- PG, स्कूल और नर्सिंग होम के लिए स्ट्रक्चरल ऑडिट जरूरी होगा; सेफ्टी सर्टिफिकेट के बिना सार्वजनिक गतिविधियों पर रोक, लापरवाह अधिकारियों पर भी कार्रवाई
भारत 19
नई दिल्ली। सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने के हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने भवनों की सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों के लिए स्ट्रक्चरल ऑडिट और सेफ्टी सर्टिफिकेशन की व्यवस्था बनाने का ऐलान किया है। प्रस्तावित नीति के तहत सुरक्षा प्रमाणपत्र के बिना किसी भवन में सार्वजनिक गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं होगी।
सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों पर सख्ती
नई व्यवस्था के दायरे में पीजी, हॉस्टल, स्कूल, नर्सिंग होम और ऐसी अन्य इमारतें आएंगी, जहां बड़ी संख्या में लोग रहते या आते-जाते हैं। सरकार का मकसद भवन की संरचनात्मक स्थिति की नियमित जांच कराना और खतरे की स्थिति में समय रहते कार्रवाई करना है। सेफ्टी सर्टिफिकेट के बिना सार्वजनिक उपयोग की अनुमति नहीं देने का प्रस्ताव इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
20, 30 और 40 साल पुराने भवनों की जांच
मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रस्तावित नीति में 20, 30 और 40 साल पुराने भवनों के लिए स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट और सुरक्षा प्रमाणन की व्यवस्था की जाएगी। इससे पुरानी इमारतों की संरचनात्मक मजबूती की नियमित जांच संभव होगी। हालांकि ऑडिट की प्रक्रिया, समय-सीमा और प्रमाणपत्र जारी करने की जिम्मेदारी किस विभाग की होगी, इसका विस्तृत खाका नीति तैयार होने के बाद सामने आएगा।
सेफ्टी सर्टिफिकेट नहीं तो सार्वजनिक गतिविधि बंद
सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था का सबसे अहम प्रावधान यह है कि असुरक्षित या बिना प्रमाणित भवन में सार्वजनिक गतिविधियों को अनुमति नहीं दी जाएगी। इसका असर उन पीजी, हॉस्टल, स्कूल और नर्सिंग होम पर पड़ सकता है, जो पुराने भवनों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे भवनों को सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के लिए ऑडिट और प्रमाणन प्रक्रिया से गुजरना होगा।
भवन मालिकों के साथ अफसर भी जवाबदेह
मुख्यमंत्री ने भवन सुरक्षा में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। किसी भवन के निरीक्षण, सुरक्षा मंजूरी या नियमों के अनुपालन में लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों को भी जिम्मेदार माना जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भवन हादसों की जवाबदेही केवल मालिक तक सीमित नहीं रहेगी।
आसपास की इमारतों की भी होगी जांच
सत्य निकेतन हादसे के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन सक्रिय है। जिन भवनों को खतरनाक पाया जाएगा, उनके खिलाफ सीलिंग, खाली कराने या जरूरत पड़ने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। इससे हादसे के बाद दूसरे संभावित जोखिम वाले भवनों की पहचान पर भी जोर बढ़ गया है।
छह मौतों के बाद सरकार ने बढ़ाई सख्ती
सत्य निकेतन हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो चुकी है। हादसे की जांच के साथ अब भवन सुरक्षा व्यवस्था की खामियों की भी पड़ताल की जा रही है। इसी के बाद दिल्ली सरकार ने पुराने और सार्वजनिक इस्तेमाल वाले भवनों के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने का फैसला किया है।
अभी प्रस्तावित है नई बिल्डिंग पॉलिसी
सरकार की ओर से घोषित व्यवस्था फिलहाल प्रस्तावित नीति है। इसके प्रावधानों को अंतिम रूप देने के बाद ही औपचारिक आदेश जारी होंगे और नियम लागू किए जाएंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि स्ट्रक्चरल ऑडिट कितने अंतराल पर होगा, सेफ्टी सर्टिफिकेट कौन जारी करेगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले भवन मालिकों या संचालकों पर कितनी सख्ती होगी।


