- कानपुर में डिजिटल अरेस्ट कर 48.20 लाख ठगने वाले तीन गिरफ्तार, CBI-क्राइम ब्रांच का अफसर बनकर बनाया था दबाव; जांच में 1.42 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा
भारत 19
कानपुर। फोन पर खुद को CBI और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखने वाले साइबर ठग 48.20 लाख रुपये तो ऐंठ चुके थे, लेकिन वह यहीं नहीं रुके। ठगों के दबाव में बुजुर्ग करीब एक करोड़ रुपये की FD तुड़वाने बैंक पहुंच गए। बुजुर्ग की स्थिति देख बैंक कर्मियों को शक हुआ तो उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी, इस तरह ठगों के हाथ में जाने वाली बड़ी रकम बच गई। पुलिस ने मामले की जांच की तो कथित साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े तीन आरोपी पकड़े गए। पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच में अब तक करीब 1.42 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का पता चला है।
फोन आया और शुरू हो गया डिजिटल अरेस्ट
पुलिस के मुताबिक, कानपुर के स्वरूपनगर निवासी योगेश चंद्र मिश्रा को 10 सितंबर को एक अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर मुंबई में आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद मामला कथित तौर पर मुंबई क्राइम ब्रांच और CBI तक पहुंचा दिया गया। वाट्सएप पर ऐसे दस्तावेज भेजे गए, जिन्हें जांच एजेंसियों से संबंधित बताया गया। गिरफ्तारी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने का डर दिखाकर बुजुर्ग पर लगातार दबाव बनाया गया।
तीन दिन तक कमरे से बाहर निकलने नहीं दिया
ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ का झांसा दिया और कहा कि उम्र को देखते हुए उन्हें घर से ही जांच में शामिल होना होगा। इसके बाद करीब तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया। पुलिस के अनुसार, उन्हें कमरे से बाहर निकलने और किसी परिजन को जानकारी देने से भी रोका गया। लगातार निगरानी और गिरफ्तारी के डर के बीच बुजुर्ग ठगों के निर्देशों का पालन करते रहे।
‘जांच पूरी होते ही पैसा लौट जाएगा’, ऐसे ऐंठे 48.20 लाख
ठगों ने बुजुर्ग को भरोसा दिलाया कि जांच के लिए उनके बताए बैंक खाते में रकम जमा करनी होगी और जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा। इस झांसे में उन्होंने अपने SBI स्वरूपनगर खाते से 48,20,500 रुपये RTGS के जरिए बताए गए बैंक ऑफ इंडिया खाते में भेज दिए। रकम पहुंचने के बाद भी ठगों का दबाव खत्म नहीं हुआ। इसके बाद उनसे और पैसा जुटाने को कहा गया।
एक करोड़ की FD तुड़वाने पहुंचे तो बैंक को हुआ शक
ठगी का सबसे अहम मोड़ यहीं आया। 48.20 लाख रुपये गंवाने के बाद बुजुर्ग करीब एक करोड़ रुपये की FD तुड़वाने बैंक पहुंच गए। बैंक कर्मचारियों को पूरी स्थिति असामान्य लगी। बातचीत और लेनदेन की वजह जानने के बाद उन्हें शक हुआ कि बुजुर्ग किसी साइबर ठगी के जाल में फंसे हैं। बैंककर्मियों ने पुलिस को सूचना दी। समय रहते पुलिस के हस्तक्षेप से एक करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम ठगों तक पहुंचने से बच गई। यही बैंक की सतर्कता पूरे मामले में निर्णायक साबित हुई।
फर्जी कंपनी और खातों का नेटवर्क भी सामने आया
जांच के दौरान पुलिस को एक कथित फर्जी कंपनी BAUKOYO CONTRACTORS PRIVATE LIMITED के जरिए बैंक खाता संचालित किए जाने की जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार इस खाते में 15 लेनदेन के जरिए करीब 25.98 लाख रुपये पहुंचे थे। जांच में यह भी सामने आया कि रकम को आगे अलग-अलग राज्यों के करीब 611 बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। पुलिस अब इन खातों और उनसे जुड़े लोगों की भी पड़ताल कर रही है।
चार साइबर अपराधों से जुड़ी कड़ियां मिलीं
पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन से बैंक खातों की जानकारी, फर्जी दस्तावेज, कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सऐप चैट समेत डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। NCRP पर जांच के दौरान इन खातों से जुड़े चार साइबर अपराध सामने आने की बात पुलिस ने कही है। पुलिस के अनुसार, अब तक इस नेटवर्क से करीब 1.42 करोड़ रुपये की साइबर ठगी जुड़ने की जानकारी सामने आई है।
तीन गिरफ्तार, एक आरोपी की तलाश
कानपुर साइबर थाना पुलिस ने मामले में वासु, आतिश कुमार और कंचन प्रजापति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक मुकुल चौबे फरार है और उसकी तलाश की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और दूसरे साइबर अपराधों की जानकारी जुटाई जा रही है।
डर को हथियार बनाकर खाली करा रहे साइबर ठग
इस मामले में ठगी का तरीका भी ध्यान खींचता है। ठगों ने पहले सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर बुजुर्ग के सामने कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर खड़ा किया। फिर फर्जी दस्तावेजों और वीडियो कॉल के जरिए भरोसा पैदा किया। परिवार से संपर्क रोककर उन्हें मानसिक दबाव में रखा और ‘जांच के लिए रकम’ के नाम पर बैंक ट्रांसफर कराया। 48.20 लाख रुपये की ठगी के बाद भी जब ठगों की नजर एक करोड़ की FD पर थी, तब बैंक कर्मचारियों की सतर्कता ने नुकसान को और बढ़ने से रोक दिया। यही इस पूरे साइबर फ्रॉड में सबसे अहम मोड़ रहा।


