- योगी कैबिनेट ने ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर’ नाम रखने के प्रस्ताव को दी मंजूरी; प्रधानमंत्री के 25 साल के जनसेवा कार्यों के सम्मान में फैसला, अखिलेश बोले- जिनकी कुर्सी छिनने वाली है, वे निशानी छोड़ना चाहते हैं
भारत 19/ लखनऊ। जेवर एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी बहस छिड़ गई है। योगी सरकार ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि यह फैसला प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के जनसेवा कार्यों के सम्मान में लिया गया है। वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि जिनकी कुर्सी छिनने वाली होती है, वे अपनी निशानी छोड़कर जाना चाहते हैं।
कैबिनेट ने नामकरण के प्रस्ताव को दी मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर’ रखने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में विकास की कई बड़ी परियोजनाएं आगे बढ़ी हैं। उन्होंने एयरपोर्ट को प्रदेश के लिए बड़ी सौगात बताते हुए प्रधानमंत्री का आभार जताया। सरकार ने इस फैसले को नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जोड़कर देखा है। मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद मई 2014 में वह देश के प्रधानमंत्री बने।
अखिलेश बोले- जाने वाले लोग निशानी छोड़ना चाहते हैं
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नामकरण के फैसले पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिनकी कुर्सी छिनने वाली होती है, वे अपनी निशानी छोड़कर जाना चाहते हैं। अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि डबल इंजन सरकार के पास जनता को दिखाने के लिए अपना कोई काम नहीं है। अखिलेश की टिप्पणी को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सपा के बीच तेज होती राजनीतिक बयानबाजी के संदर्भ में देखा जा रहा है। भाजपा सरकार फैसले को प्रधानमंत्री के योगदान के सम्मान से जोड़ रही है, जबकि सपा ने इस पर सवाल उठाए हैं।
दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी के लिए अहम परियोजना
जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर की हवाई कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 नवंबर 2021 को इसकी आधारशिला रखी थी। परियोजना का उद्देश्य दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्रियों का दबाव कम करना और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कारोबार तथा निवेश की संभावनाओं को बढ़ाना है।
नाम बदलने की औपचारिक प्रक्रिया अभी बाकी
राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद नामकरण प्रस्ताव को केंद्र सरकार के स्तर पर आवश्यक स्वीकृति और अधिसूचना की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसलिए फिलहाल इसे नाम बदलने के प्रस्ताव की मंजूरी के रूप में देखा जाना चाहिए। नए नाम का आधिकारिक इस्तेमाल कब से शुरू होगा, यह आगे की सरकारी प्रक्रिया पूरी होने पर स्पष्ट होगा।


