- विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए चुनावी मैप लेकर जिलों में उतरेंगे वरिष्ठ नेता, रोजाना प्रदेश संगठन को भेजेंगे रिपोर्ट; बूथ समितियों की सक्रियता, कार्यकर्ताओं से संवाद और जीती-हारी सीटों की स्थिति का होगा आकलन
भारत 19/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा अब जिलों में अपनी चुनावी तैयारियों का हिसाब लेने की रणनीति पर काम कर रही है। दीपावली के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता जिलों में प्रवास करेंगे और चुनावी मैप के आधार पर संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन करेंगे। किस जिले में संगठन कितना सक्रिय है, किन विधानसभा क्षेत्रों में बूथ समितियां मजबूत हैं और कहां कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है, इन सभी पहलुओं की समीक्षा होगी। खास बात यह है कि जिला प्रवास के दौरान जुटाई गई जानकारियों की रोजाना रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को भेजी जाएगी। इससे पार्टी को अलग-अलग जिलों में चुनावी तैयारियों की स्थिति समझने और कमजोरियों को समय रहते दूर करने में मदद मिलेगी।
नवरात्र से दीपावली तक त्योहारों और बाजारों में बढ़ने वाली व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए भाजपा फिलहाल संगठनात्मक गतिविधियों को सीमित रखने की योजना पर काम कर रही है। पार्टी नहीं चाहती कि इस दौरान व्यापार से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर अतिरिक्त संगठनात्मक जिम्मेदारियों का दबाव बढ़े। दीपावली के बाद अभियान को पूरी गति देने की तैयारी है, ताकि शुरुआत से ही जिलों में संगठन की सक्रियता और चुनावी कार्यक्रमों की प्रगति का आकलन किया जा सके।
जिला प्रभारियों के साथ वरिष्ठ नेताओं के होंगे प्रवास
भाजपा ने सितंबर में प्रदेश के छह सांगठनिक क्षेत्रों में जिला प्रभारियों की नियुक्तियां की थीं। अब इन्हीं व्यवस्थाओं के आधार पर जिलों में प्रवास और चुनावी तैयारियों की समीक्षा की रूपरेखा आगे बढ़ाई जाएगी। प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह की भूमिका इन तैयारियों में महत्वपूर्ण रहेगी।
प्रवास के दौरान जिला पदाधिकारियों से संगठन की मौजूदा स्थिति, बूथ समितियों की सक्रियता, कार्यकर्ताओं से संपर्क और क्षेत्र में चल रहे कार्यक्रमों की जानकारी ली जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि चुनावी गतिविधियों में कार्यकर्ताओं की भागीदारी कितनी है और पार्टी का संदेश जनता तक किस स्तर तक पहुंच रहा है। जिलों से नियमित रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाने की व्यवस्था से अलग-अलग क्षेत्रों में संगठनात्मक कामकाज की स्थिति सामने आ सकेगी। जहां गतिविधियां धीमी मिलेंगी, वहां सुधार के लिए समय रहते कदम उठाए जा सकेंगे।
छह सांगठनिक क्षेत्रों के समीकरणों पर रहेगी नजर
प्रदेश में भाजपा की चुनावी रणनीति बनाते समय पश्चिमी उत्तर प्रदेश, ब्रज, अवध, काशी, गोरखपुर और कानपुर-बुंदेलखंड के क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखा जाएगा। इन क्षेत्रों की राजनीतिक परिस्थितियों, स्थानीय मुद्दों और सामाजिक संरचना में अंतर को देखते हुए जिला स्तर पर संगठन की तैयारी का अलग-अलग आकलन महत्वपूर्ण होगा। जिला स्तर पर जिम्मेदारी निभाने वाले नेताओं के चयन और प्रवास की रूपरेखा तय करते समय उनके संगठनात्मक अनुभव, स्थानीय संपर्क, क्षेत्र की समझ और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे पहलुओं पर विचार किया जाएगा। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप संगठन की गतिविधियों को प्रभावी बनाना और चुनावी तैयारियों में बेहतर तालमेल स्थापित करना है।
जीती और हारी सीटों का बनेगा चुनावी रिपोर्ट कार्ड
दीपावली के बाद होने वाले प्रवास में विधानसभा क्षेत्रवार संगठन की स्थिति का आकलन अहम रहेगा। भाजपा के सामने अपनी जीती हुई सीटों पर पकड़ बनाए रखने के साथ उन क्षेत्रों में भी संगठन को सक्रिय करने की चुनौती होगी, जहां पिछले चुनावों में अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। बूथ समितियों की सक्रियता, स्थानीय पदाधिकारियों के बीच समन्वय, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और क्षेत्रीय समस्याओं पर संगठन की प्रतिक्रिया की समीक्षा की जाएगी। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के बीच बदले राजनीतिक परिदृश्य को समझना भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होगा। जिलों से जुटाई गई जानकारियां आगे की संगठनात्मक बैठकों और विधानसभा क्षेत्रवार तैयारियों का आधार बन सकती हैं।
रोजाना रिपोर्टिंग से प्रदेश नेतृत्व को मिलेगा फीडबैक
जिला प्रवास के बाद संगठन की स्थिति और चुनावी कार्यक्रमों की सक्रियता पर नियमित रिपोर्टिंग इस पूरी कवायद का अहम हिस्सा होगी। इसका उद्देश्य अलग-अलग जिलों से मिलने वाली जानकारियों को प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाना और संगठन की कमजोरियों की पहचान कर समय रहते सुधार करना है। दीपावली के बाद शुरू होने वाली यह प्रक्रिया भाजपा के मिशन 2027 की संगठनात्मक तैयारियों को गति देने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। अब देखना होगा कि जिलों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर पार्टी अपनी चुनावी तैयारियों, बूथ प्रबंधन और विधानसभा क्षेत्रवार रणनीति में किस तरह बदलाव करती है।


