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Gyanesh Kumar के समर्थन में आए भाजपा के जनप्रतिनिधि

  • कानपुर में प्रमिला पांडेय और स्वप्निल वरुण ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया, SIR और फॉर्म-6 पर निर्वाचन आयोग की सफाई का हवाला दिया

भारत 19

कानपुर। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच कानपुर में भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने आयोग के पक्ष में अपना रुख रखा। सोमवार को महापौर प्रमिला पांडेय और जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण ने पत्रकार वार्ता कर कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। दोनों नेताओं ने 26 सितंबर को निर्वाचन आयोग की ओर से SIR और फॉर्म-6 को लेकर जारी स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए जा रहे सवालों पर अपनी बात रखी। निर्वाचन आयोग ने कहा था कि SIR से जुड़े प्रमुख फैसलों को तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति से मंजूरी मिली थी।

चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल का आरोप

महापौर प्रमिला पांडेय ने कहा कि चुनावी हार के बाद कांग्रेस जनादेश स्वीकार करने के बजाय निर्वाचन आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है। उन्होंने कहा कि आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद स्पष्ट किया है कि SIR समेत प्रमुख निर्णय तीनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए हैं। प्रमिला पांडेय ने कहा कि कांग्रेस को चुनावी हार के बाद ईवीएम और निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाने के बजाय अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक कमजोरियों का आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।

कैबिनेट सचिव को पत्र और फॉर्म-6 पर सफाई

जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण ने कांग्रेस की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र और फॉर्म-6 को लेकर उठाए गए सवालों पर निर्वाचन आयोग की ओर से दी गई सफाई का हवाला दिया। आयोग के अनुसार, दो निर्वाचन आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र किसी चुनावी नीति या आयोग के आईटी प्रभाग से जुड़े विषय पर नहीं थे, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की कार्यप्रणाली से संबंधित प्रशासनिक मामले से जुड़े थे। स्वप्निल वरुण ने कहा कि SIR के दौरान फॉर्म-6 से संबंधित घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने वैध ठहराया है। निर्वाचन आयोग ने भी कहा है कि SIR के संदर्भ में फॉर्म-6 से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोक नहीं लगाई गई, जबकि गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण के लिए पहले से लागू प्रक्रिया जारी रहेगी।

पात्र मतदाताओं तक पहुंचने की व्यवस्था का दावा

स्वप्निल वरुण ने कहा कि निर्वाचन आयोग पात्र नागरिकों को मताधिकार दिलाने के लिए दूरदराज क्षेत्रों, मजदूरों और बेघर लोगों तक पहुंचने की व्यवस्था कर रहा है। आयोग ने अपनी 26 सितंबर की घोषणा में भी SIR के दौरान ऐसे मतदाताओं की सहायता के लिए विशेष उपायों और बूथ लेवल अधिकारियों के माध्यम से दस्तावेज जुटाने की व्यवस्था की जानकारी दी थी। आयोग के अनुसार, जिन मतदाताओं को SIR के दौरान नोटिस जारी किए जाते हैं, उनके दस्तावेज बूथ लेवल अधिकारी घर जाकर एकत्र कर सकते हैं और उन्हें ECINET पर अपलोड किया जाएगा। ऐसे मामलों में सामान्य तौर पर मतदाता को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी या सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होना होगा। प्रेस वार्ता में भाजपा जिला मीडिया प्रभारी अनुराग शर्मा भी मौजूद रहे।

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