Hot Topics

H-1B वीजाः अमेरिकी सख्ती से भारत बनेगा AI रिसर्च का नया ग्लोबल सेंटर

 – कड़े अमेरिकी आव्रजन और वीज़ा नियमों की आशंका के बीच सिलिकॉन वैली ने बदली रणनीति, अब काम के लिए टैलेंट को बुलाने के बजाय Nvidia और Meta जैसी कंपनियां भारत में ही स्थापित कर रही हैं कोर AI R&D और सुरक्षा हब  

भारत 19 डेस्क

कानपुर। अमेरिका में आव्रजन नीतियों और H-1B वीज़ा के नियमों, जैसे ग्रेस पीरियड और न्यूनतम वेतन मानदंड में संभावित कड़े बदलावों के बीच वैश्विक टेक उद्योग में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया दिग्गज ब्लूमबर्ग और टेकक्रंच की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सिलिकॉन वैली की टेक कंपनियां अब केवल लागत घटाने के लिए नहीं, बल्कि गहन एआई अनुसंधान और एआई सुरक्षा के लिए भारत को प्राथमिक वैश्विक केंद्र के रूप में चुन रही हैं।

टेकक्रंच की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में वीजा नीतियों को लेकर जारी अनिश्चितता और उच्च परिचालन लागत के कारण टेक कंपनियां अपने कार्यबल की रणनीति में बुनियादी बदलाव कर रही हैं। पहले जहां भारतीय और अन्य विदेशी पेशेवरों को अमेरिका बुलाकर काम कराया जाता था, वहीं अब अमेरिकी टेक जायंट्स वर्क टू द टैलेंट की नीति अपना रहे हैं। वीजा प्रतिबंधों और अनिश्चितताओं के डर से अंतरराष्ट्रीय स्तर के और भारतीय मूल के शीर्ष AI शोधकर्ता अब भारत लौटने या भारत स्थित R&D केंद्रों में सीधे जुड़ने को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह पारंपरिक आईटी आउटसोर्सिंग का दौर नहीं है, बल्कि हाई-एंड AI इंजीनियरिंग, लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLM) की ट्रेनिंग और एआई सेफ्टी गाइडलाइन्स तैयार करने का नया चरण है।

एनवीडिया और मेटा देश में भारी निवेश


ब्लूमबर्ग के आंकड़ों और उद्योग विश्लेषकों के हवाले से बताया गया है कि एनवीडिया, मेटा, गूगल और माइक्रोसाफ्ट जैसी शीर्ष वैश्विक कंपनियां भारत के बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और रिसर्च और डेवलमेंट हब का तेजी से विस्तार कर रही हैं। एनवीडिया भारत में अपनी एआई सुपरकंप्यूटिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट टीमों को तेजी से मजबूत कर रही है, ताकि स्थानीय व वैश्विक स्तर पर एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा सके। मेटा अपने ओपन-सोर्स एआई मॉडल की सुरक्षा, डेटा गवर्नेंस और बहुभाषी अनुकूलन के लिए भारतीय इंजीनियरों की भूमिका को लगातार बढ़ा रही है।

मजबूत डिजिटल ढांचा और मेधा भारत की ताकत


अमेरिकी टेक मीडिया के विश्लेषण के अनुसार भारत के पक्ष में मुख्य रूप से तीन मजबूत कारक काम कर रहे हैं। भारत हर साल दुनिया में सबसे अधिक गणित, विज्ञान और इंजीनियरिंग स्नातक तैयार करता है। सिलिकान वैली की तुलना में भारत में विश्व स्तरीय एआई शोधकर्ताओं और डेवलपर्स की विशाल टीमों को तेजी से और कम लागत में तैनात किया जा सकता है। भारत का मजबूत डिजिटल ढांचा (UPI, ONDC, DigiLocker आदि) एआई माडल के व्यावहारिक उपयोग और रियल टाइम परीक्षण के लिए एक विशाल डेटाबेस प्रदान करता है।

भारत बन रहा एआई पावर हाउस 


ब्लूमबर्ग और टेकक्रंच का मानना है कि अमेरिका की सख्त आव्रजन नीतियां जाने-अनजाने भारत के टेक इकोसिस्टम को अत्यधिक मजबूत कर रही हैं। आने वाले वर्षों में वैश्विक एआई इनोवेशन की धुरी केवल सिलिकॉन वैली या बीजिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारत इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा में एक प्रमुख एआई पावर हाउस के रूप में उभरकर सामने आ रहा है।

Tags :

Bharat 19 News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News