- पांच दिवसीय बैंकिंग और पीएलआई समेत मांगों को लेकर देशभर में कर्मचारी-अधिकारी हड़ताल पर; नकद जमा-निकासी, चेक, केवाईसी और शाखा सेवाएं प्रभावित, कानपुर में जुलूस निकालकर प्रदर्शन
भारत 19
कानपुर। पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था समेत विभिन्न मांगों को लेकर आज शुक्रवार को देशभर में बैंक कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल पर हैं। इसका सीधा असर बैंक शाखाओं की सेवाओं पर पड़ा है। नकद जमा-निकासी, चेक, पासबुक अपडेट, केवाईसी और ऋण से जुड़े काम प्रभावित हैं। हालांकि एटीएम, यूपीआई, इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं। कानपुर में कर्मचारियों ने जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। वहीं, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) ने मांगें नहीं माने जाने पर 28 से 30 सितंबर तक फिर तीन दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल और 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है।

कानपुर में जुलूस निकालकर बैंक कर्मचारियों का प्रदर्शन
हड़ताल के समर्थन में कानपुर में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने इंडियन बैंक, बड़ा चौराहा से बैंक ऑफ इंडिया, फूलबाग तक जुलूस निकाला। फूलबाग स्थित बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा पर प्रदर्शन किया गया। कर्मचारियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने, पीएलआई में कथित भेदभाव खत्म करने और द्विपक्षीय समझौते का सम्मान करने की मांग को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में राजीव गुप्ता, प्रवीण मिश्रा, अंकुर मिश्रा, जय प्रकाश मिश्रा, अनुराग शुक्ला, अंकुर द्विवेदी, विनय गोयनका, एसके मिश्रा और मनोज तिवारी समेत बैंक संगठनों के पदाधिकारी शामिल रहे।

पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था सबसे बड़ी मांग
यूएफबीयू के आह्वान पर हो रही हड़ताल में पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करना प्रमुख मांग है। बैंक यूनियनों का कहना है कि मार्च 2024 में इस संबंध में सहमति बनने और प्रस्ताव सरकार को भेजे जाने के बावजूद अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। यूनियनों के मुताबिक डिजिटल बैंकिंग, ग्राहक सेवा, ऋण वसूली, अनुपालन, ऑडिट और लक्ष्य आधारित काम का दबाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में पांच दिन का कार्य सप्ताह कर्मचारियों के कार्य-जीवन संतुलन और कार्यक्षमता के लिए जरूरी है।
पीएलआई व्यवस्था में भेदभाव पर बैंक यूनियनों की आपत्ति
हड़ताल का दूसरा प्रमुख मुद्दा परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) है। यूनियनों ने स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए व्यक्तिगत प्रदर्शन आधारित पीएलआई व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। बैंक संगठनों का तर्क है कि बैंक का प्रदर्शन सामूहिक प्रयास से तय होता है, इसलिए प्रोत्साहन व्यवस्था भी समान और पारदर्शी होनी चाहिए। 2025-26 के लिए स्केल-4 से 8 के अधिकारियों से संबंधित पीएलआई व्यवस्था को लेकर भी यूनियनों ने स्थायी समाधान की मांग की है।
भर्ती, पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी उठी आवाज
यूएफबीयू ने पांच दिवसीय बैंकिंग और पीएलआई के अलावा पर्याप्त क्लेरिकल एवं अधीनस्थ कर्मचारियों की भर्ती, एनपीएस को पुरानी पेंशन व्यवस्था में बदलने, पेंशन अपडेटेशन, समान महंगाई भत्ता और ग्रेच्युटी सीमा बढ़ाने की मांग उठाई है। इसके साथ ही एनपीएस में बैंकों के अतिरिक्त चार प्रतिशत योगदान पर आयकर छूट, पेंशनरों के एक्स-ग्रेशिया में संशोधन, लीव बैंक और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम का भार बैंकों द्वारा उठाने जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। बैंक यूनियनें निजी बैंकों के एक्स-ग्रेशिया और वर्कमेन व ऑफिसर डायरेक्टर की व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी उठा रही हैं।
सितंबर में तीन दिन फिर बंद रहेंगी बैंक शाखाएं
मांगों पर समाधान नहीं होने पर यूएफबीयू ने आंदोलन आगे बढ़ाने का कार्यक्रम घोषित किया है। 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का ऐलान किया गया है। इसके बाद 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है। यानी आज की एक दिवसीय बैंक हड़ताल के साथ आंदोलन खत्म नहीं होगा। मांगों पर सहमति नहीं बनी तो सितंबर के अंत में लगातार तीन दिन बैंक शाखाओं का कामकाज प्रभावित रहेगा और अक्टूबर में आंदोलन और व्यापक हो सकता है।


