- 2,300 व्यापारियों के मुकाबले 23 निदेशकों की संख्या पर सवाल; मतपत्र के क्रमांक और शव वाहन को लेकर सदस्यों ने उठाए मुद्दे
कानपुर। कानपुर कपड़ा कमेटी में विवाद थमने के बजाय आम सभा के बाद और बढ़ गया। आम सभा में सदस्यों ने पदाधिकारियों के कामकाज और कमेटी के फैसलों पर सवाल उठाते हुए कई आरोप लगाए। सदस्यों ने कहा कि बाजार में करीब 2,300 व्यापारी हैं, जबकि कमेटी में 23 निदेशक हैं। उनके मुताबिक आम सभा में व्यापारियों की संख्या निदेशकों से करीब 99 गुना अधिक है, इसलिए कमेटी को आम सभा की राय को महत्व देना चाहिए। बैठक के दौरान सदस्यों और पदाधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई।
चुनाव के बाद से जारी है कपड़ा कमेटी में विवाद
कपड़ा कमेटी का विवाद पिछले वर्ष दिसंबर में हुए चुनाव के बाद से चला आ रहा है। ज्योति नेवटिया ने पहले लक्ष्मण सहगल के चुनाव पर आपत्ति जताई। इसके बाद उन्होंने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में शिकायत की। कपड़ा कमेटी कंपनी एक्ट के तहत गठित है। शिकायत की सुनवाई पिछले सप्ताह पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी निर्णय नहीं आया है। इसी बीच आम सभा में कमेटी के कामकाज से जुड़े कई मुद्दे उठे और सदस्यों ने मंच के सामने खुलकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
मतपत्र के क्रमांक को लेकर आम सभा में सवाल
विवाद की शुरुआत मतपत्र पर क्रमांक लिखे जाने के मुद्दे से हुई। ज्योति नेवटिया ने कहा कि वह पहले कमेटी के पदाधिकारी रह चुके हैं। उनके मुताबिक मतपत्र पर दर्ज क्रमांक और मतदाता सूची के क्रमांक के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि किस सदस्य ने किसे वोट दिया। उनकी बात का कई सदस्यों ने समर्थन किया। हालांकि बैठक का संचालन कर रहे पूर्व अध्यक्ष काशी प्रसाद शर्मा ने कहा कि ऐसा नहीं हुआ है और ज्योति नेवटिया इसे साबित करें। इसके बाद कई सदस्यों ने सवाल उठाया कि मतपत्र पर क्रमांक रखने की जरूरत ही क्या है और इसे हटाने की मांग की।
शव वाहन के चंदे की रसीद को लेकर भी विवाद
इसके बाद शव वाहन को लेकर भी सदस्यों और पदाधिकारियों के बीच बहस हुई। सदस्यों ने आरोप लगाया कि कमेटी के पदाधिकारी शव वाहन के लिए बाजार से चंदा ले रहे हैं, लेकिन उसकी रसीद नहीं दी जा रही है। उन्होंने मांग की कि चंदे की रसीद उपलब्ध कराई जाए, ताकि व्यापारी उसका आयकर में लाभ ले सकें। इस पर कमेटी के अध्यक्ष वीरेन्द्र गुलाटी ने कहा कि विजय कपूर के सहयोग से एक अस्पताल से शव वाहन मिला है और इसके संचालन का खर्च कमेटी उठाएगी। वहीं विजय कपूर ने कहा कि बाजार से जो भी चंदा हुआ है, उसे बाजार में आने वाले ग्राहकों की सुविधा के लिए खर्च किया जाए तो बेहतर होगा।
2,300 व्यापारियों के मुकाबले 23 निदेशकों पर सवाल
कमेटी के फैसलों को लेकर बहस के दौरान सदस्यों ने 2,300 व्यापारियों और 23 निदेशकों की संख्या का मुद्दा उठाया। सदस्यों ने कहा कि 23 निदेशक बाजार के करीब एक प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि बाकी 99 प्रतिशत व्यापारी आम सभा में हैं। उनका कहना था कि कमेटी के निर्णयों से बड़ी आम सभा है और व्यापारियों की सामूहिक राय को महत्व दिया जाना चाहिए।
विवाद की गर्माहट आगे भी बने रहने के आसार
कपड़ा व्यापारियों के मुताबिक आम सभा में जिस तरह सदस्यों और पदाधिकारियों के बीच विवाद सामने आया है, उससे कमेटी के भीतर मतभेद जल्द खत्म होने की संभावना कम है। व्यापारियों का कहना है कि आम सभा में उठे मुद्दों और आरोपों की गर्माहट आगे भी बनी रह सकती है और इसका असर बाजार की गतिविधियों में दिखाई देता रहेगा।

