- कौशल विकास, औद्योगिक जरूरतों और चरित्र निर्माण पर मंथन; कक्षा नौ से कौशल शिक्षा, स्कूली स्तर पर जीवन कौशल और विकसित उत्तर प्रदेश के लिए शिक्षा को केंद्र में रखने पर जोर
Bharat 19 | कानपुर। शिक्षा सिर्फ डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहे, बल्कि युवाओं को कौशल, रोजगार, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़े। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय उत्तर प्रदेश ज्ञान सभा के दूसरे दिन शिक्षा को रोजगार और उद्योग की जरूरतों से जोड़ने पर विशेष जोर रहा। विभिन्न सत्रों में शिक्षा के उद्देश्य, कौशल विकास, औद्योगिक समन्वय, स्कूली शिक्षा और विकसित उत्तर प्रदेश के लिए शिक्षा की भूमिका पर मंथन हुआ। ज्ञान सभा का समापन कजरी, सोहर, भजन और लोक नृत्यों की प्रस्तुतियों से सजी सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ।
डिग्री से आगे क्षमता विकास पर जोर
पहले सत्र में यंग इन्वेस्टर तन्मय तिवारी ने कहा कि शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों में क्षमता विकास होना चाहिए। ज्ञान का वास्तविक महत्व उसके व्यवहारिक प्रयोग में है। उन्होंने युवाओं को सीमित समूहों से बाहर निकलकर वैश्विक जुड़ाव और नए अवसरों से जुड़ने की जरूरत बताई। मुख्य वक्ता डॉ. हरेश प्रताप सिंह ने ‘करके सीखने’ पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा को समाज की बदलती जरूरतों के अनुरूप लगातार विकसित करना होगा। सत्र की अध्यक्षता प्रो. आरपी तिवारी ने की।

उद्योग की जरूरतों के मुताबिक कौशल विकास पर जोर
दूसरे सत्र में शिक्षा और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता का विकास भी होना चाहिए। डॉ. अतुल कोठारी ने कक्षा नौ से 12वीं तक कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई। उद्योग की मांग और युवाओं के कौशल के बीच अंतर कम करने तथा युवाओं को रोजगार की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया गया।
स्कूली शिक्षा में किताबी ज्ञान से आगे बढ़ने पर जोर
‘उत्तर प्रदेश में स्कूली शिक्षा : बदलते आयाम, दशा एवं दिशा’ सत्र में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, मातृभाषा, शिक्षकों की भूमिका और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विचार हुआ। प्रो. अनुराग त्रिपाठी ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर स्वावलंबी बनाने की जरूरत है। मेजर (डॉ.) हर्ष कुमार ने विद्यार्थियों के विकास में जुनून के साथ अनुशासन को जरूरी बताया।
विकसित उत्तर प्रदेश के लिए शिक्षा को केंद्र में रखने पर जोर
समापन सत्र में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सुरेश कुमार गुप्ता ने ज्ञान सभा के उद्देश्य और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन पर विचार रखे। कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा ने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश के लिए शिक्षा, कौशल, गुणवत्तापूर्ण रोजगार, कृषि और औद्योगिक विकास पर एक साथ काम करना होगा। डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और शोध को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
कजरी-सोहर की प्रस्तुतियों से सजा समापन
संजय स्वामी ने आयोजन की स्वच्छता और व्यवस्थाओं की सराहना की। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया गया। इसके बाद सांस्कृतिक संध्या में कजरी, सोहर, भजन और लोकनृत्यों की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। कार्यक्रम में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, विश्वविद्यालय के शिक्षक, कार्यकर्ता और विद्यार्थी मौजूद रहे।
