- अमन गौंड की डॉक्यूमेंट्री को पहला स्थान, आरोही तिवारी दूसरे और वंशिका पाल तीसरे स्थान पर; विद्यार्थियों ने गांधी के जीवन, विचार और विरासत को फिल्मी कहानी के जरिए किया प्रस्तुत
भारत 19
कानपुर। गांधी के जीवन और विचारों को विद्यार्थियों ने इस बार किताबों या भाषणों में नहीं, बल्कि कैमरे की नजर से सामने रखा। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में गांधी जयंती सेवा अभियान के तहत विद्यार्थियों की तैयार की गई 12 डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की स्क्रीनिंग हुई। फिल्मों में महात्मा गांधी के व्यक्तित्व, विचारधारा, जीवन मूल्यों और समाज पर उनके प्रभाव को अलग-अलग नजरिए से प्रस्तुत किया गया। प्रतियोगिता में एमएजेएमसी तृतीय सेमेस्टर के अमन गौंड ने प्रथम स्थान हासिल किया।
गांधी के जीवन को विद्यार्थियों ने दी फिल्मी कहानी
डॉक्यूमेंट्री में विद्यार्थियों ने गांधीजी के जीवन को पारंपरिक जीवनी के बजाय दृश्य कहानी और रचनात्मक प्रस्तुति के जरिए सामने रखने की कोशिश की। फिल्मों में उनके जीवन मूल्यों, विचारधारा और समाज पर प्रभाव से जुड़े पहलुओं को शोधपरक सामग्री, दृश्य भाषा और कहानी कहने की शैली के साथ प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक घटनाओं और गांधीजी के विचारों को वर्तमान सामाजिक संदर्भों से जोड़ने का भी प्रयास किया। इससे उन्हें किसी विषय पर शोध करने के साथ उसे पटकथा और दृश्य माध्यम में ढालने का व्यावहारिक अनुभव मिला।
शोध से लेकर डॉक्यूमेंट्री निर्माण तक परखा हुनर
प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में गांधीजी के विचारों और उनके सामाजिक योगदान की समझ विकसित करने के साथ शोध, पटकथा लेखन, दृश्य प्रस्तुति और डॉक्यूमेंट्री निर्माण जैसे व्यावहारिक कौशल को बढ़ावा देना रहा। विभागाध्यक्ष एवं प्रतियोगिता संयोजक डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री ऐतिहासिक व्यक्तित्व के विचार और योगदान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम है। पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए इससे शोध, विषय विश्लेषण, दृश्य भाषा और कहानी कहने की कला विकसित होती है। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. विनय कुमार ने कहा कि गांधी के विचार आज भी अहिंसा, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी के संदर्भ में प्रासंगिक हैं।
विषयवस्तु से तकनीक तक, इन आधारों पर हुआ मूल्यांकन
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रो. कौशल त्रिपाठी और डॉ. जितेंद्र डबराल शामिल रहे। डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का मूल्यांकन विषयवस्तु, शोध, रचनात्मकता, प्रस्तुति और तकनीकी पक्ष के आधार पर किया गया। विद्यार्थियों की फिल्मों में गांधीजी के जीवन से जुड़ी घटनाओं के साथ उनके विचारों को आज के सामाजिक संदर्भों में समझाने की कोशिश भी दिखाई दी। इस तरह प्रतियोगिता में फिल्म निर्माण के साथ विषय की समझ और उसकी प्रस्तुति, दोनों को महत्व दिया गया।
अमन गौंड प्रथम, आरोही और वंशिका भी विजेता
प्रतियोगिता में एमएजेएमसी तृतीय सेमेस्टर के अमन गौंड ने प्रथम स्थान हासिल किया। बीएजेएमसी प्रथम सेमेस्टर की आरोही तिवारी दूसरे और बीएजेएमसी पंचम सेमेस्टर की वंशिका पाल तीसरे स्थान पर रहीं। स्क्रीनिंग के दौरान पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के शिक्षक और प्रतिभागी विद्यार्थी मौजूद रहे।
