेशी ड्रोन उपयोगी हो सकते हैं।

सुरक्षित संचार उपकरण: कठिन परिस्थितियों में सैनिकों और नियंत्रण केंद्रों के बीच भरोसेमंद संचार बनाए रखने के लिए सुरक्षित नेटवर्किंग, सिग्नल प्रोसेसिंग और संचार प्रणालियों से जुड़े समाधान महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक और साइबर सुरक्षा: सैन्य संचार तथा डिजिटल प्रणालियों को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने और संवेदनशील सूचनाओं की रक्षा करने वाली तकनीकों की रणनीतिक उपयोगिता बढ़ रही है।

सैनिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य: पहनने योग्य सेंसर और स्वास्थ्य निगरानी उपकरण कठिन परिस्थितियों में सैनिकों की शारीरिक स्थिति पर नजर रखने तथा समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं।

एयरोस्पेस और उन्नत सामग्री: विमानन और अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए हल्के, मजबूत और टिकाऊ पदार्थों, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक घटकों तथा परीक्षण तकनीकों के विकास में भी डीप-टेक स्टार्टअप्स योगदान दे सकते हैं।

स्वदेशी तकनीक को बाजार तक पहुंचाने पर जोर

इस साझेदारी का व्यापक उद्देश्य तकनीक आधारित उद्यमों को शोध से व्यावसायिक उपयोग तक पहुंचने में सहयोग देना है। रक्षा और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स को संस्थागत सहयोग, तकनीकी विशेषज्ञता और बाजार तक पहुंच के अवसर मिलने से स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा मिल सकता है। इससे देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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