- सीमा खुली, सड़कें बंद, काठमांडू के साथ दूसरी बाजारों तक माल पहुंचाना हो गया मुश्किल
नई दिल्ली। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का असर अब भारत-नेपाल व्यापार और भारतीय उत्पादों की सप्लाई चेन पर पड़ा है। रक्सौल-वीरगंज बॉर्डर पर माल की आवाजाही सामान्य होने के बाद भी नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से सड़क नेटवर्क प्रभावित होने के कारण भारतीय सामान का काठमांडू और दूसरे बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। भारत व नेपाल में वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 9.38 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। नेपाल की सप्लाई चेन में लंबी बाधा का असर भारतीय निर्यातकों से लेकर नेपाल के बाजारों तक पहुंच सकता है। कार्गो की डिलीवरी में देरी, ट्रकों का इंतजार और परिवहन लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
रक्सौल-वीरगंज से गुजरता है करोड़ों का कारोबार
रक्सौल-वीरगंज बॉर्डर भारत-नेपाल व्यापार की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन में शामिल है। भारत के लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार रक्सौल लैंड पोर्ट से वित्त वर्ष 2025-26 में 38,425.95 करोड़ रुपये का कुल व्यापार हुआ। इस दौरान 2,19,210 कार्गो मूवमेंट दर्ज किए गए। ये आंकड़ा बताता है कि रक्सौल कॉरिडोर केवल सीमा पार करने का रास्ता नहीं, बल्कि भारत से नेपाल जाने वाले बड़े कारोबार की प्रमुख धुरी है। मौजूदा संकट में सबसे बड़ी चुनौती सीमा पार करना नहीं, बल्कि सीमा पार पहुंच चुके भारतीय माल को नेपाल के अंतिम बाजारों तक पहुंचाना बन गई है।
सीमा खुली, लेकिन आगे माल पहुंचाना मुश्किल
नेपाल में बाढ़ का मुख्य विनाश रक्सौल-वीरगंज सीमा क्षेत्र में नहीं हुआ है। आपदा का बड़ा असर नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवा, नुवाकोट और भोटेकोशी-त्रिशूली नदी क्षेत्र में पड़ा है। बाढ़ और भूस्खलन के बाद पहाड़ी इलाकों से आया मलबा नीचे के क्षेत्रों तक पहुंचने से कई अहम सड़क मार्ग प्रभावित हुए हैं। रसुवा और नुवाकोट के राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ धादिंग का पृथ्वी राजमार्ग भी प्रभावित हुआ है। इसका सीधा मतलब है कि भारतीय ट्रक और कार्गो नेपाल की सीमा तक पहुंचने के बाद भी अंतिम गंतव्य तक आसानी से नहीं पहुंच पा सकते। क्षतिग्रस्त सड़क, मलबा और यातायात बाधित होने से मालवाहक वाहनों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
काठमांडू जाने वाले रास्तों ने बढ़ाई चिंता
काठमांडू नेपाल का सबसे बड़ा उपभोक्ता और कारोबारी बाजार है। ऐसे में वहां तक पहुंचने वाले प्रमुख मार्गों पर बाधा भारत से जाने वाले माल की सप्लाई के लिए चिंता बढ़ा सकती है। 27 अगस्त की स्थिति में धादिंग के पृथ्वी राजमार्ग पर कई स्थानों पर बाढ़ के बाद मलबा जमा होने से यातायात प्रभावित रहा। काठमांडू-बैरेनी और मुग्लिन-गालौडी के बीच कुछ हिस्सों में सड़क साफ होने के बावजूद बैरेनी और गालौडी के बीच करीब 13 किलोमीटर के क्षेत्र में कई स्थानों पर मलबा जमा रहा। मलबा हटाने का काम जारी है, लेकिन जब तक सड़क नेटवर्क पूरी तरह सामान्य नहीं होता, तब तक डिलीवरी टाइम बढ़ने और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट महंगी होने की आशंका बनी रहेगी।
भारतीय सामान की डिलीवरी पर बढ़ा दबाव
