- विदेशी निवेशकों ने 25,662 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, आईटी 11.2% और ऑटो 8.8% टूटा; 2018 के बाद निफ्टी का सबसे कमजोर सितंबर
भारत 19
नई दिल्ली। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने सितंबर में भारतीय शेयर बाजार की तेजी पर ब्रेक लगा दिया। महीने की शुरुआत में 24 हजार के आसपास चल रहा निफ्टी 50 आखिरी कारोबारी दिन 22,620.45 पर आ गया, जबकि सेंसेक्स करीब 77 हजार से फिसलकर 72,480.29 पर बंद हुआ। पूरे सितंबर में निफ्टी 50 अंक फिसलकर 1,459.95 अंक यानी 6.06 प्रतिशत और सेंसेक्स 4,476.98 अंक यानी 5.82 प्रतिशत टूटे। दोनों सूचकांकों के लिए यह लगातार दूसरा कमजोर महीना रहा।
सितंबर 2026 में बाजार पर दबाव कई मोर्चों से आया। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के साथ ब्रेंट क्रूड 108.20 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा, जबकि रुपया 95.955 प्रति डॉलर तक कमजोर हुआ। इससे महंगाई और आरबीआई की संभावित ब्याज दर नीति को लेकर चिंता बढ़ी। इसी बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयरों में बिकवाली तेज कर दी।
1 सितंबर को बना महीने का शिखर, फिर लगातार गिरा बाजार
महीने की शुरुआत में बाजार ने ऊंचे स्तर जरूर बनाए, लेकिन तेजी टिक नहीं सकी। 1 सितंबर को सेंसेक्स 77,231.87 और निफ्टी 24,143.15 के स्तर तक पहुंचा। दोनों ही पूरे सितंबर के उच्चतम स्तर रहे। इसके बाद बाजार में कमजोरी लगातार बढ़ती गई।
100 डॉलर पार पहुंचा तेल, बाजार को लगा पहला झटका
9 सितंबर को मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बीच ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। इसके असर से निफ्टी 0.86 प्रतिशत गिरकर 23,431.50 और सेंसेक्स 1.08 प्रतिशत टूटकर 74,764.23 पर बंद हुआ। दोनों सूचकांक करीब तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए।
108 डॉलर का तेल और कमजोर रुपया बना दोहरा दबाव
15 सितंबर को बाजार की चिंता और बढ़ी। ब्रेंट क्रूड 108.20 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया और रुपया 95.955 प्रति डॉलर पर आ गया। तेल की तेजी और रुपये की कमजोरी से महंगाई तथा ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी और निफ्टी उस दिन करीब एक प्रतिशत गिरा।
तेल नरम पड़ा तो मिली राहत, लेकिन टिक नहीं सकी
23 सितंबर को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और पश्चिम एशिया में बातचीत की उम्मीद से बाजार में कुछ राहत आई। निफ्टी 0.50 प्रतिशत बढ़कर 23,446.80 और सेंसेक्स 0.40 प्रतिशत चढ़कर 74,828.25 पर पहुंचा। हालांकि यह सुधार ज्यादा देर नहीं टिक सका। 24 सितंबर के बाद बिकवाली फिर तेज हो गई। उस दिन निफ्टी 1.64 प्रतिशत और सेंसेक्स 1.67 प्रतिशत टूटे। 28 सितंबर को दोनों सूचकांकों में करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई। 29 सितंबर को निफ्टी 22,716.20 और सेंसेक्स 72,529.07 पर बंद हुए। उस समय ब्रेंट क्रूड करीब 105 डॉलर और अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.27 प्रतिशत से ऊपर थी।
विदेशी निवेशकों ने निकाले 25,662 करोड़ रुपये
सितंबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने करीब 25,662 करोड़ रुपये यानी 2.7 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेच दिए। इसके साथ दो महीने से जारी विदेशी निवेशकों की खरीदारी का सिलसिला पलट गया। सितंबर के अंत तक 2026 में विदेशी निवेशकों की कुल निकासी करीब 26.8 अरब डॉलर पहुंच गई। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने बाजार की गिरावट को कुछ हद तक थामने का काम किया।
आईटी, ऑटो और वित्तीय शेयरों में भारी बिकवाली
सितंबर में निफ्टी के सभी 16 प्रमुख सेक्टरों में गिरावट रही। आईटी सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ और निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 11.2 प्रतिशत गिरा। ऑटो इंडेक्स 8.8 प्रतिशत और वित्तीय क्षेत्र 6.3 प्रतिशत नीचे रहा। मिडकैप इंडेक्स में 7.6 प्रतिशत और स्मॉलकैप में 3.4 प्रतिशत की गिरावट रही। इसके विपरीत कोल इंडिया करीब 5.8 प्रतिशत चढ़ने वाले प्रमुख शेयरों में रहा।
2018 के बाद निफ्टी का सबसे कमजोर सितंबर
आखिरी दिन यानी 30 सितंबर को भी निफ्टी 95.75 अंक यानी 0.42 प्रतिशत गिरकर 22,620.45 पर बंद हुआ। सेंसेक्स भी 48.78 अंक यानी 0.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,480.29 पर रहा। सितंबर 2026 में निफ्टी 50 की करीब 6.1 प्रतिशत गिरावट 2018 के बाद सितंबर की सबसे बड़ी गिरावट रही। सितंबर 2018 में निफ्टी 6.42 प्रतिशत गिरा था। हालांकि, डेरिवेटिव सीरीज के आधार पर सितंबर 2026 की 6.7 प्रतिशत गिरावट को 25 वर्षों की सबसे कमजोर सितंबर सीरीज बताया गया।


