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स्टेट बार काउंसिल में 30% महिला आरक्षण पर SC सुनवाई

– महिला वकीलों के विरोध और BCI की स्वायत्तता पर उठे सवाल; CJI सूर्यकांत ने कहा—अगर महिला वकील खुद आरक्षण नहीं चाहतीं तो 30% प्रतिनिधित्व का आदेश वापस लेने पर विचार क्यों न किया जाए

भारत 19
नई दिल्ली। स्टेट बार काउंसिल में महिलाओं को 30 फीसदी प्रतिनिधित्व देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर मंगलवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ के सामने महिला वकीलों के एक वर्ग की ओर से आदेश के विरोध और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की स्वायत्तता में कथित हस्तक्षेप का मुद्दा उठा। CJI सूर्यकांत ने एक पत्र का हवाला दिया, जिसमें कुछ महिला वकीलों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के 30 फीसदी प्रतिनिधित्व संबंधी आदेश का विरोध करने की बात कही गई। पत्र में आरोप था कि सुप्रीम कोर्ट BCI के अधिकार क्षेत्र में दखल दे रहा है। CJI ने कहा कि अगर महिला वकील खुद आरक्षण नहीं चाहतीं तो अदालत को 30 फीसदी प्रतिनिधित्व का आदेश वापस लेने पर विचार करना चाहिए।

BCI की स्वायत्तता का सवाल भी सुनवाई में उठा

वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने अदालत को बताया कि विरोध करने वाली महिला वकीलों की ओर से लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। उन्होंने विरोध के दौरान बांटे गए पर्चों की भाषा पर भी आपत्ति जताई। इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अदालत के फैसले की आलोचना को राय के रूप में देखा जा सकता है। मामले में BCI की स्वायत्तता का मुद्दा भी अहम रहा। CJI ने जिस पत्र का उल्लेख किया, उसमें महिला वकीलों की ओर से यह आपत्ति जताई गई थी कि सुप्रीम कोर्ट BCI की शक्तियों में हस्तक्षेप कर रहा है। सुनवाई में अदालत के आदेश और बार काउंसिल की वैधानिक भूमिका के बीच संतुलन का सवाल सामने आया।

SC ने दिसंबर 2025 में तय किया था 30% प्रतिनिधित्व

सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में निर्देश दिया था कि स्टेट बार काउंसिल की कुल सीटों में महिलाओं को 30 फीसदी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। अदालत के आदेश के अनुसार 20 फीसदी प्रतिनिधित्व चुनाव के जरिए और 10 फीसदी को-ऑप्शन के जरिए सुनिश्चित किया जाना था। जहां महिला उम्मीदवार चुनाव में निर्धारित प्रतिनिधित्व हासिल नहीं कर पातीं, वहां को-ऑप्शन की व्यवस्था का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया था।  इसके बाद अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने को-ऑप्शन के लिए दो महिला सदस्यों के चयन का दायरा तय किया। इनमें संबंधित हाई कोर्ट की पूर्व महिला न्यायाधीश या संबंधित राज्य की वरिष्ठ महिला अधिवक्ता को शामिल किया गया। सितंबर 2026 में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव हार चुकी महिला उम्मीदवार भी को-ऑप्शन के लिए विचार योग्य हो सकती हैं।

BCI में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी जुड़ा

मंगलवार की सुनवाई में स्टेट बार काउंसिल के साथ BCI की संरचना में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का सवाल भी सामने आया। वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने अदालत को बताया कि दाखिल अर्जी BCI में महिलाओं के लिए 30 फीसदी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की प्रक्रिया से जुड़ी है। इस मामले को संबंधित अन्य याचिका के साथ सुनने का आग्रह भी किया गया। फिलहाल मंगलवार की सुनवाई में 30 फीसदी महिला प्रतिनिधित्व की व्यवस्था को खत्म करने का कोई अंतिम आदेश सामने नहीं आया है। अदालत ने महिला वकीलों के विरोध, BCI की स्वायत्तता और अपने पहले के निर्देशों से जुड़े सवालों पर सुनवाई की है। इसलिए CJI की टिप्पणी को आदेश वापस लेने की संभावना पर उठे सवाल के रूप में देखना उचित है, न कि आरक्षण समाप्त होने के फैसले के रूप में।

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