Hot Topics

टिकट तय नहीं, बम-बम ने विधायकों को दे दी बधाई

  • विधायक सोचते रहे—हाईकमान फैसला करेगा, बम-बम बोले—बधाई हो, टिकट आपका ही है

BHARAT 19/ कानपुर। भाजपा में विधानसभा चुनाव के टिकट पर मंथन अभी शुरू ही हुआ है, दावेदारों ने अपने-अपने गणित लगाने शुरू किए हैं, सर्वे और समीकरणों की चर्चा चल रही है, लेकिन कानपुर के भाजपा नेता सर्वेश शुक्ला उर्फ बम-बम ने शायद टिकट वितरण की इस लंबी प्रक्रिया को थोड़ा आसान कर दिया है। उन्होंने वीडियो जारी कर मौजूदा विधायकों को अग्रिम बधाई दे डाली, मानो केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक से पहले ही परिणाम घोषित हो गया हो। वीडियो में बम-बम का संदेश साफ है, जिस विधायक ने पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं की है और जिस पर कोई गंभीर आरोप नहीं है, उसका टिकट नहीं कटेगा। यानी टिकट का फॉर्मूला भी तैयार, पात्रता की शर्तें भी तय और बधाई भी अग्रिम। अब पार्टी के अंदर सवाल यह उठ रहा है कि टिकट की घोषणा अभी हुई नहीं, लेकिन बधाई समारोह शुरू कैसे हो गया?

विधायक हाईकमान देखें या बम-बम का वीडियो?

भाजपा में आमतौर पर टिकट का फैसला संगठनात्मक फीडबैक, सर्वे, क्षेत्रीय समीकरण, जीत की संभावना और आखिर में केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद होता है। लेकिन बम-बम के वीडियो के बाद पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं को लग रहा है कि शायद उन्हें भी अब चुनावी प्रक्रिया का नया अध्याय पढ़ लेना चाहिए। पहले टिकट की दावेदारी कीजिए, फिर सर्वे का इंतजार कीजिए, दिल्ली-लखनऊ की बैठकों पर नजर रखिए और यदि फिर भी बेचैनी बनी रहे तो बम-बम का वीडियो देख लीजिए। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह राजनीतिक आत्मविश्वास था, निजी आकलन था या फिर कोई ऐसी जानकारी, जो अभी पार्टी के बाकी नेताओं तक नहीं पहुंची है।

आठ बार के विधायक को भी अग्रिम शुभकामना

बम-बम ने जिन विधायकों को टिकट की अग्रिम बधाई दी है, उनमें विधानसभा अध्यक्ष और आठ बार के विधायक सतीश महाना भी शामिल हैं। नीलिमा कटियार, सुरेंद्र मैथानी, अभिजीत सिंह, महेश त्रिवेदी सांगा जैसे दो-दो बार के विधायक हैं, जबकि राहुल बच्चा एक बार विधायक रह चुके हैं।

पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी का एक कारण यही है कि जिन नेताओं ने वर्षों तक संगठन और चुनावी राजनीति में समय बिताया, उन्हें अब चुनाव से पहले टिकट की शुभकामना एक अपेक्षाकृत नए भाजपा नेता की ओर से मिल रही है। कुछ दावेदारों की परेशानी शायद यह है कि वे अब तक टिकट मांगने की तैयारी कर रहे थे, जबकि विधायकों को टिकट मिलने की बधाई पहले ही पहुंच गई।

लखनऊ से आशीर्वाद, कानपुर में टिकट का संदेशवीडियो में बम-बम ने यह भी बताया कि वह लखनऊ में अपने राजनीतिक गुरु और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का आशीर्वाद लेकर आए हैं। इसके बाद उनका टिकट वाला संदेश और ज्यादा चर्चा में आ गया। पार्टी के भीतर बम-बम को उप मुख्यमंत्री के करीबी नेताओं में गिना जाता है और कई कार्यक्रमों में वे उनके साथ भी नजर आते रहे हैं। ऐसे में उनके वीडियो को कुछ लोग सामान्य राजनीतिक टिप्पणी मान रहे हैं तो कुछ लोग उसके पीछे राजनीतिक संदेश तलाश रहे हैं। यही वजह है कि सवाल केवल वीडियो का नहीं है, बल्कि वीडियो के टाइमिंग का भी है। जब टिकट को लेकर दावेदारों की धड़कनें तेज हों, सर्वे और बदलाव की अटकलें चल रही हों, तब किसी नेता का कैमरे के सामने आकर कहना कि मौजूदा विधायक निश्चिंत रहें, स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बनता है।

भाजपा में नई प्रक्रिया आई क्या?

पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि टिकट देने या काटने का फैसला शीर्ष नेतृत्व और केंद्रीय चुनाव समिति करती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या टिकट वितरण की कोई नई व्यवस्था शुरू हो गई है? क्या केंद्रीय चुनाव समिति से पहले कानपुर टिकट पूर्वानुमान सेवा शुरू हो गई है? और यदि ऐसा नहीं है तो फिर बम-बम किस राजनीतिक आत्मविश्वास के साथ विधायकों को सार्वजनिक रूप से अग्रिम बधाई दे रहे हैं? टिकट के कई दावेदारों का तर्क है कि यदि मौजूदा विधायकों के टिकट पहले ही तय हैं तो फिर वे वर्षों से क्षेत्र में मेहनत, जनसंपर्क और संगठन में सक्रियता किस उम्मीद में बढ़ा रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अब तक यह नहीं कहा गया है कि किसी मौजूदा विधायक का टिकट तय हो चुका है।

बसपा से कांग्रेस और फिर भाजपा तक का सफर

सर्वेश शुक्ला उर्फ बम-बम की राजनीतिक यात्रा भी इस पूरे मामले को रोचक बनाती है। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बसपा के टिकट पर कानपुर की जनरलगंज सीट से चुनाव लड़ा था। बाद में वे कांग्रेस में भी रहे और फिर भाजपा में आए। यानी भाजपा की राजनीति में उनकी पारी उन नेताओं की तुलना में अपेक्षाकृत नई है, जिन्होंने लंबे समय तक पार्टी संगठन में काम किया है। शायद यही बात कुछ पुराने कार्यकर्ताओं को ज्यादा चुभ रही है। उनका सवाल है कि पार्टी में सालों से टिकट की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं को अब टिकट की दिशा भी बाहर से आए नेता बताएंगे?

टिकट का मामला या राजनीतिक ‘ट्रेलर’?

बम-बम का वीडियो ऐसे समय आया है जब भाजपा के भीतर आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर संभावित बदलावों, विधायकों के प्रदर्शन और नए चेहरों की संभावना पर चर्चाएं चल रही हैं। इसलिए इसे केवल एक शुभकामना वीडियो मानकर छोड़ देना भी आसान नहीं है। राजनीति में कई बार बधाई का मतलब सिर्फ बधाई नहीं होता। उसके पीछे संदेश भी होता है, संकेत भी और कभी-कभी शक्ति प्रदर्शन भी।

यही वजह है कि बम-बम के वीडियो के बाद कानपुर भाजपा में सवालों की एक नई सूची तैयार हो गई है—

  • टिकट किसने तय किया?
  • किस आधार पर तय किया?
  • और यदि तय नहीं हुआ तो अग्रिम बधाई किस बात की?

पुराने विवाद भी फिर चर्चा में

बम-बम का नाम पूर्व में भी विवादों में रहा है। अगस्त 2025 में काकादेव थाने में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ आपराधिक धमकी समेत आरोपों में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। शिकायत में पॉक्सो एक्ट के मामले में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया गया था और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। वर्तमान टिकट विवाद के बीच उनके विरोधी इस प्रकरण का भी उल्लेख कर रहे हैं, हालांकि किसी शिकायत या मुकदमे को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।

अब कानपुर भाजपा में नजर इस बात पर है कि संगठन बम-बम की अग्रिम बधाई को महज उत्साह मानेगा, राजनीतिक भविष्यवाणी मानेगा या फिर टिकट वितरण से पहले हुआ कोई ऐसा ‘धमाका’, जिसकी गूंज अभी कुछ दिन और सुनाई देगी। फिलहाल स्थिति यह है कि टिकट का ऐलान बाकी है, लेकिन बधाइयां शुरू हो चुकी हैं। और भाजपा के दावेदार शायद यही सोच रहे हैं, “जब बधाई ही बंट रही है तो हमारा नंबर कब आएगा?”

Tags :

Bharat 19 News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News