- सीएसजेएमयू में हरीश भिमानी से रूबरू हुए विद्यार्थी; आवाज के उतार-चढ़ाव, ठहराव, उच्चारण और भाव से प्रभावी संवाद के गुर बताए, वॉइस आर्ट, डबिंग, एंकरिंग, रेडियो, टीवी और डिजिटल कंटेंट में करियर की संभावनाएं भी समझाईं
भारत 19/ कानपुर। टीवी स्क्रीन पर महाभारत शुरू होते ही गूंजती गंभीर आवाज ‘मैं समय हूं..’। इस आवाज ने कभी लाखों दर्शकों को अपनी ओर खींचा था। बुधवार को उसी आवाज के कलाकार हरीश भिमानी जब छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के सामने रूबरू हुए तो माहौल में उत्सुकता साफ नजर आई। विद्यार्थियों के लिए यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्षों से टीवी पर सुनी आवाज के पीछे के कलाकार को करीब से सुनने और समझने का मौका था।
वाणी, व्यक्तित्व एवं व्यवसाय पर संवाद
विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में श्रीमद्भगवद्गीता एवं वैदिक वांग्मय शोधपीठ और इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के संयुक्त तत्वावधान में ‘वाणी, व्यक्तित्व एवं व्यवसाय’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित हुआ। हरीश भिमानी ने विद्यार्थियों को बताया कि आवाज केवल शब्दों को बाहर निकालने का माध्यम नहीं है। सही आवाज, सही ठहराव, उतार-चढ़ाव और भाव मिल जाएं तो शब्द सीधे श्रोता के मन तक पहुंचते हैं।
वाणी के साथ व्यक्तित्व निखारने के गुर
हरीश भिमानी ने विद्यार्थियों को प्रभावी संवाद और वाणी के साथ व्यक्तित्व को निखारने के तरीके बताए। उन्होंने समझाया कि आज आवाज की कला केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। वॉइस आर्ट, डबिंग, एंकरिंग, रेडियो, टेलीविजन, विज्ञापन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए करियर की नई संभावनाएं हैं। विद्यार्थियों ने उनसे कई सवाल पूछे, जिनका उन्होंने सहज अंदाज में जवाब दिया।
भाव और अभ्यास से निखरती है आवाज
भिमानी ने विद्यार्थियों को समझाया कि प्रभावशाली आवाज केवल जन्मजात प्रतिभा का नाम नहीं है। उच्चारण, आवाज पर नियंत्रण, भावों की समझ और लगातार अभ्यास से इसे निखारा जा सकता है। उनकी बातों में अनुभव भी था और उस कला की बारीकियां भी, जिसने उनकी आवाज को घर-घर पहचान दी।
प्रभावी वाणी से व्यक्तित्व को मिलती है पहचान
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुल प्रतिष्ठा एवं वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक ने की। उन्होंने कहा कि प्रभावी स्वर में बोलना ऐसी कला है, जो हर किसी के पास नहीं होती। जिन लोगों को यह प्रतिभा मिली है, उसे मां सरस्वती का आशीर्वाद माना जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी वाणी और व्यक्तित्व के विकास के लिए निरंतर अभ्यास करने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. मिठाई लाल, डॉ. अमित कुमार, प्रो. शुभम शिवा, डॉ. राज कुमार सिंह, जेबी यादव, डॉ. मंतोष यादव, विनय सिंह, तनीषा वधावन, डॉ. रणधीर सिंह, डॉ. विजय त्रिपाठी, प्रिया मिश्रा और कीर्ति वर्मा सहित शिक्षक, कर्मचारी व बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।


