- IIT कानपुर के प्रो. संदीप वर्मा का ऑर्गन-ऑन-चिप शोध दवा परीक्षण और बीमारी की पहचान को दे रहा नई दिशा; लिवर-ऑन-चिप में दवाओं से होने वाली क्षति का मॉडल तैयार करने पर जोर
विक्सन सिकरोड़िया, कानपुर। किसी दवा का असर मानव शरीर तक पहुंचने से पहले समझने के लिए वैज्ञानिक अब शरीर के बेहद छोटे और नियंत्रित जैविक मॉडल तैयार करने पर काम कर रहे हैं। इसी दिशा में आईआईटी कानपुर के प्रो. संदीप वर्मा का शोध महत्वपूर्ण है। उनका काम माइक्रोफ्लूडिक्स, ऑर्गन-ऑन-चिप, दवा खोज, नई एंटीबायोटिक और रासायनिक तंत्रिका-विज्ञान जैसे क्षेत्रों को जोड़ता है। उनकी शोध टीम का काम ऐसी सूक्ष्म प्रणालियां विकसित करने पर केंद्रित है, जिनमें कोशिकाओं और जैव-अणुओं के बीच होने वाली प्रक्रियाओं को नियंत्रित वातावरण में समझा जा सके। IIT कानपुर के शोध समूह की गतिविधियों में माइक्रोफ्लूडिक निदान प्रणालियां, नए रोगाणुरोधी और जैव-चिकित्सकीय शोध प्रमुख क्षेत्र हैं। प्रो. वर्मा ने 2026 में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान अकादमी (NAMS) के फेलो चुने जाने की जानकारी भी साझा की है।
छोटी चिप में जटिल जैविक वातावरण तैयार
ऑर्गन-ऑन-चिप ऐसी तकनीक है जिसमें किसी अंग के महत्वपूर्ण जैविक गुणों को बेहद छोटे कृत्रिम मंच पर दोहराने का प्रयास किया जाता है। माइक्रोफ्लूडिक्स इसमें बेहद कम मात्रा में तरल पदार्थों के नियंत्रित प्रवाह और उनके बीच होने वाली जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं को संभालने में मदद करता है। प्रो. वर्मा से जुड़े शोध में ऐसे माइक्रोफ्लूडिक मंच विकसित किए जा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल जैव-अणुओं और रोग से जुड़े संकेतकों की पहचान के लिए किया जा सकता है। IIT कानपुर के एक पेटेंट रिकॉर्ड में प्रो. वर्मा और उनकी टीम से जुड़े माइक्रोफ्लूडिक उपकरण द्वारा जैव-सूचक की पहचान से संबंधित तकनीक भी दर्ज है।
लिवर-ऑन-चिप से दवा का असर समझने की कोशिश
शोध की प्रमुख दिशाओं में मेम्ब्रेन-फ्री लिवर-ऑन-चिप शामिल है। जनवरी 2026 में प्रकाशित शोध में IIT कानपुर के शोधकर्ताओं ने ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया, जिसमें लिवर की कोशिकाओं और सहायक कोशिकाओं के लिए त्रि-आयामी वातावरण तैयार किया गया। इस अध्ययन में प्रो. संदीप वर्मा सह-लेखक हैं। शोध का उद्देश्य दवाओं से होने वाली लिवर क्षति यानी हेपेटोटॉक्सिसिटी को समझने के लिए अधिक जैविक रूप से प्रासंगिक मॉडल विकसित करना है। अध्ययन में तैयार मॉडल ने लंबे समय तक लिवर जैसी कुछ महत्वपूर्ण जैविक गतिविधियों को बनाए रखा और दवा से होने वाली क्षति के आकलन में इसकी उपयोगिता का परीक्षण किया गया। शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को पारंपरिक दो-आयामी कोशिका संवर्धन और पशु मॉडल के बीच एक संभावित वैकल्पिक शोध मंच के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि यह तकनीक फिलहाल मानव परीक्षण या पशु परीक्षण को पूरी तरह समाप्त कर देती है।
बीमारी की पहचान में भी काम आएगी माइक्रोफ्लूडिक्स
प्रो. वर्मा का शोध केवल दवा परीक्षण तक सीमित नहीं है। उनकी टीम बायोसेंसर और माइक्रोफ्लूडिक निदान प्रणालियों पर भी काम कर रही है। इनका उद्देश्य रोग से जुड़े जैव-सूचक और रोगजनकों की पहचान के लिए संवेदनशील तथा नियंत्रित प्रणालियां विकसित करना है। IIT कानपुर के शोधकर्ताओं ने ऐसे माइक्रोफ्लूडिक सेंसर भी विकसित किए हैं जिनका इस्तेमाल जैव-सूचक की पहचान में किया जा सकता है। 2024 में दर्ज एक पेटेंट में सतह-वर्धित रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी आधारित माइक्रोफ्लूडिक उपकरण का उल्लेख है, जिसे लक्षित जैव-सूचक की पहचान के लिए विकसित किया गया।
दवा परीक्षण से व्यक्तिगत चिकित्सा तक संभावनाएं
ऑर्गन-ऑन-चिप और माइक्रोफ्लूडिक्स का संभावित उपयोग दवा जांच, विषाक्तता आकलन, बीमारी मॉडलिंग और निदान जैसे क्षेत्रों में हो सकता है। खास तौर पर लिवर-ऑन-चिप जैसे मॉडल दवाओं के चयापचय और उनसे होने वाली कोशिकीय क्षति को नियंत्रित वातावरण में समझने का अवसर देते हैं। भविष्य में ऐसे मंचों को व्यक्तिगत चिकित्सा की दिशा में भी उपयोगी माना जा रहा है, हालांकि इस क्षेत्र में व्यापक चिकित्सकीय इस्तेमाल से पहले तकनीक की विश्वसनीयता, मानकीकरण और मानव शरीर के जटिल वातावरण से उसकी समानता को लेकर आगे शोध जरूरी है।
रसायन विज्ञान से चिकित्सा तक जुड़ रहा शोध
प्रो. संदीप वर्मा का काम रसायन विज्ञान, जैविक पदार्थ विज्ञान और जैव-चिकित्सकीय इंजीनियरिंग के बीच एक अंतरविषयक कड़ी बनाता है। IIT कानपुर के अनुसार उनका मूल शोध क्षेत्र जैविक रसायन, रासायनिक जीवविज्ञान और जैविक पदार्थ विज्ञान से जुड़ा है। उनकी शोध गतिविधियों में नए एंटीबायोटिक, रासायनिक तंत्रिका-विज्ञान, कोशिका आधारित प्रणालियां और माइक्रोफ्लूडिक निदान तकनीकें शामिल हैं। IIT कानपुर में उनका समूह रसायन विज्ञान विभाग के साथ-साथ नैनोविज्ञान और चिकित्सा अभियांत्रिकी से जुड़े केंद्रों में भी सक्रिय है।


