- उत्तराखंड में 10 से 13 सितंबर तक भारी बारिश का पूर्वानुमान, कानपुर बैराज पर 3.82 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज; शुक्लागंज में भी चेतावनी निशान के करीब पहुंची गंगा
कानपुर। गंगा का पानी फिर बढ़ने लगा है और कानपुर में बाढ़ का दबाव बढ़ रहा है। मंगलवार सुबह कानपुर बैराज पर गंगा का जलस्तर 114.410 मीटर पहुंच गया। यह चेतावनी स्तर 114 मीटर से 41 सेंटीमीटर ऊपर है और खतरे के निशान 115 मीटर से अब सिर्फ 59 सेंटीमीटर नीचे रह गया है। बैराज से 3,82,701 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया है। ऊपर से उत्तराखंड में अगले कुछ दिनों में भारी बारिश का नया दौर शुरू होने का पूर्वानुमान है, जिससे गंगा के जलस्तर पर दबाव और बढ़ सकता है।
चेतावनी निशान पार, खतरे की ओर बढ़ी गंगा
बाढ़ नियंत्रण कार्यालय, एलजीसी कानपुर के मंगलवार सुबह आठ बजे के आंकड़ों के अनुसार बैराज के अपस्ट्रीम में जलस्तर 114.410 मीटर और डाउनस्ट्रीम में 114.090 मीटर दर्ज किया गया। गंगा का चेतावनी स्तर 114 मीटर और खतरे का स्तर 115 मीटर है। यानी कानपुर बैराज पर गंगा चेतावनी सीमा पार कर चुकी है। जलस्तर में अभी 59 सेंटीमीटर की और बढ़ोतरी होने पर यह खतरे के निशान तक पहुंच जाएगा। फिलहाल बैराज से पानी का डिस्चार्ज खतरे के स्तर पर निर्धारित 5,44,373 क्यूसेक से कम है।
शुक्लागंज में भी गंगा चेतावनी निशान के करीब
शुक्लागंज में मंगलवार सुबह गंगा का जलस्तर 112.820 मीटर दर्ज किया गया। यहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का निशान 114 मीटर है। यानी शुक्लागंज में गंगा चेतावनी स्तर से सिर्फ 18 सेंटीमीटर नीचे है। कानपुर बैराज और शुक्लागंज, दोनों जगह जलस्तर की स्थिति अब निगरानी वाले स्तर पर पहुंच गई है। निचले इलाकों और नदी के आसपास के क्षेत्रों में पानी बढ़ने की स्थिति पर लगातार नजर रखनी होगी।
हरिद्वार से नरौरा तक पानी का दबाव
गंगा के ऊपरी प्रवाह में भी पानी का दबाव बना हुआ है। मंगलवार सुबह हरिद्वार बैराज से 1,12,979 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 1,05,633 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। इन बैराजों से आने वाले पानी में बढ़ोतरी होने पर उसका असर आगे गंगा के जलस्तर पर पड़ सकता है। इसलिए कानपुर में अब सिर्फ स्थानीय जलस्तर ही नहीं, बल्कि हरिद्वार और नरौरा के डिस्चार्ज पर भी नजर रहेगी।
उत्तराखंड की बारिश बढ़ा सकती है मुश्किल
कानपुर के लिए चिंता की बड़ी वजह उत्तराखंड का मौसम है। IMD के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 10 से 13 सितंबर तक उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। 10 से 12 सितंबर के दौरान कई इलाकों में बारिश के तीव्र से अति तीव्र दौर की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने पहाड़ी क्षेत्रों में नदियों और नालों के अतिप्रवाह तथा निचले इलाकों में जलभराव की आशंका भी जताई है। इस बारिश का असर गंगा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र पर पड़ सकता है। बारिश बढ़ने के साथ हरिद्वार और आगे के बैराजों में पानी का प्रवाह बढ़ा तो उसका असर गंगा के डाउनस्ट्रीम में भी दिखाई दे सकता है।
अगले तीन-चार दिन बेहद अहम
कानपुर में गंगा अभी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन चेतावनी स्तर पार हो चुका है। ऐसे में अगले तीन-चार दिन महत्वपूर्ण हैं। उत्तराखंड में बारिश, हरिद्वार और नरौरा से पानी के डिस्चार्ज तथा कानपुर बैराज के जलस्तर में होने वाला बदलाव तय करेगा कि गंगा खतरे के निशान की ओर कितनी तेजी से बढ़ती है। फिलहाल सबसे बड़ा संकेत यही है कि गंगा चेतावनी निशान पार कर चुकी है और ऊपर से बारिश का नया दौर आने वाला है। यही वजह है कि कानपुर के नदी किनारे और निचले इलाकों में बढ़ते जलस्तर पर नजर और जरूरी हो गई है।