नेपाल जाने वाले भारतीय उत्पादों में केवल एक-दो तरह का सामान शामिल नहीं है। रक्सौल मार्ग से पेट्रोलियम उत्पाद, लोहा-इस्पात, मोटर वाहन के पुर्जे, मशीनरी, मशीन पार्ट्स, दवाएं, चावल और दूसरे खाद्यान्न समेत कई जरूरी उत्पादों की आवाजाही होती है। इसके अलावा पेय पदार्थ, रिफाइंड और पामोलीन उत्पाद तथा आयुर्वेदिक उत्पाद भी इस व्यापारिक मार्ग से जुड़े हैं। सड़क संपर्क लंबे समय तक प्रभावित रहने पर भारतीय निर्यातकों के सामने डिलीवरी की समस्या खड़ी हो सकती है। औद्योगिक कच्चे माल के पहुंचने में देरी से उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जबकि दवा, खाद्यान्न और उपभोक्ता वस्तुओं की सप्लाई बाधित होने का असर नेपाल के स्थानीय बाजारों तक पहुंच सकता है।
दवा, खाद्यान्न और मशीनरी पर रहेगा असर
बाढ़ से पैदा हुई यह स्थिति केवल ट्रांसपोर्ट सेक्टर की समस्या नहीं है। नेपाल में सड़क नेटवर्क लंबे समय तक प्रभावित रहा तो सबसे ज्यादा असर उन उत्पादों पर पड़ सकता है, जिनकी नियमित और समयबद्ध सप्लाई जरूरी है। दवाओं की डिलीवरी में देरी, खाद्यान्न की सप्लाई प्रभावित होने और मशीनरी या औद्योगिक कच्चे माल के देर से पहुंचने पर कारोबारियों को अतिरिक्त लागत उठानी पड़ सकती है। यही कारण है कि नेपाल की सड़क बहाली पर भारत-नेपाल व्यापार से जुड़े कारोबारियों की नजर बनी हुई है।
पेट्रोलियम सप्लाई पर बाढ़ का असर अलग
पेट्रोलियम उत्पाद भी भारत से नेपाल जाने वाले प्रमुख कार्गो में शामिल हैं, लेकिन इसकी सप्लाई व्यवस्था दूसरे सामान से अलग है। भारत और नेपाल के बीच रक्सौल-अमलेखगंज पेट्रोलियम पाइपलाइन मौजूद है। ऐसे में सड़क मार्ग प्रभावित होने का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोलियम की पूरी आपूर्ति भी उसी तरह बाधित हो जाएगी, जैसे ट्रकों से पहुंचने वाले अन्य उत्पादों की हो सकती है। इसलिए बाढ़ के कारण भारत-नेपाल सप्लाई चेन पर पड़ने वाले असर का आकलन अलग-अलग उत्पादों की सप्लाई व्यवस्था के आधार पर करना होगा।
9 अरब डॉलर के व्यापार पर क्यों बढ़ी चिंता
भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच होने वाला कारोबार नेपाल के कुल बाहरी माल व्यापार का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखता है। वित्त वर्ष 2025-26 में 9.38 अरब डॉलर का भारत-नेपाल व्यापार इस बात का संकेत है कि सड़क नेटवर्क में लंबे समय तक बाधा रहने का असर केवल नेपाल तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव भारतीय निर्यातकों, नेपाल के आयातकों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और स्थानीय बाजारों तक पहुंच सकता है। खासकर उन कारोबारों के लिए जोखिम बढ़ सकता है, जिनकी सप्लाई रोजाना या तय समय पर पहुंचना जरूरी है।
रक्सौल कॉरिडोर बना भारत-नेपाल व्यापार की लाइफलाइन
वित्त वर्ष 2025-26 में रक्सौल लैंड पोर्ट से 38,425.95 करोड़ रुपये का व्यापार और 2.19 लाख से अधिक कार्गो मूवमेंट दर्ज होना इस कॉरिडोर की अहमियत बताता है। ऐसे में नेपाल के अंदर सड़क बाधा लंबे समय तक बनी रही तो भारतीय माल सीमा पार करने के बाद भी रास्ते में अटक सकता है। यानी रक्सौल बॉर्डर खुला होने के बावजूद सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती। असली परीक्षा नेपाल के अंदर सड़क, पुल और परिवहन नेटवर्क को बहाल करने की है।
नेपाल बाढ़ से रोजाना नुकसान कितना, कहना मुश्किल
फिलहाल यह बताना जल्दबाजी होगी कि नेपाल में बाढ़ के कारण भारत-नेपाल व्यापार को रोजाना कितना आर्थिक नुकसान हो रहा है। नुकसान का वास्तविक आंकड़ा इस बात पर निर्भर करेगा कि क्षतिग्रस्त सड़कें और पुल कितनी जल्दी चालू होते हैं। लेकिन यदि प्रमुख मार्गों पर बाधा लंबी चली तो कारोबार पर असर करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है। देरी से पहुंचने वाला माल, बढ़ती ट्रांसपोर्ट लागत और वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल सप्लाई चेन की लागत बढ़ा सकता है।


