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CM Yogi ने यूपी में एनालॉग पनीर, घी और खोया किया बैन

उत्तर प्रदेश में नकली और संदिग्ध डेयरी उत्पादों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। गाजियाबाद, मथुरा और सहारनपुर में 25 इकाइयों की जांच के दौरान 7,686 किलो खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई और छह मामलों में एफआईआर दर्ज हुई।

Bharat 19/ लखनऊ। बाजार में बिक रहे पनीर, खोया, घी और दूसरे डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश में एनालॉग डेयरी उत्पादों के निर्माण, भंडारण और खुली बिक्री पर रोक लगाने के साथ खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट के खिलाफ विशेष अभियान तेज कर दिया है।

सरकार की कार्रवाई के बाद अब ऐसे उत्पादों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी, जिन्हें डेयरी उत्पादों के नाम पर तैयार कर बाजार में बेचा जाता है। कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है।

नकली पनीर-खोया बनाने वालों पर सख्ती

खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में कुछ विनिर्माण इकाइयों में पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद तैयार करने के दौरान दूध के अलावा पामोलिन ऑयल, रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल और अन्य फैट के इस्तेमाल के मामले सामने आए।

विभाग की ओर से ऐसे मामलों में नमूने लेकर जांच की गई। जहां खाद्य पदार्थों के निर्माण की प्रक्रिया या परिस्थितियों में गंभीर अनियमितताएं मिलीं, वहां नियमानुसार कार्रवाई की गई।

कुछ मामलों में खाद्य पदार्थ तैयार करने के लिए ऐसे रसायनों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है, जिनका खाद्य निर्माण में इस्तेमाल गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि, किसी उत्पाद को अंतिम रूप से असुरक्षित या मिलावटी घोषित करने का आधार संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया ही होगी।

25 विनिर्माण इकाइयों पर पहुंचीं टीमें

मिलावटी और संदिग्ध डेयरी उत्पादों के खिलाफ चलाए गए अभियान में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की 24 विशेष टीमों ने गाजियाबाद, मथुरा और सहारनपुर में कार्रवाई की।

अभियान के दौरान कुल 25 विनिर्माण इकाइयों की जांच की गई। टीमों ने अलग-अलग खाद्य उत्पादों के 72 नमूने जांच के लिए लिए

जांच के दौरान नियमों के उल्लंघन से संबंधित मामलों में कार्रवाई करते हुए 7,686 किलोग्राम खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई।

छह मामलों में दर्ज हुई FIR

खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई केवल निरीक्षण और नमूने लेने तक सीमित नहीं रही। गंभीर पाए गए मामलों में छह एफआईआर दर्ज कराई गई हैं।

इस कार्रवाई के बाद डेयरी उत्पाद तैयार करने और बेचने वाले कारोबारियों में भी हड़कंप है। विभाग की निगरानी आगे भी जारी रहने की संभावना है और जांच में नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

आखिर क्या है एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट?

एनालॉग डेयरी उत्पाद ऐसे उत्पाद होते हैं जिन्हें डेयरी उत्पादों के विकल्प के तौर पर तैयार किया जाता है। इनमें दूध से प्राप्त सामग्री के स्थान पर या उसके साथ अन्य खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सरकार की मौजूदा कार्रवाई में एनालॉग पनीर, एनालॉग क्रीम, एनालॉग घी, एनालॉग छेना और एनालॉग खोया जैसे उत्पादों को लेकर सख्ती की बात सामने आई है।

यानी अब खाद्य कारोबारियों के लिए यह जरूरी होगा कि वे उत्पाद की प्रकृति और उसमें इस्तेमाल सामग्री से जुड़े नियमों का पालन करें।

त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता

त्योहारों के दौरान पनीर, खोया, घी और उनसे बनने वाली मिठाइयों की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में मिलावटी या मानकों के विपरीत खाद्य पदार्थों की बिक्री उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विभाग के अभियान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में बाजारों, डेयरी इकाइयों और मिठाई निर्माण केंद्रों पर जांच और तेज हो सकती है।

उपभोक्ता भी रहें सावधान

खाद्य सुरक्षा कार्रवाई के बीच उपभोक्ताओं के लिए भी सावधानी जरूरी है। पैक्ड डेयरी उत्पाद खरीदते समय लेबल, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट और अन्य जरूरी जानकारी जरूर देखनी चाहिए।

वहीं, खुले में बिकने वाले पनीर, खोया या घी की गुणवत्ता संदिग्ध लगे तो उसकी खरीद से बचना बेहतर है। किसी खाद्य पदार्थ को लेकर शिकायत होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जा सकती है।

उत्तर प्रदेश में नकली और संदिग्ध डेयरी उत्पादों के खिलाफ सरकार की सख्ती आने वाले समय में बाजार की तस्वीर बदल सकती है। 25 इकाइयों पर कार्रवाई, 72 नमूने, 7,686 किलो खाद्य सामग्री का नष्ट होना और छह एफआईआर इस अभियान की गंभीरता को दिखाते हैं।

अब निगाहें आगे होने वाली जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट पर रहेंगी। यदि जांच में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन साबित होता है तो संबंधित कारोबारियों पर आगे भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

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