गुरु तेग बहादुर रिसर्च चेयर की पहल, दो वर्षीय ऑनलाइन पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं के जीवन, दर्शन, बलिदान और सांस्कृतिक विरासत का होगा अध्ययन
भारत 19/ कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में सिख गुरुओं के इतिहास, दर्शन और शहादत के अध्ययन के लिए दो वर्षीय ऑनलाइन डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। गुरु तेग बहादुर रिसर्च चेयर की ओर से संचालित इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और अन्य इच्छुक लोगों को सिख गुरुओं के जीवन, विचारों, बलिदान और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है। विश्वविद्यालय में इसकी ऑनलाइन कक्षाएं भी शुरू हो चुकी हैं।
गुरबाणी कीर्तन के साथ हुई शुरुआत
पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं के योगदान के साथ धार्मिक स्वतंत्रता, मानवीय मूल्यों, सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों का अध्ययन कराया जाएगा। गुरु तेग बहादुर के जीवन और बलिदान को भी इसमें विशेष महत्व दिया गया है। उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा की रक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान के कारण ‘हिंद दी चादर’ के रूप में स्मरण किया जाता है। पाठ्यक्रम की शुरुआत के अवसर पर गुरबाणी कीर्तन का आयोजन किया गया। इसमें कानपुर की अमननीत कौर, स्त्री सत्संग कीर्तन जत्था और उन्नाव के कीर्तन निर्मोलक हीरा जत्था ने प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम में सिख परंपरा, गुरुओं की शिक्षाओं और आध्यात्मिक मूल्यों पर प्रकाश डाला गया। इस पहल में गुरु तेग बहादुर रिसर्च चेयर के शिक्षक प्रो. अमन सिंह, स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज के निदेशक डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी तथा चेयर के निदेशक जे.एस. अरोड़ा और जसवीन कौर की भूमिका रही। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने सिख गुरुओं की शिक्षाओं को सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के लिए प्रासंगिक बताया।
दो वर्षीय ऑनलाइन डिप्लोमा में क्या पढ़ाया जाएगा
दो वर्षीय डिप्लोमा में सिख गुरुओं के जीवन और दर्शन, उनकी शिक्षाओं, धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं, लंगर परंपरा, शहादत और समकालीन समाज में उनके विचारों की प्रासंगिकता जैसे विषय शामिल हैं। पाठ्यक्रम का उद्देश्य सिख इतिहास और विरासत को अकादमिक अध्ययन के दायरे में लाना तथा नई पीढ़ी तक उसके मूल्यों को पहुंचाना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पाठ्यक्रम के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं पास और शुल्क 2,000 रुपये बताया गया है। प्रवेश की मौजूदा स्थिति, आवेदन की अंतिम तिथि और सीटों से संबंधित जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचना की पुष्टि करना उचित होगा।
