- टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल समेत आठ कंपनियों की प्रक्रिया पर रोक; अमेरिका में स्थायी निवास का इंतजार कर रहे भारतीय कर्मचारियों के आवेदन अटकने की आशंका, हालांकि एच-1बी वीजा रद्द करने का आदेश नहीं
भारत 19 डेस्क/ अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने की राह मुश्किल हो सकती है। ट्रंप प्रशासन ने माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी समेत आठ बड़ी तकनीकी कंपनियों के रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया के अहम चरण पर रोक लगा दी है। इस सूची में भारत की प्रमुख आईटी कंपनियां टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज भी शामिल हैं। अमेरिकी श्रम विभाग के इस कदम से इन कंपनियों के जरिये ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया में लगे भारतीय कर्मचारियों को देरी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। खासकर उन पेशेवरों की चिंता बढ़ सकती है, जिनकी स्थायी निवास की प्रक्रिया अभी श्रम प्रमाणन के चरण में है।
टीसीएस-इन्फोसिस समेत आठ कंपनियां कार्रवाई के दायरे में
अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई में माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी शामिल हैं। श्रम विभाग ने इन कंपनियों से जुड़े नए और लंबित स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदनों पर प्रक्रिया रोकने की घोषणा की है। स्थायी श्रम प्रमाणन को पीईआरएम (PERM) कहा जाता है। यह अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक अहम चरण है। इस दौरान नियोक्ता को यह साबित करना होता है कि विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और रोजगार की स्थिति पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। इस रोक से प्रभावित कंपनियों में काम करने वाले सभी भारतीय कर्मचारियों की स्थिति एक जैसी नहीं होगी। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जिनके आवेदन अभी इसी चरण में लंबित हैं या जो इस प्रक्रिया को शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।
छह साल की वीजा सीमा के करीब पहुंचे भारतीयों की बढ़ सकती है परेशानी
अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय आईटी पेशेवर एच-1बी वीजा पर काम करते हैं। इनमें से कई अपने नियोक्ता के माध्यम से ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया भी शुरू करते हैं। ऐसे कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास की प्रक्रिया में देरी महज कागजी अड़चन नहीं, बल्कि अमेरिका में लंबे समय तक काम जारी रखने की योजना को प्रभावित करने वाला मुद्दा बन सकती है। एच-1बी वीजा सामान्य तौर पर अधिकतम छह साल तक की अवधि के लिए होता है, हालांकि कुछ हालात में इसके विस्तार की अनुमति मिल सकती है। जिन कर्मचारियों की वीजा अवधि समाप्ति के करीब है और जिनकी आगे की योजना ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़ी है, उन्हें विशेष अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, यह मानना सही नहीं होगा कि रोक लगते ही हर प्रभावित कर्मचारी को अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। वास्तविक स्थिति वीजा की अवधि, ग्रीन कार्ड आवेदन के चरण और लागू नियमों पर निर्भर करेगी।
एच-1बी वीजा रद्द नहीं, ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर रोक
अमेरिकी फैसले को लेकर सबसे अहम बात यह है कि ग्रीन कार्ड और एच-1बी वीजा अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। एच-1बी वीजा विदेशी पेशेवरों को निर्धारित शर्तों के तहत अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है, जबकि पीईआरएम रोजगार आधारित स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया का एक चरण है। इसलिए श्रम प्रमाणन आवेदन पर रोक लगने का अर्थ अपने आप मौजूदा एच-1बी वीजा रद्द होना या पहले से जारी ग्रीन कार्ड वापस लिया जाना नहीं है। जिन कर्मचारियों का श्रम प्रमाणन पहले ही पूरा हो चुका है, उनकी स्थिति लंबित आवेदन वाले कर्मचारियों से अलग हो सकती है। भारतीय पेशेवरों के लिए फिलहाल जरूरी है कि वे अपने आवेदन की मौजूदा स्थिति, वीजा की वैधता और अगले चरणों के बारे में संबंधित कंपनी के आव्रजन विशेषज्ञ से जानकारी लें।
अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी और विदेशी भर्ती पर उठे सवाल
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और श्रम विभाग के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि कुछ कंपनियों ने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के बीच विदेशी कर्मचारियों की भर्ती और वीजा व्यवस्था का इस्तेमाल किया। प्रशासन का कहना है कि कंपनियों को अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार और वेतन हितों की रक्षा करनी चाहिए। माइक्रोसॉफ्ट ने अपने बचाव में कहा कि पिछले वित्त वर्ष में उसके दाखिल करीब छह हजार एच-1बी आवेदनों में लगभग 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों की वीजा अवधि बढ़ाने या उनकी स्थिति बदलने से जुड़े थे। कंपनी ने यह भी कहा कि समान काम करने वाले एच-1बी कर्मचारियों को दूसरे कर्मचारियों के बराबर वेतन दिया जाता है। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई और कंपनियों के जवाब के बीच जांच की स्थिति अहम बनी हुई है।
भारतीय आईटी उद्योग के लिए भी अहम घटनाक्रम
अमेरिका भारतीय आईटी कंपनियों के प्रमुख बाजारों में शामिल है। वहां विदेशी कर्मचारियों की भर्ती और स्थायी निवास से जुड़े नियमों में बदलाव का असर कंपनियों की नियुक्ति रणनीति और कर्मचारियों की दीर्घकालिक योजनाओं पर पड़ सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रोक से कुल कितने भारतीय पेशेवर प्रभावित होंगे और प्रक्रिया कितने समय तक बाधित रहेगी। इसका आकलन लंबित आवेदनों की संख्या, जांच के नतीजों और अमेरिकी श्रम विभाग के अगले फैसलों के बाद ही किया जा सकेगा। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता उन भारतीय कर्मचारियों को लेकर है, जो अमेरिका में वर्षों से काम कर रहे हैं और स्थायी निवास के जरिए अपने भविष्य को सुरक्षित करने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई ने उनकी इस प्रक्रिया में अनिश्चितता बढ़ा दी है।


