- 25 साल की सजा अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी; 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में उम्रकैद काट रहे सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका
भारत 19
मुंबई में 1993 के सीरियल ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से गुरुवार को बड़ा झटका लगा। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उसकी समयपूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 15 अप्रैल 2026 के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
25 साल की अवधि को लेकर था पूरा विवाद
अबू सलेम ने अपनी समयपूर्व रिहाई की मांग के पीछे भारत सरकार की ओर से पुर्तगाल को दिए गए आश्वासन को आधार बनाया था। उसके प्रत्यर्पण के दौरान भारत ने पुर्तगाल को आश्वस्त किया था कि सलेम को मौत की सजा नहीं दी जाएगी और उसकी कैद 25 साल से अधिक नहीं होगी। सलेम का तर्क था कि इस अवधि की गणना में भारत में प्रत्यर्पण से पहले की हिरासत और जेल में मिली रियायतों को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसी आधार पर उसने समय से पहले जेल से रिहाई की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने नवंबर 2030 को माना था अहम तारीख
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 को सलेम की याचिका पर फैसला सुनाते हुए 25 साल की अवधि की गणना को लेकर उसकी दलील स्वीकार नहीं की थी। हाईकोर्ट के मुताबिक, प्रत्यर्पण के बाद 25 साल की अवधि 11 नवंबर 2030 को पूरी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने अब हाईकोर्ट के इस निष्कर्ष में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि सिर्फ प्रत्यर्पण के समय दिए गए 25 साल के आश्वासन के आधार पर सलेम को फिलहाल समयपूर्व रिहाई नहीं मिलेगी।
2022 में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था
अबू सलेम की रिहाई का मुद्दा पहले भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। जुलाई 2022 में शीर्ष अदालत ने कहा था कि 25 साल की अवधि पूरी होने पर केंद्र सरकार को पुर्तगाल को दिए गए संप्रभु आश्वासन को ध्यान में रखते हुए सजा में छूट के संबंध में राष्ट्रपति को सलाह देनी होगी। हालांकि, 2022 के इस फैसले का अर्थ तत्काल रिहाई का आदेश नहीं था। मौजूदा मामले में भी अदालत ने समयपूर्व रिहाई की मांग स्वीकार नहीं की है।
2005 में पुर्तगाल से भारत लाया गया था
अबू सलेम को 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। उसके खिलाफ 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले के अलावा मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या का मामला भी रहा है। सितंबर 2017 में विशेष TADA अदालत ने 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में सलेम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। प्रदीप जैन हत्याकांड में भी उसे उम्रकैद की सजा मिल चुकी है।
1993 के मुंबई धमाकों में क्या हुआ था
12 मार्च 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन हमलों ने देश को झकझोर दिया था और बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई तथा कई लोग घायल हुए। मामले की जांच और सुनवाई लंबे समय तक चली, जिसके बाद आरोपियों पर अलग-अलग अदालतों में मुकदमे चले। अबू सलेम को इस मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा मिली थी। उसकी मौजूदा याचिका का केंद्र हालांकि 1993 के अपराधों की सुनवाई नहीं, बल्कि प्रत्यर्पण के दौरान दिए गए 25 साल के आश्वासन और उसकी सजा की गणना से जुड़ा है।
अभी जेल में ही रहेगा अबू सलेम
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है। उसकी सजा की अवधि और भारत सरकार के प्रत्यर्पण संबंधी आश्वासन के संदर्भ में नवंबर 2030 अहम तारीख बनी हुई है। यानी सलेम की दलील थी कि 25 साल की अधिकतम कैद की शर्त के आधार पर उसे पहले रिहा किया जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यह राहत देने से इनकार कर दिया है।


