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UN में शहबाज ने ट्रंप को सराहा, जयशंकर ने दिया करारा जवाब

  • UNGA में शहबाज शरीफ ने कश्मीर, सिंधु जल और मई 2025 के संघर्ष का मुद्दा उठाया; ट्रंप के हस्तक्षेप को सराहा, अगले दिन आतंकवाद पर सवाल पूछने वाले पाकिस्तानी पत्रकार को जयशंकर का तीखा जवाब

भारत 19 डेस्क

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में कश्मीर, सिंधु जल संधि और मई 2025 के भारत-पाक सैन्य संघर्ष का मुद्दा उठाया। उन्होंने संघर्षविराम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप को भी महत्वपूर्ण बताते हुए उनका उल्लेख किया। शहबाज ने कहा कि ट्रंप के हस्तक्षेप ने संघर्ष को रोकने में भूमिका निभाई। इसके एक दिन बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर से जब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए सवाल किया, तो जयशंकर ने जवाब दिया कि “A terrorist country is asking me that question.” इस घटनाक्रम की रिपोर्ट The Indian Express और PTI ने की है।

शहबाज ने UN में कश्मीर का मुद्दा फिर उठाया

25 सितंबर को UNGA को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने कश्मीर को अपने भाषण का प्रमुख हिस्सा बनाया। उन्होंने कश्मीर विवाद को दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के रास्ते की बड़ी बाधा बताया और पाकिस्तान के पारंपरिक रुख को दोहराया। पाकिस्तानी सरकारी प्रसारण के अनुसार, शहबाज ने कश्मीर को पाकिस्तान की jugular vein यानी जीवनरेखा बताया और कहा कि इस मुद्दे का समाधान संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप होना चाहिए। यह पाकिस्तान का आधिकारिक रुख है; भारत कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा बताता रहा है और बाहरी मध्यस्थता का विरोध करता है।

सिंधु जल पर भारत को दी कड़ी चेतावनी

शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को पाकिस्तान युद्ध की कार्रवाई मानेगा। यह बयान भारत द्वारा अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निष्क्रिय रखने के फैसले की पृष्ठभूमि में आया है। पाकिस्तान संधि को बरकरार रखने की मांग करता रहा है, जबकि भारत ने आतंकवाद के संदर्भ में अपने फैसले को उचित ठहराया है।

मई 2025 संघर्ष में ट्रंप को दिया श्रेय

शहबाज के UN भाषण का एक अहम हिस्सा मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव को लेकर था। उन्होंने पाकिस्तान की कार्रवाई को आत्मरक्षा के रूप में पेश किया और संघर्षविराम तक पहुंचने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप का उल्लेख किया। पाकिस्तान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि ट्रंप के हस्तक्षेप ने दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव को रोकने में भूमिका निभाई। दूसरी ओर भारत का कहना रहा है कि संघर्षविराम भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क के बाद हुआ था और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की गई थी। इसलिए कॉपी में ट्रंप की भूमिका को पाकिस्तान/शहबाज का दावा बताते हुए लिखना अधिक सटीक है।

अगले दिन जयशंकर से आतंकवाद पर सवाल

शहबाज के भाषण के अगले दिन UN मुख्यालय में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेइसोलो न्यानती एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर से सवाल किया कि भारत पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देना कब बंद करेगा। जयशंकर ने पलटकर कहा “A terrorist country is asking me that question. Come on.” इसके बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरिश पार्वथनेनी ने पत्रकार से कहा कि उसने जवाब सुन लिया है। 

शहबाज से भी हाफिज सईद पर पूछा गया सवाल

इससे पहले UN मुख्यालय में एक भारतीय पत्रकार ने शहबाज शरीफ से पाकिस्तान में आतंकवाद और लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद को लेकर सवाल किया था। पत्रकार ने शहबाज से पूछा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेगा और हाफिज सईद के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, शहबाज ने इन सवालों का जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गए। 

पाकिस्तान ने आतंकवाद के लिए अफगानिस्तान को घेरा

दिलचस्प बात यह है कि UNGA में शहबाज शरीफ ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया, लेकिन इस बार उनके निशाने पर मुख्य रूप से अफगानिस्तान रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP और बलूच लिबरेशन आर्मी यानी BLA जैसे संगठन अफगान जमीन से पाकिस्तान के खिलाफ गतिविधियां चला रहे हैं। उन्होंने अफगानिस्तान से अपनी जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ नहीं होने देने की मांग की। ये आंकड़े और आरोप पाकिस्तान सरकार के दावे हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

