- मोतीझील से गोल चौराहे तक हजारों युवाओं ने निकाला मार्च; UGC प्रावधानों पर पुनर्विचार और आरक्षण सुधार की मांग, सरकार को देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
भारत 19
कानपुर। UGC के नए प्रावधानों और आरक्षण व्यवस्था को लेकर युवाओं का विरोध अब कानपुर की सड़कों पर उतर आया है। सोमवार को आरक्षण सुधार आंदोलन कानपुर के बैनर तले हजारों युवाओं ने हाथों में मशाल लेकर मोतीझील से गोल चौराहे तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा और रोजगार में समान अवसर, पारदर्शिता और आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। साथ ही चेतावनी दी कि मांगों पर सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाया जाएगा।
शिक्षा-रोजगार में समान अवसर की मांग
मशाल मार्च की शुरुआत मोतीझील स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा से हुई। यहां से प्रदर्शनकारी हाथों में जलती मशाल लेकर गोल चौराहे की ओर रवाना हुए। रास्ते भर UGC के नए प्रावधानों पर पुनर्विचार और आरक्षण व्यवस्था की मौजूदा संरचना की समीक्षा की मांग को लेकर नारे लगाए गए। मार्च का समापन गोल चौराहे पर शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा के सामने हुआ। समापन पर वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन किसी जाति अथवा समुदाय के खिलाफ नहीं है। उनकी मांग शिक्षा और रोजगार में सामाजिक न्याय के साथ समान अवसर, पारदर्शिता और योग्यता को उचित महत्व देने वाली व्यवस्था की है। उनका कहना था कि ये मुद्दे केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के शिक्षा और रोजगार के अवसरों से भी जुड़े हैं।

UGC प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से UGC के नए प्रावधानों पर पुनर्विचार करने और उन्हें वापस लेने की मांग उठाई। इसके साथ ही मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक सुधार करने की मांग भी की गई। आंदोलनकारियों का कहना है कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसरों में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने सरकार से युवाओं की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करने और नीतिगत स्तर पर समाधान तलाशने की अपील की।
कानपुर से देशभर में आंदोलन बढ़ाने का ऐलान
मशाल मार्च के समापन पर आंदोलनकारियों ने हाथों में मशाल लेकर अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि कानपुर से उठी आवाज को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से व्यापक किया जाएगा। जनजागरण, संवाद और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन के माध्यम से देशभर के युवाओं को इससे जोड़ने की बात कही गई।
शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रखने का संकल्प
आंदोलनकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं, लेकिन आंदोलन का स्वरूप शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहेगा। उनका कहना था कि इन मुद्दों का समाधान संवाद के जरिए निकाला जाना चाहिए। मार्च के अंत में आंदोलनकारियों ने कहा, “यह शुरुआत है, अंत नहीं।” उन्होंने कहा कि मांगों पर सरकार की गंभीर पहल होने तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखा जाएगा।
मशाल मार्च में कई पदाधिकारी और युवा शामिल
मशाल मार्च में प्रदेश मंत्री युवा मोर्चा अरविंद राज त्रिपाठी, रविंद्र पाटनी, सोनू पाण्डेय, आशुतोष दीक्षित, राघवेंद्र मिश्रा, धीरू त्रिपाठी, भानु भदौरिया, पीयूष मिश्रा, योगेंद्र अग्निहोत्री, आलोक मिश्रा, अनुराग मिश्रा और ऋषि समेत अन्य लोग शामिल रहे।


