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गांधी जयंती पर CSJMU में छात्रों ने दिया सेवा संदेश

  • पर्यावरण संरक्षण से स्वदेशी स्टार्टअप तक दिखी गांधीवादी सोच, पोस्टर-भाषण प्रतियोगिता, स्वच्छता अभियान और ग्राम स्वराज पर हुआ संवाद

भारत 19

कानपुर। गांधी जयंती के मौके पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में बुधवार को सिर्फ गांधीजी को याद नहीं किया गया, बल्कि उनके विचारों को मौजूदा दौर के सवालों से जोड़ने की कोशिश भी हुई। कहीं छात्रों ने प्लास्टिक मुक्त परिसर और जल संरक्षण का संदेश पोस्टरों में उतारा तो कहीं स्वदेशी को स्टार्टअप से जोड़कर आत्मनिर्भरता का नया अर्थ तलाशा। परिसर में स्वच्छता अभियान चला और ग्राम स्वराज से लेकर अंत्योदय तक पर संवाद हुआ।

पोस्टरों में पर्यावरण की चिंता, भाषण में गांधी के विचार

स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई-4, विश्वेश्वरैया यूनिट की ओर से ‘गांधीजी एवं पर्यावरण संरक्षण’ विषय पर पोस्टर और भाषण प्रतियोगिता हुई। छात्रों के पोस्टरों में स्वच्छ भारत, प्लास्टिक मुक्त परिसर, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जैव विविधता और सतत विकास जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। पोस्टर प्रतियोगिता में अमीषा प्रथम, शुभी द्वितीय और तपस्या तृतीय रहीं। अर्चना को उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए चयनित किया गया। भाषण प्रतियोगिता में मृदुलेश प्रथम, स्नेहिल द्वितीय और नवीन तृतीय रहे।

सफाई को सिर्फ अभियान नहीं, जिम्मेदारी बताया

स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज में निदेशक डॉ. अमित कुमार के नेतृत्व में स्वच्छता अभियान चलाया गया। इसमें शिक्षकों के साथ विद्यार्थियों ने भी हिस्सा लिया। डॉ. अमित कुमार ने कहा कि गांधीजी के लिए स्वच्छता महज व्यक्तिगत स्वास्थ्य का विषय नहीं थी, बल्कि जिम्मेदार समाज की पहचान थी।

ग्राम स्वराज से अंत्योदय तक हुई बात

दीनदयाल शोध केंद्र में ‘गांधी जी का ग्राम स्वराज एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय जी का अंत्योदय’ विषय पर संवाद हुआ। कार्यक्रम में संतों का आशीर्वाद भी लिया गया। महामंडलेश्वर श्री अरुण चैतन्यपुरी महाराज ने समरसता और सर्वधर्मसमभाव पर जोर दिया, जबकि संत श्री अशोक महाराज ने सत्य, सदाचरण और अहिंसा को जीवन का हिस्सा बनाने की बात कही। विद्यार्थियों ने भी ग्राम स्वराज और अंत्योदय के विचारों पर अपने विचार रखे।

स्वदेशी को स्टार्टअप से जोड़कर छात्रों ने रखे आइडिया

स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट का ‘स्वदेशी से स्टार्टअप’ कार्यक्रम गांधीजी के आत्मनिर्भरता के विचार को आज की उद्यमिता से जोड़ने की कोशिश रहा। 11 विद्यार्थियों ने स्थानीय संसाधनों, भारतीय शिल्प, पर्यावरण और नवाचार पर आधारित बिजनेस आइडिया प्रस्तुत किए। इनमें निखिल दुबे का ‘कारीगर: हर कला की कहानी’ प्रथम रहा। आकांक्षा यादव और अभिनव द्विवेदी क्रमशः प्रथम और द्वितीय रनर-अप रहे।

रंगों और रेखाओं में उतरे गांधी के विचार

इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स में दो दिवसीय रचनात्मक कार्यक्रम के तहत चित्रकला कार्यशाला, सद्वाक्य/अक्षर लेखन और रेखांकन प्रतियोगिता हुई। छात्रों ने सत्य, अहिंसा, सादगी, स्वच्छता और मानवता जैसे गांधीवादी विचारों को अपनी कलाकृतियों के जरिए सामने रखा। इन रचनाओं को बाद में विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शित किया जाएगा।

विचारों को सिर्फ मंच तक सीमित रखने की कोशिश नहीं

विश्वविद्यालय में हुए अलग-अलग कार्यक्रमों की खास बात यह रही कि गांधीजी के विचारों को केवल भाषणों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्वच्छता, पर्यावरण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा तथा कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के नेतृत्व में आयोजित किए गए।

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