2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% किया, 2027-28 में भी इतनी ही ग्रोथ की उम्मीद; मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र से मिली अर्थव्यवस्था को ताकत
भारत 19/ नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपना आकलन बेहतर किया है। IMF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। अक्टूबर 2026 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में किए गए इस संशोधन से संकेत मिलता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास गति मजबूत बनी हुई है।
घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र से मिला सहारा
IMF के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों से समर्थन मिल रहा है। देश का बड़ा और लगातार विस्तार करता घरेलू बाजार, अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति और संरचनात्मक सुधार भी विकास की संभावनाओं को मजबूती देते हैं। विकास दर के अनुमान में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की कीमतों और व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में भारत के लिए बेहतर अनुमान अर्थव्यवस्था की मौजूदा मजबूती का संकेत है, हालांकि इससे भविष्य की वृद्धि की गारंटी नहीं मिलती।
RBI का अनुमान IMF से थोड़ा अधिक
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ 7.1% रहने का अनुमान जताया है। RBI का आकलन IMF के 7% के अनुमान से थोड़ा अधिक है। दोनों संस्थाओं के अनुमान अलग-अलग आकलन और आर्थिक परिस्थितियों पर आधारित हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दबाव
IMF ने 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 3.1% और 2027 में 3.4% रहने का अनुमान जताया है। रिपोर्ट में मध्य पूर्व में संघर्ष लंबा खिंचने, कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बने रहने और वित्तीय बाजारों में दबाव बढ़ने जैसे जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। IMF के अनुमान के अनुसार, 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 95.74 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। महंगा तेल भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए महंगाई, चालू खाते और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा सकता है।
दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत की तेज रफ्तार
IMF के आकलन में भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास करने वाले देशों में बना हुआ है। हालांकि, आर्थिक वृद्धि की वास्तविक रफ्तार घरेलू मांग, निवेश, ऊर्जा की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल 2026-27 और 2027-28, दोनों के लिए 7% की उम्मीद भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत विकास परिदृश्य को रेखांकित करती है।
वित्त मंत्री ने सकारात्मक संकेत का असर
केश्री ब्रोकिंग के को-फाउंडर राजीव सिंह के मुताबिक पिछले एक-डेढ़ वर्ष में सूचीबद्ध कंपनियों का लाभ बढ़ रहा है, हालांकि शेयर बाजार में यह अभी दिख नहीं रहा है लेकिन इसकी वजह से भारत की जीडीपी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा वित्त मंत्री ने कई सकारात्मक संकेत भी दिए हैं जिसका प्रभाव अर्थव्यवस्था पर जल्द ही पड़ता दिखेगा। संभवतः आईएमएफ इसी वजह से भारत की जीडीपी की ग्रोथ के अपने अनुमान को बढ़ा रहा है।


