- राखी बांधी, डीएम ने बचाई पढ़ाई और संवारे सपने
भारत 19
कानपुर। बेटी की पढ़ाई आर्थिक तंगी की भेंट न चढ़ जाए, इसी चिंता में ललिता यादव उसे लेकर कलेक्ट्रेट पहुंची थीं। घरों में चौका-बर्तन कर परिवार चलाने वाली ललिता की बेटी इशु की स्कूल फीस कई महीनों से जमा नहीं हुई थी। कक्षा 12 की इस छात्रा पर करीब 29 हजार रुपये फीस बकाया होने से पढ़ाई जारी रखने की चिंता थी।
जनता दर्शन में मां ने डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह को परेशानी बताई, तभी इशु उनको राखी बांधने की इच्छा जताई। डीएम ने उसकी इच्छा स्वीकार की। राखी बंधने के बाद यह रिश्ता महज त्योहार की औपचारिकता नहीं रहा, बल्कि इशु की पढ़ाई का रास्ता भी आसान हो गया। नौबस्ता के हंसपुरम निवासी इशु के पिता प्रागी लाल यादव की 2017 में मृत्यु हो चुकी है। मां ललिता के सामने परिवार चलाने के साथ बेटी की पढ़ाई जारी रखना बड़ी चुनौती थी। मामला समझने के बाद डीएम ने विद्यालय के प्रधानाचार्य से बात की। बकाया फीस की आधी रकम जमा कराई गई, जबकि शेष फीस माफ कराने पर सहमति बनी।

फीस के बाद स्कूल पहुंचने की मुश्किल भी हुई आसान
डीएम ने इशु से पढ़ाई और स्कूल आने-जाने की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी ली। घर से स्कूल की दूरी करीब दो किलोमीटर होने पर उसके लिए साइकिल खरीदवाई गई। यानि जिस छात्रा की मां कलेक्ट्रेट सिर्फ फीस की मदद मांगने पहुंची थी, वहां से इशु को पढ़ाई जारी रखने का सहारा और स्कूल पहुंचने का साधन, दोनों मिल गए। मुलाकात के दौरान इशु ने अपना सपना भी साझा किया। वह आगे चलकर आईएएस अधिकारी बनना चाहती है और जरूरतमंद लोगों की मदद करना चाहती है। डीएम ने उसके इस लक्ष्य को गंभीरता से लेते हुए डिप्टी कलेक्टर ज्योति शर्मा को उसकी मेंटरिंग की जिम्मेदारी दी है। वह इशु को आगे की पढ़ाई और करियर को लेकर मार्गदर्शन देंगी।
बाल गृह की बेटियों तक भी पहुंचा रक्षाबंधन का रिश्ता
रक्षाबंधन के अवसर पर डीएम स्वरूप नगर स्थित राजकीय बाल गृह बालिका भी पहुंचे। यहां बेटियों ने उन्हें राखी बांधी। डीएम ने हर बच्ची को उपहार में गुल्लक दी। गुल्लक के साथ उन्होंने छोटी बचत और बड़े सपनों का संदेश भी दिया। बच्चियों से उनकी पढ़ाई, स्वास्थ्य और भविष्य की योजनाओं पर बातचीत की गई और उन्हें लक्ष्य तय कर मेहनत से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। कलेक्ट्रेट में इशु की राखी ने एक छात्रा की रुकी पढ़ाई को सहारा दिया, जबकि बाल गृह की बेटियों के बीच रक्षाबंधन ने उन्हें अपने भविष्य के लिए सपने संजोने का संदेश दिया।
