- SGGFC 3.0 में क्लीनटेक स्टार्टअप्स और नगर निकायों के बीच सीधा संपर्क, SIIC की मदद से कचरा प्रबंधन की तकनीक लैब से जमीन तक पहुंचेगी
भारत 19
विक्सन सिकरोड़िया, कानपुर। शहरों को कचरा मुक्त बनाने की मुहिम में आईआईटी कानपुर का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब तकनीक को सीधे नगर निकायों की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। Startup Gateway for Garbage-Free Cities (SGGFC) 3.0 के तहत क्लीनटेक और वेस्ट-मैनेजमेंट स्टार्टअप्स को शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) की वास्तविक समस्याओं पर समाधान विकसित करने और उन्हें जमीन पर उतारने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम को आईआईटी कानपुर के Startup Incubation and Innovation Centre (SIIC) और केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है।
स्टार्टअप्स को मिलेगा शहरों की समस्या का सीधा मैदान
SGGFC 3.0 का फोकस सिर्फ नए आइडिया विकसित करने पर नहीं, बल्कि उन्हें शहरों की वास्तविक कचरा प्रबंधन समस्याओं से जोड़ने पर है। इसके तहत ऐसे स्टार्टअप्स को अवसर दिया जा रहा है जो कचरा प्रबंधन, रिसाइक्लिंग, वेस्ट-टू-वैल्यू और टिकाऊ शहरी विकास के लिए तकनीकी समाधान तैयार कर रहे हैं। SIIC के कार्यक्रम विवरण के अनुसार चयनित स्टार्टअप्स को ₹20 लाख तक की फंडिंग सहायता, एक साल की इनक्यूबेशन और तकनीकी एवं बिजनेस मेंटरिंग उपलब्ध कराई जाएगी।
लैब से निकलकर नगर निकायों तक पहुंचेगी तकनीक
इस पहल का बड़ा बदलाव यह है कि कचरा प्रबंधन की तकनीक को केवल प्रयोगशालाओं और प्रोटोटाइप तक सीमित रखने के बजाय उसके मैदानी इस्तेमाल और विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। स्टार्टअप्स को IIT कानपुर की R&D सुविधाओं और विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही निवेशकों और शहरी क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के साथ संपर्क की सुविधा भी कार्यक्रम का हिस्सा है।
IIT कानपुर बनेगा तकनीक और शहरों के बीच सेतु
SGGFC में SIIC की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि संस्थान लंबे समय से कचरा प्रबंधन और वेस्ट-टू-वैल्यू क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन सपोर्ट देता रहा है। IIT कानपुर के अनुसार SGGFC के पिछले चरण में भी वेस्ट-मैनेजमेंट स्टार्टअप्स को कार्यक्रम से जोड़ा गया था। अब तीसरे चरण में यह मॉडल और व्यापक स्तर पर शहरी कचरा प्रबंधन की चुनौतियों से स्टार्टअप्स को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रिसाइक्लिंग से वेस्ट-टू-वैल्यू तक फोकस
शहरी कचरे की समस्या केवल कूड़ा उठाने और उसे डंप करने तक सीमित नहीं है। कचरे से उपयोगी संसाधन तैयार करना, रिसाइक्लिंग बढ़ाना, संसाधनों का दोबारा इस्तेमाल और टिकाऊ तरीके से कचरे का प्रसंस्करण भी इसका हिस्सा है। SGGFC 3.0 ऐसे ही समाधानों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है, जिनमें तकनीक, पर्यावरण और व्यावसायिक उपयोगिता एक साथ जुड़ सकें। SIIC ने कार्यक्रम के लिए देशभर के ऐसे स्टार्टअप्स से आवेदन मांगे थे जो शहरी कचरा प्रबंधन की समस्याओं के लिए स्केलेबल और प्रभावी समाधान विकसित कर रहे हैं।
शहरों में तकनीकी समाधान लागू करने की तैयारी
IIT कानपुर और SIIC की भूमिका यहां सिर्फ इनक्यूबेशन तक सीमित नहीं है। संस्थान पहले भी कचरा प्रबंधन क्षेत्र में स्टार्टअप्स, सरकारी अधिकारियों, नगर निकायों और निवेशकों को एक मंच पर लाने वाले कार्यक्रम कर चुका है। SGGFC 3.0 के जरिए इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए स्टार्टअप के आइडिया से लेकर उसके शहरी इस्तेमाल तक का रास्ता तैयार करने की कोशिश है। इसका लक्ष्य ऐसे समाधान विकसित करना है जिन्हें अलग-अलग शहरों की जरूरत के अनुसार अपनाया और बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 से जुड़ा मॉडल
SGGFC 3.0 को स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के व्यापक लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। IIT कानपुर के SIIC के लिए यह पहल तकनीकी नवाचार को शहरी स्वच्छता और सर्कुलर इकोनॉमी की जरूरतों से जोड़ने का अवसर भी है। यानी आने वाले समय में शहरों की कचरा प्रबंधन समस्या के समाधान में सिर्फ पारंपरिक व्यवस्था पर निर्भरता के बजाय स्टार्टअप तकनीक और नवाचार की भूमिका बढ़ाने की कोशिश होगी।


