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कानपुर के विनीत मिनोचा हत्याकांड में शालू 22 दिन बाद रिहा

  • पुलिस की विवेचना में शालू के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले, कोर्ट ने 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहाई के दिए आदेश; जांच में बेटे सुब्रत की भूमिका सामने आई

भारत 19

कानपुर। दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में आरोपित बनाकर जेल भेजी गईं उनकी बहू शालू मिनोचा 22 दिन बाद सोमवार को जेल से बाहर आ गईं। पुलिस की विवेचना में शालू के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के बाद कोर्ट ने उनकी रिहाई का आदेश दिया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार शुक्ला की अदालत ने 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र पर तत्काल रिहाई के निर्देश दिए। शालू को 6 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।

शुरुआती जांच में शालू पर आया था आरोप

कल्याणपुर के इंदिरा नगर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में 5 सितंबर की रात विनीत मिनोचा की हत्या हुई थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उनके पुराने कर्मचारी विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में विशाल ने शुरुआत में हत्या के पीछे शालू का नाम लिया था। इसी बयान के आधार पर पुलिस ने शालू को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

रिमांड के दौरान बदला हत्याकांड का पूरा रुख

बाद की विवेचना में पुलिस ने विशाल, राजकिशोर और शालू से पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, रिमांड के दौरान विशाल ने अपना बयान बदलते हुए हत्या की साजिश में शालू के बजाय विनीत के बेटे सुब्रत मिनोचा का नाम लिया। इसके बाद पुलिस ने सुब्रत को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके बयान का मिलान कॉल डिटेल और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से करने की बात कही है।

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शालू के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात

विवेचना आगे बढ़ने के बाद पुलिस को शालू की हत्या की साजिश में भूमिका साबित करने वाला पर्याप्त स्वतंत्र साक्ष्य नहीं मिला। पुलिस ने इसी आधार पर उनकी न्यायिक अभिरक्षा समाप्त करने और रिहाई के लिए कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया। कोर्ट के समक्ष केस डायरी और विवेचना से संबंधित दस्तावेज भी रखे गए।

50 हजार के व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहाई

सीजेएम प्रदीप कुमार शुक्ला की अदालत ने पुलिस के प्रार्थनापत्र को स्वीकार करते हुए शालू की रिहाई का आदेश दिया। आदेश के मुताबिक, यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो जेल अधीक्षक उन्हें तत्काल रिहा करें। इसके लिए 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और संबंधित अंडरटेकिंग देनी होगी। कोर्ट या विवेचक द्वारा बुलाए जाने पर उन्हें उपस्थित होना होगा।

जेल से बाहर आते ही बेटे से मिलने पहुंचीं

रिहाई के बाद शालू ने कहा कि उनकी प्राथमिकता अपने बेटे से मिलना है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उनका बेटा फिलहाल नाना-नानी के पास है। शालू ने कहा कि वह सीधे अपने मायके जाएंगी। उन्होंने हत्याकांड में अपनी भूमिका से इनकार किया है।

हत्याकांड की जांच में अब सुब्रत पर फोकस

शालू की रिहाई के साथ मामले की जांच का फोकस अब सुब्रत की भूमिका पर है। पुलिस की मौजूदा विवेचना के मुताबिक हत्या की साजिश में सुब्रत की भूमिका सामने आई है और उसे गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, मामले की अंतिम न्यायिक स्थिति अदालत में होने वाली आगे की कार्यवाही पर निर्भर करेगी। शालू की रिहाई को भी अदालत की ओर से दिए गए रिहाई आदेश के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि पूरे हत्याकांड पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के रूप में।

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