- 746 सड़कों के निर्माण-उच्चीकरण में 1,096.88 करोड़ की बचत, 374 नए मार्गों पर भी तेजी; केशव मौर्य ने गुणवत्ता और समयबद्धता को बनाया लक्ष्य
भारत 19
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण सड़कों के निर्माण का तरीका बदलने का असर अब लागत और पर्यावरण, दोनों पर दिखाई देने लगा है। फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (FDR) तकनीक से ग्रामीण सड़कों के निर्माण और उच्चीकरण में अब तक करीब 1,096.88 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत हुई है। वहीं सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के फेज-4 में स्वीकृत 374 नए मार्गों के काम को भी जल्द जमीन पर उतारने की तैयारी तेज कर दी है।
मंगलवार को योजना भवन में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (UPRRDA) की साधारण सभा की बैठक हुई। इसमें PMGSY के लंबित काम, नए मार्गों और सड़क निर्माण में इस्तेमाल हो रही तकनीक की समीक्षा की गई। मौर्य ने PMGSY फेज-3 के बचे हुए मार्गों का निर्माण तत्काल पूरा कराने और फेज-4 के 374 स्वीकृत मार्गों का जल्द शिलान्यास कराने के निर्देश दिए।
5,809 किलोमीटर सड़कों पर FDR का इस्तेमाल
बैठक में FDR तकनीक से ग्रामीण सड़कों के नवीनीकरण और उच्चीकरण से संबंधित कार्यवृत्त को मंजूरी दी गई। विभाग के मुताबिक प्रदेश में अब तक 746 सड़कों की 5,809.99 किलोमीटर लंबाई के निर्माण या उच्चीकरण कार्यों को FDR तकनीक के तहत स्वीकृति दी जा चुकी है। इस तकनीक का सबसे बड़ा असर निर्माण लागत पर पड़ा है। पारंपरिक तकनीक से इन कार्यों की अनुमानित लागत 7,090.32 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जबकि FDR अपनाने पर यह घटकर 5,993.44 करोड़ रुपये रह गई। यानी करीब 1,096.88 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत हुई।
सीमेंट और खनन पर भी घटा दबाव
FDR तकनीक से सिर्फ सरकारी खर्च में कमी नहीं आई, बल्कि निर्माण में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों की खपत भी घटी है। विभाग के अनुसार इस तकनीक में पारंपरिक पद्धति की तुलना में करीब 20 प्रतिशत कम सीमेंट इस्तेमाल होता है। करीब 1,600 किलोमीटर सड़कों के निर्माण कार्य में एग्रीगेट की 20 से 25 प्रतिशत तक बचत हुई। इससे लगभग 3.78 लाख घनमीटर एग्रीगेट के खनन की जरूरत खत्म हुई। सरकार का कहना है कि इससे पर्यावरणीय दबाव कम होने के साथ सड़क की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ाने में मदद मिलेगी। भविष्य में अनुरक्षण खर्च घटने की भी उम्मीद है।
374 नए मार्गों पर जल्द शुरू होगा काम
केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को PMGSY फेज-3 के शेष मार्गों का काम तत्काल पूरा कराने को कहा। साथ ही केंद्र सरकार से स्वीकृत फेज-4 के 374 मार्गों का जल्द शिलान्यास कराने के निर्देश दिए। उन्होंने 250 आबादी वाले गांवों को भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा। वित्त विभाग से समन्वय कर लंबित वित्तीय स्वीकृतियां तत्काल जारी कराने पर भी जोर दिया गया।
सड़क निर्माण के साथ पर्यावरण पर भी जोर
उपमुख्यमंत्री ने ग्रामीण सड़क परियोजनाओं में फुटप्रिंट और कार्बन क्रेडिट के सतत उपयोग के निर्देश दिए। सड़क निर्माण पूरा होने के बाद मार्गों के किनारे फलदार पौधे लगाने को भी कहा गया। उन्होंने राज्य तकनीकी टीम को मार्गों का परीक्षण समयबद्ध तरीके से पूरा करने के बाद ही केंद्रीय सर्वेक्षण टीम को बुलाने के निर्देश दिए, ताकि परियोजनाओं की गुणवत्ता में किसी स्तर पर समझौता न हो।
रखरखाव में यूपी पहले, अब पूरे प्रदर्शन पर नजर
बैठक में UPRRDA को केंद्र सरकार के स्तर पर मिली उपलब्धियों के लिए बधाई दी गई। ग्रामीण सड़क रखरखाव में उत्तर प्रदेश को देश में पहला स्थान, पोस्ट-डीएलपी रखरखाव में तीसरा और अधिकतम पूर्ण लंबाई के मामले में तीसरा स्थान मिला है। मौर्य ने अधिकारियों से कहा कि अब लक्ष्य सिर्फ सड़कें बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। गुणवत्ता, कार्यकुशलता और समयबद्धता के सभी मानकों पर उत्तर प्रदेश को देश में प्रथम स्थान दिलाने की दिशा में काम किया जाए।
बैठक में राज्य मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू, सचिव एवं आयुक्त ग्राम्य विकास प्रमोद कुमार उपाध्याय, वित्त एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारी तथा UPRRDA के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिव सहाय अवस्थी समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।


