- प्रगति क्यू-फाउंड्री 2026 में एसआईआईसी ने रखा कमर्शियलाइजेशन रोडमैप, वैज्ञानिकों, स्टार्टअप, निवेशकों और कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ शोध को उत्पाद में बदलने, निवेश जुटाने और भारतीय क्वांटम तकनीक को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर मंथन
भारत 19/ विक्सन सिकरोड़िया, कानपुर। क्वांटम तकनीक की अगली बड़ी चुनौती सिर्फ नई खोज करना नहीं, बल्कि उसे लैब निकालकर उत्पाद, कारोबार और ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाना है। आईआईटी कानपुर क्वांटम तकनीक के व्यवसायीकरण का रोडमैप लेकर आया है। दिल्ली में आयोजित ‘प्रगति क्यू-फाउंड्री 2026’ में आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (SIIC) की टीम ने वैज्ञानिकों, स्टार्टअप, निवेशकों और कंपनियों के प्रतिनिधियों से इस पर चर्चा की कि भारत की क्वांटम क्षमता को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी उत्पादों में कैसे बदला जा सकता है। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत हुए कार्यक्रम में चर्चा का फोकस शोध और उद्योग के बीच की उस दूरी को कम करने पर रहा, जहां तकनीक लैब में तैयार होने के बाद व्यावसायिक उपयोग तक नहीं पहुंच पातीं। SIIC ने शोध, प्रोटोटाइप, निवेश, उद्योग सहयोग और बाजार को एक साथ जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया।
बाजार में दिखेगी क्वांटम तकनीक की असली ताकत
क्वांटम क्षेत्र में वैज्ञानिक खोजों की रफ्तार बढ़ रही है, लेकिन उनका व्यावसायिक उपयोग अभी भी बड़ी चुनौती है। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि किसी तकनीक को बाजार तक ले जाने के लिए केवल शोध परिणाम पर्याप्त नहीं होते। उसे प्रोटोटाइप में बदलना, उसकी तकनीकी क्षमता का परीक्षण करना और फिर बाजार की वास्तविक जरूरत के मुताबिक उत्पाद विकसित करना पड़ता है। यहीं स्टार्टअप, उद्योग और निवेशकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। वैज्ञानिक संस्थानों की विशेषज्ञता को कंपनियों की बाजार समझ और निवेश की क्षमता से जोड़कर ही क्वांटम तकनीक को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले उत्पादों में बदला जा सकता है।
क्यूबिट्स खोलेंगे कंप्यूटिंग की नई संभावनाएं
क्वांटम कंप्यूटिंग पारंपरिक कंप्यूटिंग से अलग तरीके से काम करती है। सामान्य कंप्यूटर जहां बिट के रूप में शून्य और एक का इस्तेमाल करते हैं, वहीं क्वांटम कंप्यूटर क्यूबिट्स पर आधारित होते हैं। इससे कुछ जटिल समस्याओं को हल करने के लिए नई कंप्यूटिंग संभावनाएं पैदा होती हैं। इस तकनीक के संभावित इस्तेमाल सुरक्षित संचार, दवाओं की खोज, रक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और बेहद सटीक मापन जैसे क्षेत्रों में देखे जा रहे हैं। इसी व्यापक उपयोगिता के कारण क्वांटम तकनीक को लेकर दुनिया के प्रमुख देशों और तकनीकी कंपनियों के बीच शोध और निवेश की प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
SIIC ने शोध को कारोबार से जोड़ा
आईआईटी कानपुर के एसआईआईसी से डॉ. आशुतोष अग्निहोत्री, डॉ. अमृता गाडगे, डॉ. गोपाल कृष्ण दीक्षित और सुगंधा माहेश्वरी ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। टीम ने क्वांटम क्षेत्र में काम कर रहे वैज्ञानिकों, स्टार्टअप संचालकों, निवेशकों और कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। चर्चा में यह समझने की कोशिश की गई कि शोध के नतीजों को व्यावसायिक अवसर में कैसे बदला जाए, शुरुआती चरण के स्टार्टअप को किस तरह आगे बढ़ाया जाए और उद्योग के साथ साझेदारी के जरिए तकनीक को बाजार के लिए तैयार कैसे किया जाए।
प्रोटोटाइप से ग्लोबल उत्पाद तक लंबी राह
किसी नई तकनीक का बाजार तक पहुंचना कई चरणों वाली प्रक्रिया है। प्रयोगशाला में तैयार तकनीक को पहले प्रोटोटाइप का रूप देना होता है। इसके बाद उसकी विश्वसनीयता और उपयोगिता का परीक्षण किया जाता है। बाजार की जरूरत के अनुसार उत्पाद में बदलाव किए जाते हैं और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उद्योग का सहयोग जरूरी होता है। क्वांटम तकनीक में यह प्रक्रिया और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि इसके लिए उच्च स्तरीय तकनीकी विशेषज्ञता के साथ पर्याप्त पूंजी और विशेष बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है। कार्यक्रम में इसी वजह से निवेश और उद्योग भागीदारी को कमर्शियलाइजेशन की अहम कड़ी के रूप में देखा गया।
भारत की क्वांटम दावेदारी को ग्लोबल बाजार से जोड़ने की कोशिश
क्वांटम तकनीक को लेकर वैश्विक स्तर पर तेजी से शोध और निवेश हो रहा है। भारत के लिए चुनौती अपनी वैज्ञानिक क्षमता को ऐसे उत्पादों और सेवाओं में बदलने की है, जिनकी उपयोगिता घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो। प्रगति क्यू-फाउंड्री 2026 में आईआईटी कानपुर की भागीदारी इसी लक्ष्य से जुड़ी रही। एसआईआईसी की ओर से शोध, स्टार्टअप, निवेश और उद्योग को एक साथ लाने पर जोर दिया गया, ताकि क्वांटम तकनीक प्रयोगशाला की उपलब्धि भर न रहकर व्यावसायिक उत्पाद और वैश्विक कारोबार का आधार बन सके। आईआईटी कानपुर के लिए यह पहल क्वांटम तकनीक को केवल अकादमिक शोध के दायरे से आगे ले जाकर उत्पाद विकास, स्टार्टअप और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर सामने आती है।


