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PGSA की जहाजों को चेतावनी, गलत रूट से होर्मुज न पार करें

  • कुछ चार्टररों पर जहाजों को निर्धारित मार्ग से हटाने का दबाव डालने का आरोप; PGSA ने सुरक्षा जोखिम और नियम तोड़ने पर भविष्य में ट्रांजिट रोकने की चेतावनी दी

भारत 19 डेस्क

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को लेकर ईरान की Persian Gulf Strait Authority (PGSA) ने चेतावनी जारी की है। प्राधिकरण का कहना है कि कुछ चार्टरर जहाजों के मालिकों और संचालकों पर निर्धारित मार्ग के बजाय दूसरे रूट से होर्मुज पार करने का दबाव डाल रहे हैं। PGSA ने जहाज मालिकों और ऑपरेटरों से ऐसे निर्देशों को लेकर सावधानी बरतने को कहा है। PGSA के मुताबिक निर्धारित ट्रांजिट प्रक्रिया और उसके निर्देशों का पालन नहीं करने वाले जहाजों के लिए सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है। प्राधिकरण ने यह भी चेताया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों या उनसे जुड़े पक्षों पर भविष्य में होर्मुज से गुजरने को लेकर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

गलत रूट से गुजरने पर क्या है खतरा

PGSA का कहना है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ट्रांजिट की अनुमति लेनी होती है। जून में जारी उसके नियमों में भी जहाजों के लिए वैध पास और निर्धारित ट्रांजिट शर्तों का पालन जरूरी बताया गया था। नए विवाद का केंद्र यही है कि कुछ जहाजों ने PGSA की निर्धारित व्यवस्था से अलग मार्ग का इस्तेमाल किया। ऐसे जहाजों को PGSA ने अपनी Non-Compliance List में शामिल किया है। हालांकि, यहां एक अहम अंतर है। PGSA की ओर से तय की गई व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय समुद्री समुदाय की सर्वमान्य व्यवस्था मानना सही नहीं होगा। अमेरिका PGSA की व्यवस्था को मान्यता नहीं देता और मई में इस संस्था पर प्रतिबंध भी लगा चुका है। इसलिए जहाज संचालकों के लिए ईरानी निर्देशों के साथ अमेरिकी प्रतिबंधों और बीमा संबंधी जोखिम भी महत्वपूर्ण हैं।

77 जहाज PGSA की नॉन-कम्प्लायंस लिस्ट में

PGSA ने सितंबर में अपनी Non-Compliance List को बढ़ाकर 77 जहाजों तक कर दिया था। प्राधिकरण इन जहाजों पर ईरान के होर्मुज ट्रांजिट प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का आरोप लगाता है। सूची में शामिल जहाजों को भविष्य में होर्मुज पार करते समय जुर्माना, हिरासत या जब्ती जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। PGSA ने बीमा कंपनियों, P&I क्लबों और जहाजों की तकनीकी वर्गीकरण करने वाली संस्थाओं को भी सूची में शामिल जहाजों को सेवाएं देने से बचने की चेतावनी दी है। उसका कहना है कि ऐसे जहाजों से जुड़े कारोबार में शामिल पक्षों को भी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

दूसरे जहाज के साथ कारोबार पर भी नजर

PGSA का रुख केवल सूची में शामिल जहाजों तक सीमित नहीं है। उसने पहले चेतावनी दी थी कि किसी सूचीबद्ध जहाज के साथ Ship-to-Ship Transfer (STS) या ट्रांसशिपमेंट जैसी गतिविधियों में शामिल दूसरे जहाजों को भी नॉन-कम्प्लायंस सूची में डाला जा सकता है।  इस व्यवस्था का असर चार्टररों और कार्गो मालिकों पर भी पड़ सकता है। PGSA ने खाड़ी क्षेत्र में माल भेजने या वहां से माल लेने वाले पक्षों को जहाज किराये पर लेने से पहले Non-Compliance List की जांच करने को कहा है।

होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बेहद कम

PGSA की चेतावनी ऐसे समय आई है जब होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की संख्या पहले के मुकाबले काफी कम है। रॉयटर्स के अनुसार 21 सितंबर के आसपास एक दिन में केवल दो कमोडिटी जहाज होर्मुज से गुजरे। संघर्ष से पहले फरवरी के अंत तक यहां बड़े वाणिज्यिक जहाजों की औसत दैनिक आवाजाही करीब 125 जहाज थी। हालांकि AIS ट्रांसपोंडर बंद करके चलने वाले जहाज इन आंकड़ों में शामिल नहीं हो सकते। इससे पहले एक सप्ताहांत में केवल 17 कमोडिटी जहाजों के पारगमन का रिकॉर्ड मिला था, जबकि उससे पिछले सप्ताहांत में यह संख्या 37 थी।

होर्मुज में सुरक्षा जोखिम भी बढ़ा

जहाजों के रूट को लेकर विवाद ऐसे समय चल रहा है जब होर्मुज और उसके आसपास वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। सितंबर में दो वाणिज्यिक जहाजों पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमले की रिपोर्ट सामने आई। इनमें एक कच्चे तेल के टैंकर पर हुए हमले में चालक दल के दो सदस्यों के मामूली रूप से घायल होने की जानकारी दी गई। ऐसे माहौल में जहाज संचालकों के सामने एक साथ कई जोखिम हैं—सुरक्षित नौवहन, स्थानीय ट्रांजिट निर्देश, बीमा, प्रतिबंधों का अनुपालन और चालक दल की सुरक्षा।

PGSA की सूची लगातार बढ़ती गई

PGSA की Non-Compliance List अगस्त के अंत में 45 जहाजों से शुरू हुई थी। सितंबर की शुरुआत में इसमें 11 और जहाज जोड़े गए और संख्या 56 हुई। इसके बाद 14 सितंबर को सूची बढ़कर 77 जहाजों तक पहुंच गई। हालांकि स्वतंत्र शिपिंग विश्लेषणों में यह भी सामने आया है कि सूची में शामिल कुछ जहाज बाद में भी होर्मुज से गुजरते रहे। इसलिए PGSA की सूची को केवल प्रतिबंधित जहाजों की अंतिम और सर्वमान्य अंतरराष्ट्रीय सूची के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।

अमेरिका-ईरान के बीच अलग नियमों का पेच

होर्मुज में मौजूदा स्थिति इसलिए और जटिल है क्योंकि ईरान और अमेरिका की व्यवस्थाएं अलग-अलग हैं। ईरान PGSA के जरिए ट्रांजिट व्यवस्था लागू करने की कोशिश कर रहा है, जबकि अमेरिका ने PGSA पर प्रतिबंध लगा रखे हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मई 2026 में PGSA को प्रतिबंधों के दायरे में रखा था। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय जहाज कंपनियों को ईरानी ट्रांजिट निर्देशों के साथ अमेरिकी प्रतिबंधों और अपने बीमा दायित्वों को भी ध्यान में रखना पड़ता है।

भारत के लिए भी होर्मुज बेहद अहम

होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए भी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र से आने वाला कच्चा तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद इसी समुद्री क्षेत्र से गुजरते हैं। होर्मुज में जहाजों की आवाजाही घटने या किसी मार्ग पर जोखिम बढ़ने का असर केवल शिपिंग कंपनियों तक सीमित नहीं रहता। इससे कच्चे तेल, एलएनजी, बीमा, मालभाड़े और समुद्री परिवहन लागत पर भी असर पड़ सकता है। सितंबर में होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में आई भारी गिरावट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है। हालांकि कम आवाजाही का वास्तविक असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि कितने जहाज AIS बंद करके इस मार्ग से गुजर रहे हैं।

होर्मुज पर क्यों टिकी है दुनिया की नजर

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात समेत खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा निर्यात के लिए यह प्रमुख समुद्री मार्ग है। यही वजह है कि यहां जहाजों के रूट, सुरक्षा और आवाजाही में कोई बड़ा बदलाव वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। फिलहाल PGSA की ताजा चेतावनी ने होर्मुज में निर्धारित मार्ग, वैकल्पिक रूट, सुरक्षा और प्रतिबंधों के अनुपालन को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहाज मालिकों और चार्टररों के सामने अब चुनौती यह है कि वे स्थानीय ईरानी निर्देशों, अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और अपने देश के प्रतिबंध संबंधी नियमों के बीच सुरक्षित रास्ता कैसे तय करें।

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