- 500 साल के संघर्ष और बलिदान की स्मृति को समर्पित स्मारक तैयार; लाल ग्रेनाइट से बने 16 मीटर ऊंचे स्तंभ पर कांस्य का श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का लोगो, रात में विद्युत प्रकाश से जगमगाएगा
भारत 19
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए चले करीब पांच सौ वर्ष लंबे संघर्ष और इसमें बलिदान देने वाले राम भक्तों की स्मृति अब मंदिर परिसर में स्थायी रूप से संजोई जा रही है। राम मंदिर के विशाल परिसर में बनाया गया हुतात्मा स्मारक स्तंभ पूरी तरह तैयार हो चुका है और लोकार्पण के लिए तैयार है। लाल ग्रेनाइट से बना यह स्तंभ मंदिर परिसर में बलिदानियों की स्मृति को समर्पित प्रमुख स्मारक के रूप में विकसित किया गया है।
लाल ग्रेनाइट से बना 16 मीटर ऊंचा स्तंभ
लाल ग्रेनाइट से तैयार हुतात्मा स्मारक स्तंभ की ऊंचाई करीब 16 मीटर और गोलाई करीब चार फीट है। धरती से जुड़े हिस्से में इसकी गोलाई साढ़े चार फीट है। स्तंभ की संरचना इस तरह तैयार हुई कि मंदिर परिसर की स्थापत्य शैली के बीच यह अलग से पहचान में आए। स्तंभ के सबसे ऊपरी हिस्से पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का कांस्य लोगो लगाया गया है। लोगो वाले हिस्से की ऊंचाई 10 फीट छह इंच और गोलाई आठ फीट छह इंच है। कांस्य से तैयार लोगो स्मारक के शीर्ष को विशिष्ट स्वरूप देता है और इसे राम मंदिर परिसर की पहचान से सीधे जोड़ता है।
पांच सौ साल के संघर्ष की स्मृति का स्तंभ
स्मारक को दिन में ही दिखने वाला ढांचा नहीं बनाया गया। विद्युत प्रकाश की विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे रात में भी हुतात्मा स्तंभ परिसर में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। स्मारक की दृश्यता के साथ उसके स्थापत्य प्रभाव को भी बढ़ाने की तैयारी है। हुतात्मा स्तंभ का मूल उद्देश्य राम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर निर्माण से जुड़े लंबे संघर्ष में बलिदान देने वाले रामभक्तों की स्मृति को स्थायी रूप देना है। मंदिर निर्माण से जुड़ी व्यवस्थाओं में स्मारक को ऐसे स्थल के रूप में विकसित किया गया है, जहां श्रद्धालु मंदिर के इतिहास और उससे जुड़े बलिदानों की स्मृति से परिचित हो सकेंगे।
स्मारक में इतिहास, स्थापत्य और श्रद्धा का मेल
राम मंदिर के मुख्य भवन के साथ परिसर में श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न सुविधाओं और स्मृति स्थलों का विकास भी किया जा रहा है। हुतात्मा स्तंभ इसी व्यापक विकास योजना का हिस्सा है। निर्माण पूरा होने के बाद अब इसके लोकार्पण की औपचारिकता शेष है। 16 मीटर ऊंचा लाल ग्रेनाइट स्तंभ, उसके शीर्ष पर स्थापित कांस्य लोगो और विद्युत प्रकाश व्यवस्था इसे मंदिर परिसर की प्रमुख संरचनाओं में शामिल करती है। इसका महत्व केवल स्थापत्य तक सीमित नहीं है। यह उन रामभक्तों की स्मृति को भी स्थायी स्वरूप देता है, जिनके बलिदान को राम जन्मभूमि संघर्ष के इतिहास से जोड़ा जाता है।

