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कानपुर में गंगा फिर चेतावनी निशान के पार, अब पांच दिन अहम

  • हरिद्वार-नरौरा से बढ़ा पानी बढ़ा रहा दबाव, उत्तराखंड में बारिश का अगला दौर तय करेगा राहत की रफ्तार; अगले चार-पांच दिन सतर्कता जरूरी, पानी घटा तो सप्ताह के मध्य से सुधरेंगे हालात

भारत 19 
कानपुर। कानपुर में गंगा का जलस्तर एक बार फिर चेतावनी बिंदु के ऊपर पहुंच गया है। सोमवार सुबह कानपुर बैराज पर नदी का जलस्तर 114.20 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी स्तर 114 मीटर है। हालांकि गंगा अभी खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर नीचे हैं। ऐसे में फिलहाल घबराने की नहीं, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत है। अगले कुछ दिन यह तय करेंगे कि नदी का पानी और बढ़ता है या अब धीरे-धीरे उतरने लगता है। बाढ़ नियंत्रण कार्यालय के अनुसार 7 सितंबर सुबह आठ बजे कानपुर बैराज के अपस्ट्रीम में गंगा का जलस्तर 114.20 मीटर और डाउनस्ट्रीम में 113.93 मीटर रहा। नदी का डिस्चार्ज 3,59,202 क्यूसेक दर्ज हुआ। 30 अगस्त को अपस्ट्रीम जलस्तर 114.15 मीटर और डिस्चार्ज 3,53,607 क्यूसेक था। यानी आठ दिन में जलस्तर पांच सेंटीमीटर बढ़ा है।

खतरे का निशान दूर, कुछ दिन और सावधानी

मौजूदा जलस्तर खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर नीचे है। इसलिए फिलहाल बड़े खतरे वाली स्थिति नहीं है। फिर भी गंगा के चेतावनी बिंदु पार करने के कारण तटवर्ती और निचले इलाकों में रहने वालों को अगले कुछ दिनों तक अतिरिक्त सावधानी रखनी होगी। यदि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता है तो निचले इलाकों में पानी पहुंचने की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए नदी किनारे जाने और तेज बहाव वाले हिस्सों में उतरने से बचना बेहतर होगा।

हरिद्वार-नरौरा का पानी रखेगा दबाव

कानपुर में गंगा के जलस्तर का अगला रुख केवल स्थानीय बारिश से तय नहीं होगा। हरिद्वार और नरौरा से आने वाले पानी की मात्रा भी महत्वपूर्ण है। 30 अगस्त से 7 सितंबर के बीच दोनों बैराजों से डिस्चार्ज बढ़ा है। हरिद्वार का डिस्चार्ज 70,299 से बढ़कर 1,21,147 क्यूसेक और नरौरा का 71,051 से बढ़कर 99,297 क्यूसेक हो गया है। ऐसे में ऊपरी क्षेत्रों से आया पानी कानपुर तक पहुंचने के कारण नदी कुछ दिन और ऊंची रह सकती है। हालांकि यदि अब इन दोनों बैराजों से पानी घटने लगता है तो उसका असर भी आगे चलकर कानपुर में दिखाई देगा।

कानपुर में बारिश से ज्यादा ऊपर का पानी अहम

कानपुर में आने वाले दिनों में स्थानीय भारी बारिश का लंबा दौर फिलहाल नहीं दिख रहा है। इसलिए यहां गंगा के जलस्तर में बड़े बदलाव के लिए ऊपरी गंगा क्षेत्र की स्थिति ज्यादा महत्वपूर्ण होगी। मौसम विभाग ने उत्तराखंड में अगले दिनों में बारिश की संभावना जताई है। खासकर 10 से 12 सितंबर के बीच होने वाली बारिश पर नजर रहेगी। उत्तराखंड में ज्यादा बारिश हुई तो हरिद्वार क्षेत्र में गंगा का प्रवाह बढ़ सकता है और उसका असर नीचे की ओर कानपुर तक पहुंच सकता है।

अगले पांच दिन बताएंगे राहत कितनी दूर

मौजूदा परिस्थितियों में 7 से 9 सितंबर तक सतर्कता सबसे जरूरी रहेगी। यदि इस दौरान हरिद्वार और नरौरा का डिस्चार्ज बढ़ना बंद हो जाता है और घटने लगता है तो कानपुर में भी जलस्तर में गिरावट की संभावना मजबूत होगी। इसके बाद 10 से 12 सितंबर के दौरान उत्तराखंड की बारिश तस्वीर को प्रभावित करेगी। यदि बारिश कमजोर रही और ऊपरी बैराजों से पानी कम हुआ तो अगले सप्ताह के मध्य से कानपुर में राहत का दौर शुरू होने की उम्मीद बढ़ जाएगी।

पानी बढ़े तो सतर्क, घटे तो राहत करीब

तटवर्ती इलाकों के लोगों के लिए अगले कुछ दिनों में नदी का रुझान सबसे बड़ा संकेत होगा। जलस्तर लगातार ऊपर जाता है तो सावधानी बढ़ानी होगी। इसके उलट यदि दो-तीन दिन लगातार जलस्तर नीचे आता है और हरिद्वार-नरौरा का डिस्चार्ज भी घटता है तो इसे मुश्किल दौर के खत्म होने का संकेत माना जा सकता है। इसलिए फिलहाल डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही भी नहीं होनी चाहिए। अगले चार-पांच दिन सतर्क रहना होगा। इसके बाद ऊपरी गंगा क्षेत्र में बारिश कमजोर पड़ती है और पानी की आवक घटती है तो कानपुर में हालात सामान्य होने की राह खुल जाएगी।

सप्ताह के मध्य से मिल सकती है राहत

मौजूदा जलस्तर और ऊपरी बैराजों के प्रवाह को देखते हुए अभी गंगा के खतरे के निशान तक पहुंचने को प्रमुख संभावना नहीं माना जा सकता। नदी चेतावनी बिंदु के ऊपर जरूर है, लेकिन खतरे के निशान से अभी पर्याप्त नीचे है। इसलिए अगले कुछ दिन सावधानी के हैं, लंबे संकट के नहीं। यदि उत्तराखंड की बारिश अपेक्षा के अनुरूप कमजोर रही और हरिद्वार-नरौरा से पानी घटने लगा तो अगले सप्ताह के मध्य तक कानपुर में गंगा के जलस्तर में स्पष्ट सुधार दिखाई देने की उम्मीद है।

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