- महाराजगंज स्थित घर से देर रात पुलिस ले गई; पहले गिरफ्तारी की खबर आई, बाद में अधिकारियों ने सुरक्षा खतरे का हवाला दिया, पुलिस के मुताबिक उनके खिलाफ फिलहाल कोई आपराधिक मामला नहीं
भारत 19 डेस्क
नेपाल के पूर्व प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा को शनिवार देर रात काठमांडू स्थित उनके आवास से पुलिस अपने साथ ले गई। शुरुआत में नेपाल के कई मीडिया संस्थानों ने इसे गिरफ्तारी बताया, लेकिन बाद में पुलिस अधिकारियों ने कहा कि राणा को सुरक्षा संबंधी खतरे को देखते हुए सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। राणा को काठमांडू के महाराजगंज स्थित आवास से काठमांडू वैली क्राइम इन्वेस्टिगेशन ऑफिस, टेकु ले जाया गया। शुरुआती रिपोर्टों में उनके खिलाफ शिकायत और पुलिस कार्रवाई की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ फिलहाल कोई आपराधिक मुकदमा चलाने की योजना नहीं है।
पुलिस ने सुरक्षा खतरे को बताया कार्रवाई की वजह
काठमांडू वैली क्राइम इन्वेस्टिगेशन ऑफिस के पुलिस अधीक्षक रमेश्वर कार्की के अनुसार राणा को किसी सुरक्षा चुनौती की आशंका के बाद कार्यालय लाया गया। उन्होंने कहा कि राणा को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। हालांकि पुलिस ने यह नहीं बताया कि सुरक्षा खतरा किससे था या उसकी प्रकृति क्या थी। यही वजह है कि फिलहाल राणा को लेकर “गिरफ्तारी” और “सुरक्षा हिरासत” के बीच स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। काठमांडू पोस्ट ने भी अपनी बाद की रिपोर्ट में इसी सवाल को प्रमुखता दी है कि उन्हें गिरफ्तार किया गया था, हिरासत में लिया गया या सुरक्षात्मक तौर पर ले जाया गया।
रात में घर पहुंची थी पुलिस की टीम
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुलिस टीम देर रात महाराजगंज स्थित राणा के आवास पहुंची और उन्हें अपने साथ ले गई। कुछ रिपोर्टों में पुलिस के घर पहुंचने का समय रात करीब तीन बजे बताया गया है, जबकि उनके परिवार की ओर से इससे अलग समय बताए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस की ओर से बाद में यह कहा गया कि राणा के खिलाफ किसी आपराधिक मामले में कार्रवाई नहीं की जा रही है और उन्हें छोड़े जाने की संभावना है।
महाभियोग के बाद पद से निलंबित हुए थे राणा
चोलेन्द्र शमशेर राणा जनवरी 2019 में नेपाल के प्रधान न्यायाधीश बने थे। फरवरी 2022 में संसद में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव दर्ज होने के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत वह पद से निलंबित हो गए थे। महाभियोग की प्रक्रिया लंबे समय तक लंबित रही और वह दोबारा प्रधान न्यायाधीश के पद पर नहीं लौट सके। राणा के कार्यकाल में नेपाल की न्यायपालिका और राजनीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले सामने आए थे। उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव में न्यायिक प्रशासन और पद के दुरुपयोग से जुड़े कई आरोप लगाए गए थे। हालांकि वे आरोप अलग संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा थे और उन्हें वर्तमान पुलिस कार्रवाई का आधार नहीं माना जा सकता।
नौ सितंबर को महाभियोग मामले पर आया था फैसला
राणा से जुड़ा महाभियोग विवाद हाल में फिर चर्चा में आया था। 9 सितंबर 2026 को नेपाल सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने राणा के खिलाफ लंबित महाभियोग प्रस्ताव से संबंधित याचिकाओं पर फैसला दिया था। पीठ ने माना कि महाभियोग प्रस्ताव अब अपना उद्देश्य खो चुका है और संबंधित रिट याचिकाएं खारिज कर दीं। यह घटनाक्रम राणा को उनके पद से हटाए जाने के पुराने विवाद को फिर चर्चा में ले आया था। इसके कुछ ही सप्ताह बाद उन्हें पुलिस द्वारा घर से ले जाए जाने की घटना सामने आई है।
गिरफ्तारी की वजह पर अभी स्थिति साफ नहीं
राणा को लेकर शुरुआती खबरों में पुलिस कार्रवाई को गिरफ्तारी बताया गया था और कुछ रिपोर्टों में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज होने की बात कही गई। लेकिन पुलिस के बाद के बयान में किसी आपराधिक मामले में कार्रवाई से इनकार किया गया है। इसलिए फिलहाल खबर में यह कहना अधिक सटीक होगा कि राणा को पुलिस उनके आवास से अपने साथ ले गई और उन्हें सुरक्षा कारणों से सुरक्षित स्थान पर रखा गया। उनके खिलाफ किसी नए आपराधिक आरोप को अभी स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
