- 2027 चुनाव से पहले संगठन को धार देने की तैयारी; कानपुर-बुंदेलखंड में सातों मोर्चों के प्रभारी तय, नई टीमों के लिए जिलों से मांगे जाएंगे नाम
भारत 19
कानपुर। उत्तर प्रदेश में 2027 की चुनावी तैयारी के बीच भाजपा ने अब मोर्चों की मोर्चाबंदी तेज कर दी है। कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में हुई मैराथन बैठक में पार्टी ने सातों मोर्चों को सक्रिय करने के लिए क्षेत्रीय प्रभारियों की जिम्मेदारी तय कर दी। इसके साथ ही जिलों से नई टीमों के लिए संभावित पदाधिकारियों के नामों के पैनल मांगे गए हैं। यानी क्षेत्र से लेकर जिला और बूथ तक संगठन को सक्रिय करने के साथ भाजपा अब अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए मोर्चों का नेटवर्क तैयार कर रही है।
सातों मोर्चों की कमान क्षेत्रीय उपाध्यक्षों को
क्षेत्रीय कार्यालय में हुई बैठक में प्रदेश महामंत्री एवं क्षेत्रीय प्रभारी शंकर लाल लोधी ने संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने के निर्देश दिए। उन्होंने क्षेत्रीय पदाधिकारियों से विधानसभा क्षेत्रों में प्रवास कर कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाने के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रबुद्धजनों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से संपर्क मजबूत करने को कहा। क्षेत्रीय अध्यक्ष राम किशोर साहू ने सातों मोर्चों की गतिविधियों को गति देने के लिए क्षेत्रीय उपाध्यक्षों को प्रभारी बनाया है। संबंधित प्रभारियों को अपने-अपने मोर्चों के पदाधिकारियों के साथ समन्वय कर संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करने की जिम्मेदारी दी गई है।
इन नेताओं को मिली जिम्मेदारी
युवा मोर्चा : अमित समाधिया
महिला मोर्चा : नीतू सिंह
पिछड़ा मोर्चा : नरेंद्र राजपूत
अनुसूचित मोर्चा : आशीष कोल
अल्पसंख्यक मोर्चा : भुवन प्रकाश गुप्ता
किसान मोर्चा : अशोक राजपूत
जनजाति मोर्चा : अखिलेश नाथ दीक्षित
जिलों से आएंगे नाम, फिर बनेगी नई टीम
मोर्चों को सक्रिय करने के साथ जिला स्तर पर पदाधिकारियों और कमेटियों के गठन की प्रक्रिया भी तेज की जा रही है। इसके लिए जिलों से संभावित पदाधिकारियों के नामों के पैनल मांगे जाएंगे। क्षेत्रीय स्तर पर इन पैनलों पर विचार के बाद मोर्चों की नई टीमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस पूरी कवायद में सामाजिक प्रतिनिधित्व को खास तवज्जो देने की तैयारी है। पार्टी चाहती है कि संबंधित सामाजिक वर्गों में प्रभाव रखने वाले सक्रिय कार्यकर्ताओं को मोर्चों में जिम्मेदारी मिले। इसके जरिए चुनाव से पहले अलग-अलग सामाजिक समूहों तक संगठन की सीधी पहुंच बढ़ाने की रणनीति है।
बूथ के साथ सामाजिक समीकरण साधने की तैयारी
भाजपा की संगठनात्मक रणनीति में मोर्चों की भूमिका केवल पदाधिकारियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं रहेगी। पार्टी की कोशिश है कि युवा, महिला, किसान, पिछड़ा, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और जनजातीय समाज से जुड़े कार्यकर्ताओं के जरिए संबंधित वर्गों के बीच लगातार संपर्क बनाए रखा जाए। यूपी में 2027 के चुनाव को लेकर भाजपा पहले ही क्षेत्रीय स्तर पर नई टीमें तैयार कर चुकी है। इन टीमों को जमीनी संगठन मजबूत करने और प्रदेश नेतृत्व व जिलों के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
विधानसभा प्रवास से बूथ तक परखी जाएगी ताकत
बैठक में क्षेत्रीय पदाधिकारियों के विधानसभा प्रवास पर भी विशेष जोर दिया गया। पदाधिकारी मंडल, शक्ति केंद्र और बूथ स्तर तक जाकर संगठन की सक्रियता और कार्यकर्ताओं की स्थिति का फीडबैक लेंगे। वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से संवाद के जरिए स्थानीय समस्याओं और संगठन की कमियों की जानकारी भी जुटाई जाएगी। इससे पार्टी को विधानसभा स्तर पर संगठन की वास्तविक स्थिति का फीडबैक मिलने की उम्मीद है।
2027 से पहले संगठन का चुनावी नेटवर्क
भाजपा की इस कवायद को 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। एक तरफ क्षेत्रीय संगठन को सक्रिय किया जा रहा है, दूसरी तरफ मोर्चों के जरिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने की तैयारी है। प्रदेश भाजपा भी सितंबर से चुनावी गतिविधियों को तेज करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कानपुर-बुंदेलखंड में अब मोर्चों की नई टीम, विधानसभा प्रवास और बूथ स्तर के फीडबैक को एक साथ जोड़कर संगठन को चुनावी मोड में लाने की तैयारी है।
बैठक में ये पदाधिकारी रहे मौजूद
बैठक की अध्यक्षता क्षेत्रीय अध्यक्ष राम किशोर साहू ने की। संचालन क्षेत्रीय महामंत्री आनंद सिंह ने किया। क्षेत्रीय महामंत्री आदित्य त्रिवेदी, राजेश पटेल, शिव सिंह भारती, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष नीतू सिंह, पवन प्रताप सिंह, वीरेंद्र तिवारी समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी अनूप अवस्थी ने इसकी जानकारी दी।