‘दिन में कारोबार, रात में आतंक’ बयान कब था

इस खबर के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण तथ्य अलग करना जरूरी है। “दिन में कारोबार करना और रात में आतंकवाद में शामिल होना स्वीकार नहीं” जैसी टिप्पणी एस. जयशंकर ने अक्टूबर 2024 में मुंबई में की थी। यह बयान 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों की बरसी से पहले आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति पर बोलते हुए दिया गया था। इसलिए इसे 25-26 सितंबर 2026 के UNGA घटनाक्रम से जोड़कर प्रत्यक्ष उद्धरण के रूप में लिखना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। मौजूदा घटनाक्रम में जयशंकर का चर्चित जवाब था “A terrorist country is asking me that question”।

भारत का आतंकवाद पर पुराना और स्पष्ट रुख

भारत लगातार कहता रहा है कि सीमा पार आतंकवाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत पाकिस्तान से आतंकवाद के खिलाफ ठोस, सत्यापन योग्य और अपरिवर्तनीय कार्रवाई की मांग करता रहा है। भारत का आधिकारिक रुख यह भी है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। पाकिस्तान हालांकि भारत के इन आरोपों को खारिज करता रहा है और खुद को आतंकवाद से प्रभावित देश के रूप में पेश करता है।

कश्मीर और आतंकवाद पर दोनों देशों के दावे

UNGA में दोनों देशों की बयानबाजी ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान विवाद के दो पुराने केंद्रों कश्मीर और आतंकवाद को सामने ला दिया। पाकिस्तान ने कश्मीर और सिंधु जल को उठाया तथा अफगानिस्तान से जुड़े आतंकवादी संगठनों का मुद्दा उठाया। भारत की ओर से पाकिस्तान के आतंकवाद रिकॉर्ड और सीमा पार आतंकवाद पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। इस तरह UN में दोनों देशों ने अपने-अपने आधिकारिक रुख को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखा, लेकिन किसी साझा समाधान का संकेत सामने नहीं आया।

ट्रंप की भूमिका पर भारत-पाकिस्तान के अलग दावे

मई 2025 के संघर्ष विराम को लेकर भारत और पाकिस्तान के बयानों में महत्वपूर्ण अंतर रहा है। पाकिस्तान ट्रंप के हस्तक्षेप को संघर्ष रोकने में महत्वपूर्ण बताता है, जबकि भारत ने कहा है कि संघर्षविराम दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क से हुआ। ट्रंप स्वयं भी कई मौकों पर संघर्षविराम में अपनी भूमिका का दावा कर चुके हैं। इसलिए इस हिस्से को रिपोर्ट करते समय अलग-अलग पक्षों के दावों को स्पष्ट रूप से अलग रखना जरूरी है।

UN में टकराव सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं

इस बार भारत-पाकिस्तान की भिड़ंत केवल UNGA के आधिकारिक भाषणों तक सीमित नहीं रही। शहबाज शरीफ से हाफिज सईद पर सवाल और अगले दिन जयशंकर से आतंकवाद को लेकर पाकिस्तानी पत्रकार का सवाल कि दोनों घटनाओं ने कूटनीतिक टकराव को मीडिया के सामने भी ला दिया। एक तरफ पाकिस्तान कश्मीर और सिंधु जल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठा रहा था, तो दूसरी तरफ भारत पाकिस्तान के आतंकवाद रिकॉर्ड को बहस के केंद्र में रखने की कोशिश करता दिखा।

अब नजर दोनों देशों के अगले कदम पर

UNGA के इस घटनाक्रम ने भारत-पाकिस्तान के बीच पुराने विवादों को फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर ला दिया है। शहबाज शरीफ ने कश्मीर, सिंधु जल और मई 2025 के संघर्ष को उठाते हुए ट्रंप की भूमिका को रेखांकित किया, जबकि भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के रिकॉर्ड पर सवाल बनाए रखे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शहबाज का ट्रंप को श्रेय देना पाकिस्तान का पक्ष है और जयशंकर का पाकिस्तानी पत्रकार को जवाब भारत का आधिकारिक राजनीतिक-संचार पक्ष। दोनों को तथ्य के रूप में मिलाने के बजाय संबंधित पक्षों के बयान के रूप में प्रस्तुत करना ही इस खबर की तथ्यात्मक मजबूती बनाए रखता है।

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