- ग्राम समाज, नजूल और सीलिंग की खाली जमीनों की होगी डिजिटल मैपिंग, लैंड बैंक बनाने की तैयारी; सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन का आवंटन होगा आसान, अतिक्रमण की शिकायतों की जांच में भी मिलेगी मदद
भारत 19/ कानपुर। कानपुर में सरकारी जमीनों का ब्योरा एक क्लिक पर उपलब्ध कराने की तैयारी है। जिला प्रशासन ग्राम समाज, नजूल, सीलिंग समेत अन्य श्रेणियों की खाली सरकारी जमीनों की डिजिटल मैपिंग कराकर डिजिटल लैंड बैंक बनाना चाहता है। इससे सरकारी परियोजनाओं के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान और आवंटन आसान बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों से जुड़ी शिकायतों की जांच और निगरानी भी अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
रिमोट सेंसिंग सेंटर से मांगा गया परियोजना प्रस्ताव
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने योजना को आगे बढ़ाने के लिए लखनऊ स्थित रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन्स सेंटर से डिजिटल मैपिंग का विस्तृत परियोजना प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। प्रशासन ने केंद्र से परियोजना की तकनीकी रूपरेखा, अनुमानित लागत, आवश्यक संसाधनों और जिले में जीआईएस विशेषज्ञ की तैनाती से संबंधित प्रस्ताव मांगा है। प्रस्ताव मिलने के बाद योजना के क्रियान्वयन की दिशा में आगे की प्रक्रिया तय की जा सकेगी। जिलाधिकारी के पत्र के अनुसार, जिले में विभिन्न सरकारी विभागों को कार्यालयों और आवासीय भवनों के निर्माण के लिए समय-समय पर जमीन की जरूरत पड़ती है।
अतिक्रमण की शिकायतों की जांच होगी आसान
डिजिटल लैंड बैंक बनने से उपलब्ध सरकारी भूमि का समेकित विवरण एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेगा। इससे संबंधित विभाग अपनी जरूरत के अनुसार उपयुक्त जमीन चिह्नित कर सकेंगे और भूमि आवंटन की प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों से संबंधित शिकायतें जनता दर्शन, तहसील दिवस और आईजीआरएस के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचती रहती हैं। डिजिटल मैपिंग से संबंधित जमीन की स्थिति और उपलब्धता का विवरण व्यवस्थित रूप से सामने आ सकेगा। इससे शिकायतों की जांच के दौरान भूमि की पहचान करने और अतिक्रमण की निगरानी में प्रशासन को मदद मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल लैंड बैंक बनने के बाद स्पष्ट होगी सुविधा
डिजिटल लैंड बैंक की योजना सरकारी जमीनों की जानकारी को एक जगह संकलित करने पर केंद्रित है। इससे भूमि संबंधी सूचनाओं तक पहुंच आसान हो सकती है और सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन चिह्नित करने में लगने वाला समय घटाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल जिला प्रशासन ने परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव मांगा है। डिजिटल लैंड बैंक कब तक तैयार होगा और इसे किस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा, इसकी जानकारी प्रस्ताव और आगे की कार्ययोजना तय होने के बाद स्पष्ट होगी।


