- सेवा संकल्प पखवाड़ा में यूपीएमएस सैफई ने बताए टीबी के प्रमुख संकेत; पात्र मरीजों को मुफ्त जांच-इलाज, सीबीएनएएटी से दवा-प्रतिरोधी टीबी की पहचान और पूरा उपचार कराने पर जोर
भारत 19/ इटावा। लगातार खांसी और लंबे समय तक बुखार को सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। बिना वजह वजन कम होना और रात में पसीना आना भी टीबी के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर जांच और उपचार जरूरी है।उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीएमएस), सैफई में सेवा संकल्प पखवाड़ा के तहत टीबी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के ओपीडी ब्लॉक में हुए कार्यक्रम का विषय ‘फ्रॉम डिटेक्शन टू प्रिवेंशन : विनिंग द फाइट अगेंस्ट टीबी’ रहा। कार्यक्रम में मरीजों और आमजन को टीबी की पहचान, जांच, उपचार और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।
लगातार खांसी हो तो जांच जरूरी
कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. अमित सिंह, नोडल अधिकारी, टीबी सीएंडडीएसटी और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के चिकित्सकों ने लोगों को बीमारी के लक्षणों और समय पर इलाज के महत्व के बारे में बताया। सहायक आचार्य डॉ. विश्वनाथ यादव और डॉ. प्रांशु पांडेय ने बताया कि लगातार खांसी, लंबे समय तक बुखार, बिना स्पष्ट कारण वजन कम होना और रात में पसीना आना जैसे संकेत मिलने पर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। बीमारी की शुरुआती पहचान होने पर समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है।
पात्र मरीजों को मुफ्त जांच और इलाज
कार्यक्रम में बताया गया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत पात्र मरीजों को टीबी की आवश्यक जांच और उपचार की सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं। इसका उद्देश्य बीमारी की समय पर पहचान कर मरीज को उपचार उपलब्ध कराना और संक्रमण के फैलाव को रोकना है। चिकित्सकों ने लोगों से अपील की कि टीबी के लक्षण होने पर जांच में देरी न करें और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा शुरू करने के बजाय स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।
सीबीएनएएटी से दवा-प्रतिरोधी टीबी की पहचान
यूपीएमएस सैफई में सीबीएनएएटी प्रयोगशाला के माध्यम से रैपिड मॉलिक्यूलर जांच की सुविधा उपलब्ध है। इस जांच से टीबी की जल्द पहचान करने के साथ दवा-प्रतिरोधी टीबी का पता लगाने में भी मदद मिलती है। दवा-प्रतिरोधी टीबी की पहचान उपचार तय करने में महत्वपूर्ण होती है। जांच के परिणाम के आधार पर चिकित्सक मरीज की स्थिति के अनुरूप आगे का उपचार निर्धारित कर सकते हैं।
इलाज पूरा करना भी उतना ही जरूरी
जागरूकता कार्यक्रम में मरीजों को उपचार बीच में न छोड़ने की सलाह दी गई। चिकित्सकों ने कहा कि टीबी की पुष्टि होने के बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार निर्धारित अवधि तक दवाएं लेना जरूरी है। लक्षणों में सुधार होने के बाद दवा बंद करने से उपचार प्रभावित हो सकता है। चिकित्सकों के मुताबिक टीबी रोकथाम योग्य और उपचार योग्य बीमारी है। समय पर जांच, उचित उपचार और दवाओं का पूरा कोर्स अपनाकर बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।


