- सीएसजेएमयू में हुई कार्यशाला में छात्रों ने फिक्सेशन, टिशू प्रोसेसिंग, माइक्रोटोमी और स्टेनिंग का किया हैंड्स-ऑन अभ्यास व सटीक डायग्नोसिस में पैथोलॉजी की भूमिका भी समझी
भारत 19/ कानपुर। बीमारी की सटीक पहचान केवल लक्षणों के आधार पर नहीं होती, बल्कि टिशू और कोशिकाओं की माइक्रोस्कोपिक जांच भी डायग्नोसिस की अहम कड़ी है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज के विद्यार्थियों ने विशेष कार्यशाला में हिस्टोपैथोलॉजी और साइटोपैथोलॉजी की इसी प्रक्रिया को प्रयोगशाला में व्यावहारिक रूप से समझा। विद्यार्थियों ने टिशू सैंपल के फिक्सेशन से लेकर प्रोसेसिंग, ब्लॉकिंग, सेक्शनिंग, स्टेनिंग और स्लाइड तैयार करने तक के चरणों का खुद अभ्यास किया।
टिशू की छोटी-सी गलती भी बदल सकती है रिपोर्ट
विशेषज्ञ व संस्थापक पालिवाल डायग्नोस्टिक प्राइवेट लिमिटेड डॉ. उमेश पालिवाल ने छात्रों को बताया कि पैथोलॉजी में सैंपल की सही प्रोसेसिंग और स्लाइड की गुणवत्ता सीधे डायग्नोसिस की सटीकता से जुड़ी होती है। फिक्सेशन, टिशू प्रोसेसिंग, माइक्रोटोम से सेक्शन तैयार करने और स्टेनिंग के दौरान तकनीकी सावधानी जरूरी है। इन चरणों में त्रुटि होने पर माइक्रोस्कोपिक तस्वीर प्रभावित हो सकती है और इसका असर बीमारी की पहचान पर पड़ सकता है।
माइक्रोटोम से स्लाइड तैयार करने का अभ्यास
छात्रों ने फिक्सेशन, ग्रॉसिंग और ब्लॉकिंग के बाद टिशू प्रोसेसिंग के विभिन्न चरणों को समझा। इसके बाद माइक्रोटोम, वॉटर बाथ और वार्मिंग टेबल जैसे उपकरणों का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया। उन्होंने टिशू के बेहद पतले सेक्शन तैयार करने, उन्हें स्लाइड पर व्यवस्थित करने और आगे की जांच के लिए तैयार करने की प्रक्रिया को करीब से समझा। इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न रीएजेंट्स और स्टेनिंग तकनीकों का भी हैंड्स-ऑन अभ्यास किया। इससे उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि प्रयोगशाला में तैयार की गई एक स्लाइड किस तरह डॉक्टर और पैथोलॉजिस्ट को बीमारी की पहचान तक पहुंचाती है।
हिस्टोपैथोलॉजी और साइटोपैथोलॉजी का फर्क समझा
डॉ. पालिवाल ने छात्रों को हिस्टोपैथोलॉजी में टिशू की संरचना और कोशिकीय बदलावों तथा साइटोपैथोलॉजी में अलग-अलग कोशिकाओं की जांच की भूमिका समझाई। उन्होंने आधुनिक डायग्नोस्टिक पैथोलॉजी में माइक्रोस्कोपिक जांच और प्रयोगशाला तकनीकों के महत्व पर भी चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञ से सवाल-जवाब के जरिए विभिन्न डायग्नोस्टिक प्रक्रियाओं की व्यावहारिक बारीकियां समझीं। इस अवसर पर स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज के निदेशक प्रो. मुनीश रस्तोगी, एसोसिएट डीन (प्रशासन) प्रो. दिग्विजय शर्मा, असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. हिना वैश्य, श्री धीरज कुमार और अन्य शिक्षक मौजूद रहे। संचालन डॉ. अलका कटियार ने किया।


