- एफएफडीसी में सीएसजेएमयू कुलपति प्रो. विनय पाठक ने छात्रों के आइडिया को उत्पाद और स्टार्टअप में बदलने, एआई से नए सुगंध-फ्लेवर विकसित करने और पारंपरिक इत्र कला को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने पर दिया जोर
भारत 19/ कन्नौज। कन्नौज के पारंपरिक इत्र उद्योग को अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), शोध और विद्यार्थियों के नए आइडिया से नई दिशा देने की तैयारी है। फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर डेवलपमेंट सेंटर (एफएफडीसी) में शनिवार को आयोजित इंडक्शन कार्यक्रम में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने विद्यार्थियों के नवाचार को नए उत्पादों और स्टार्टअप में बदलने पर जोर दिया।
कुलपति ने कहा कि इत्र और फ्लेवर उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और व्यावहारिक प्रशिक्षण से जोड़ना जरूरी है। इससे कन्नौज की पारंपरिक इत्र कला को आधुनिक विज्ञान और नए बाजारों की जरूरतों से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ेंगी। एमएससी केमिस्ट्री (फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर) और एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए आयोजित कार्यक्रम में एरोमा टूलकिट भी वितरित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और एफएफडीसी के प्रधान निदेशक शक्ति विनय शुक्ल ने किया।
एआई से तैयार होंगे सुगंध और फ्लेवर के नए उत्पाद
प्रो. पाठक ने विद्यार्थियों की ओर से तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी देखी और उनके प्रोजेक्ट तथा नवाचार की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि एआई की मदद से सुगंधित अणुओं का अध्ययन, कच्चे माल का चयन, नए फॉर्मूले तैयार करने और उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है। सीएसजेएमयू विद्यार्थियों के शोध और तकनीकी नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए एफएफडीसी के साथ सहयोग की संभावनाओं पर भी काम करेगा। इससे विद्यार्थियों के अकादमिक ज्ञान और प्रयोगशाला में विकसित विचारों को उद्योग की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने का रास्ता तैयार हो सकता है।
इत्र से कॉस्मेटिक्स तक स्टार्टअप के अवसर
प्रो. पाठक ने प्राकृतिक सुगंध, परफ्यूम, फ्लेवर, कॉस्मेटिक्स और वेलनेस उत्पादों के क्षेत्र में रोजगार के साथ उद्यमिता की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों में अपना कारोबार शुरू करने के अवसरों के लिए भी तैयार किया जाना चाहिए। इसी क्रम में भविष्य में वेलनेस से जुड़े नए पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उद्योग की जरूरत के मुताबिक कौशल देने के साथ उन्हें रोजगार और स्टार्टअप दोनों के लिए तैयार करना है।
आधुनिक विज्ञान से जुड़ेगी कन्नौज की इत्र कला
कार्यक्रम में कन्नौज की पारंपरिक इत्र निर्माण कला और भारतीय सुगंध परंपरा को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि पारंपरिक ज्ञान के साथ रसायन विज्ञान, एआई और नई तकनीकों का इस्तेमाल कर बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं। इससे कन्नौज की सदियों पुरानी इत्र परंपरा को आधुनिक उत्पाद विकास और बाजार की जरूरतों से जोड़ने के साथ विद्यार्थियों के लिए शोध, रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी खुल सकते हैं।
पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण और विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट
इस मौके पर स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष योगेश दुबे और फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर एसोसिएशन कन्नौज के अध्यक्ष पवन त्रिवेदी मौजूद रहे। कोर्स समन्वयक डॉ. इंद्रेश कुमार शुक्ला ने पाठ्यक्रमों के तहत विद्यार्थियों को दी जा रही ट्रेनिंग, प्रोजेक्ट और उनकी उपलब्धियों की जानकारी दी।


