- 15 अक्टूबर से शुरू होगा तीन दिवसीय मेला; आठ से अधिक राज्यों के किसान जुटेंगे, उन्नत खेती के साथ आय बढ़ाने के तरीके और कृषि नवाचार देखेंगे
भारत 19
कानपुर। किसान सिर्फ ज्यादा फसल पैदा करे, बात अब यहीं तक सीमित नहीं रह गई है। खेती की लागत घटे, उपज की कीमत बढ़े और एक ही खेत से आय के नए रास्ते खुलें, इसी दिशा में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए), कानपुर अपना तीन दिवसीय उत्तर क्षेत्रीय किसान मेला आयोजित करने जा रहा है। 15 से 17 अक्टूबर तक होने वाले मेले में आठ से अधिक राज्यों के किसान जुटेंगे। खास बात ये होगी कि उन्हें विश्वविद्यालय की कृषि रिसर्च से लेकर मशरूम, मिलेट्स, स्मार्ट खेती, कृषि प्रसंस्करण, सौर ऊर्जा और स्टार्टअप तक के ऐसे विकल्प एक जगह देखने को मिलेंगे, जिन्हें खेती से अतिरिक्त कमाई से जोड़ा जा सकता है। ‘सशक्त किसान, आत्मनिर्भर भारत’ थीम पर आयोजित होने वाले मेले में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, नई दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ समेत विभिन्न क्षेत्रों के किसान शामिल होंगे।
सीएसए की रिसर्च अब खेत और कमाई से जुड़ेगी
अलग-अलग राज्यों के किसानों का मेले में आना केवल अनुभव साझा करने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि स्थानीय मिट्टी, जलवायु और फसल के हिसाब से अपनाई जा रही तकनीक और सफल प्रयोगों की जानकारी भी साझा होगी। सीएसए में गेहूं, धान, चना, मक्का, सरसों और सब्जियों की विभिन्न किस्मों पर सैकड़ों शोध किए जा चुके हैं। कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता के अनुसार इनमें कई शोध अलग-अलग राज्यों की मिट्टी और जलवायु के लिहाज से उपयोगी हैं। मेले में किसानों को इन्हीं शोध और तकनीकों से परिचित कराया जाएगा, ताकि विश्वविद्यालय में विकसित मॉडल प्रयोगशाला से निकलकर खेत तक पहुंच सकें। दूसरे राज्यों से आने वाले किसान अपने क्षेत्र के मुताबिक उपयोगी किस्मों और तकनीकों की जानकारी ले सकेंगे।
एक छत के नीचे खेती के कई विकल्प
मेले में कृषि यंत्र, उन्नत बीज, उर्वरक, औषधीय पौधे, सौर ऊर्जा उपकरण और दुग्ध उत्पादों के स्टॉल लगाए जाएंगे। हस्तकला और प्रसंस्कृत खाद्य सामग्री भी प्रदर्शित और बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगी। यानी किसान को सिर्फ क्या उगाना है, इसकी जानकारी नहीं मिलेगी, बल्कि उपज के बाद उसे कैसे उपयोगी उत्पाद में बदला जा सकता है और किस तरह अतिरिक्त मूल्य हासिल किया जा सकता है, इसकी भी जानकारी मिलेगी।
मशरूम और मिलेट्स से अतिरिक्त आय पर फोकस
किसान मेले में मशरूम उत्पादन और श्रीअन्न यानी मिलेट्स से तैयार उत्पाद खास आकर्षण होंगे। सीएसए के वैज्ञानिक नई फसल प्रजातियों के साथ किसानों को मशरूम और मिलेट्स आधारित उत्पादों की संभावनाएं बताएंगे। इससे किसानों को पारंपरिक फसलों पर निर्भरता कम करने, फसल विविधीकरण और वैकल्पिक आय के रास्ते तलाशने का मौका मिलेगा। उत्पादों में मूल्य संवर्धन कर बाजार में बेहतर कीमत हासिल करने के तरीके भी समझाए जाएंगे।
स्मार्ट खेती में दिखेंगे किसानों के अपने मॉडल
मेले में स्मार्ट और डिजिटल कृषि को भी प्रमुख स्थान दिया जाएगा। छात्रों और कृषि विज्ञान केंद्रों के सहयोग से किसानों द्वारा विकसित नवाचार और स्टार्टअप मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। इन मॉडलों के जरिए खेती में तकनीक के इस्तेमाल, लागत कम करने और कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य हासिल करने के तरीके सामने आएंगे। इससे किसानों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि तकनीक का इस्तेमाल केवल बड़े किसानों या बड़े खेतों तक सीमित नहीं है।
सौर ऊर्जा से कृषि ऋण तक विकल्प
मेले में सौर ऊर्जा उपकरणों के साथ विभिन्न बैंक, शोध संस्थान और सरकारी विभाग भी शामिल होंगे। किसानों को कृषि ऋण, वित्तीय सुविधाओं, सरकारी योजनाओं और तकनीकी सहायता की जानकारी दी जाएगी। इसका एक फायदा यह होगा कि किसान खेती से जुड़ी तकनीक या संसाधन अपनाने के लिए उपलब्ध वित्तीय विकल्पों को भी समझ सकेंगे।
आठ से अधिक राज्यों के किसान साझा करेंगे अनुभव
जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तर प्रदेश और पंजाब तक के किसानों के जुटने से अलग-अलग कृषि परिस्थितियों में अपनाए जा रहे प्रयोगों की जानकारी एक मंच पर आएगी। किसान अपने अनुभव साझा करेंगे और दूसरे क्षेत्रों में सफल तकनीकों को समझ सकेंगे।


