- कल सात घंटे थाने के बाहर डटे रहे राहुल, आज 30 दिन की देरी पर कांग्रेस ने सरकार और पुलिस को घेरा
भारत 19
नई दिल्ली। राहुल गांधी के सात घंटे के धरने के बाद छात्र साहिल लोछाब की कथित पेलेट चोट की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हो गई। लेकिन शनिवार को मामला एफआईआर से आगे बढ़ गया। कांग्रेस ने अब सवाल उठाया है कि एक घायल छात्र की शिकायत दर्ज करने में करीब 30 दिन क्यों लग गए और कार्रवाई के लिए विपक्ष के नेता को धरने पर क्यों बैठना पड़ा।
मामला 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। साहिल लोछाब का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान उसे पेलेट लगे और उसकी आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा। शिकायत पर कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी शुक्रवार को साहिल और उसकी मां के साथ पुलिस अधिकारियों के पास पहुंचे। एफआईआर दर्ज न होने पर राहुल गांधी संसद मार्ग स्थित डीसीपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कांग्रेस के कई नेता भी वहां पहुंचे। करीब सात घंटे बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ।
आज देरी बनी कांग्रेस का बड़ा मुद्दा
शनिवार को कांग्रेस ने एफआईआर दर्ज होने को अंत नहीं, बल्कि नए सवालों की शुरुआत बताया। वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने 30 दिन की देरी और राहुल गांधी के सात घंटे के धरने को लेकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। यहीं से कांग्रेस ने मामले को व्यापक राजनीतिक मुद्दे में बदलने की कोशिश शुरू कर दी है। पार्टी का तर्क है कि यदि शिकायत गंभीर थी तो कार्रवाई में इतना समय क्यों लगा।
पेलेट किसने चलाए, अब जांच का असली सवाल
एफआईआर दर्ज होने के बावजूद सबसे अहम सवाल का जवाब अभी बाकी है। साहिल का आरोप है कि उसे पेलेट लगे, लेकिन यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि चोट कैसे लगी, पेलेट किसने चलाए और जिम्मेदारी किसकी बनती है। यही इस मामले की अगली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। एफआईआर दर्ज होना जांच की शुरुआत है, अंतिम निष्कर्ष नहीं।
एक शिकायत से बड़ा हुआ राजनीतिक टकराव
राहुल गांधी ने एक छात्र की शिकायत को सीधे पुलिस जवाबदेही और नागरिक अधिकारों के मुद्दे से जोड़ दिया है। दूसरी ओर भाजपा ने उनके धरने को राजनीतिक प्रदर्शन बताया है। इस तरह शुक्रवार का संघर्ष भले एफआईआर दर्ज होने के साथ खत्म हो गया हो, लेकिन शनिवार से नई लड़ाई शुरू हो गई है। अब राजनीति का केंद्र एफआईआर नहीं, उसकी देरी और जांच की दिशा है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या जांच सिर्फ अज्ञात व्यक्ति तक सीमित रहेगी या कथित पेलेट चोट की जिम्मेदारी भी तय होगी।


