- 75 में सिर्फ 39 जिले अनिवार्य हॉलमार्किंग के दायरे में; बाकी जिलों में स्थानीय स्तर पर बने बिना हॉलमार्क जेवर की शुद्धता पर ग्राहक को खुद रहना होगा सतर्क
भारत 19
कानपुर। त्योहार और सहालग में सोने के जेवर खरीदने जा रहे हैं तो खरीदारी से पहले एक बात जरूर जांच लें कि आपका जिला अनिवार्य हॉलमार्किंग के दायरे में है या नहीं। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में अभी सिर्फ 39 जिलों में सोने के आभूषणों पर अनिवार्य हॉलमार्किंग लागू है। बाकी 36 जिलों में स्थानीय स्तर पर तैयार बिना हॉलमार्क जेवर खरीदने पर ग्राहक के सामने शुद्धता की जांच की बड़ी चुनौती है। कारोबारी ने 18 कैरेट बताया और जेवर 14 कैरेट निकला तो अंतर की रकम ग्राहक की जेब से जा सकती है।
36 जिलों के ग्राहकों को क्यों रहना होगा सतर्क
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, अमेठी, अमरोहा, बागपत, बहराइच, बलरामपुर, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, एटा, फतेहपुर, फिरोजाबाद, गोंडा, हमीरपुर, हापुड़, हरदोई, हाथरस, जालौन, कन्नौज, कानपुर देहात, कासगंज, कौशांबी, कुशीनगर, ललितपुर, महाराजगंज, महोबा, पीलीभीत, संभल, संत कबीर नगर, शामली, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, सीतापुर, सोनभद्र, सुल्तानपुर और उन्नाव में फिलहाल अनिवार्य गोल्ड हॉलमार्किंग लागू नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन जिलों में बिकने वाला हर बिना हॉलमार्क जेवर अशुद्ध है। असल मुद्दा यह है कि अनिवार्य हॉलमार्किंग नहीं होने पर ग्राहक को जेवर की घोषित शुद्धता की पुष्टि के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।
बड़े शहरों से आया जेवर अपेक्षाकृत सुरक्षित
इनमें कई जिले ऐसे हैं जहां फैंसी और डिजाइनर जेवर का स्थानीय निर्माण सीमित है। कारोबारी अक्सर बड़े शहरों से आभूषण मंगाकर बेचते हैं। दूसरे जिले से आया जेवर अगर पहले से हॉलमार्क है तो ग्राहक उस पर BIS हॉलमार्क और HUID की जांच कर सकता है। सावधानी उन जेवरों को लेकर ज्यादा जरूरी है जिन्हें स्थानीय स्तर पर तैयार कर बिना हॉलमार्क बेचा जा रहा है। ऐसे मामले में ग्राहक को सिर्फ दुकानदार के बताए कैरेट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
इन 39 जिलों में अनिवार्य हॉलमार्किंग
आगरा, प्रयागराज, बरेली, बदायूं, देवरिया, गाजियाबाद, गोरखपुर, जौनपुर, झांसी, कानपुर नगर, लखनऊ, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, गौतमबुद्ध नगर, सहारनपुर, शाहजहांपुर, वाराणसी, बलिया, आजमगढ़, भदोही, बाराबंकी, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, औरैया, अंबेडकर नगर, इटावा, अयोध्या, रायबरेली, बस्ती, लखीमपुर खीरी, रामपुर, गाजीपुर, फर्रुखाबाद, मैनपुरी, मऊ, बिजनौर और बांदा में सोने के आभूषणों पर अनिवार्य हॉलमार्किंग लागू है। इन जिलों में हॉलमार्किंग के दायरे में आने वाले आभूषणों के मामले में ग्राहक को BIS की निर्धारित व्यवस्था के तहत शुद्धता की पहचान और सत्यापन की सुविधा मिलती है।
हॉलमार्क में तीन चीजें जरूर देखें
हॉलमार्क का मतलब सिर्फ कोई मुहर लगी होना नहीं है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के अनुसार हॉलमार्किंग बहुमूल्य धातु में मौजूद शुद्ध धातु की मात्रा का आधिकारिक निर्धारण और रिकॉर्ड है। हॉलमार्क वाले सोने के जेवर पर मुख्य रूप से BIS का लोगो, शुद्धता का निशान और छह अंकों वाला HUID देखना चाहिए। HUID हर हॉलमार्क वाले आभूषण के लिए विशिष्ट होता है। खरीदारी से पहले ग्राहक BIS Care App के ‘Verify HUID’ फीचर से इसकी जांच कर सकता है।
14 कैरेट को 18 कैरेट बताने पर नुकसान
गैर-अनिवार्य जिले में बिना हॉलमार्क जेवर खरीदते समय सबसे बड़ा जोखिम शुद्धता को लेकर है। मसलन, यदि किसी जेवर को 18 कैरेट बताकर बेचा गया, लेकिन उसमें सोने की शुद्धता 14 कैरेट निकली तो ग्राहक को सोने की वास्तविक कीमत के मुकाबले अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। इसलिए गैर-अनिवार्य जिले में भी ग्राहक को संभव हो तो हॉलमार्क वाला जेवर ही खरीदना चाहिए। बिना हॉलमार्क जेवर लेने की स्थिति में शुद्धता की स्वतंत्र जांच कराना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।
हॉलमार्क जेवर कम शुद्ध निकला तो मुआवजा
हॉलमार्क वाले आभूषण में अंकित शुद्धता से कम शुद्धता पाए जाने पर उपभोक्ता के लिए मुआवजे का प्रावधान है। BIS के अनुसार ऐसी स्थिति में ग्राहक को शुद्धता में कमी से निकलने वाली अंतर राशि और परीक्षण शुल्क के दो गुने के बराबर मुआवजा मिल सकता है। यही वजह है कि गैर-अनिवार्य जिले में भी ग्राहक के लिए हॉलमार्क वाला जेवर खरीदना ज्यादा सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
सोना खरीदने से पहले इन बातों का ध्यान रखें
- BIS-पंजीकृत ज्वैलर से जेवर खरीदें।
- जेवर पर BIS लोगो, शुद्धता और HUID जरूर देखें।
- HUID को BIS Care App के ‘Verify HUID’ फीचर से जांचें।
- बिल में शुद्धता, वजन और कीमत स्पष्ट रूप से दर्ज कराएं।
- जेवर के अलग किए जा सकने वाले हिस्सों पर भी हॉलमार्क और शुद्धता का विवरण जांचें।
सभी जिलों को दायरे में लाने की तैयारी
ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा के मुताबिक चरणबद्ध तरीके से सभी शहरों को अनिवार्य हॉलमार्किंग के दायरे में लाया जा रहा है। इसकी शुरुआत 2021 में हुई थी। उनका कहना है कि अगले दो-तीन वर्षों में सभी जिलों को इसके दायरे में लाने की उम्मीद है। फिलहाल 36 जिलों के ग्राहकों के लिए सीधी सलाह यही है कि त्योहार की चमक में जेवर की शुद्धता की जांच को नजरअंदाज न करें। हॉलमार्क और HUID देखकर ही खरीदारी करें।


