– शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट मामले में जोन-ए के चिन्हित निर्माणों को पहले सील करने के निर्देश; जोन-बी, सी और डी में भी अनधिकृत निर्माणों की पहचान होगी, अगली सुनवाई 9 दिसंबर को
भारत 19
मेरठ के शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट से शुरू हुआ अवैध निर्माण का मामला अब शहर के बड़े हिस्से तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर को सुनवाई के दौरान मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) के जोन-ए में चिन्हित 16,726 अनधिकृत व्यावसायिक इमारतों को सील करने के निर्देश दिए। अदालत ने साथ ही जोन-बी, सी और डी में भी ऐसे निर्माणों की पहचान करने को कहा है।
सेंट्रल मार्केट से निकला मामला, बढ़ा कार्रवाई का दायरा
मामला शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट की उन संपत्तियों से जुड़ा है, जहां आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां और स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण का मामला सामने आया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद 44 चिन्हित संपत्तियों पर कार्रवाई शुरू हुई थी। अदालत को बताया गया कि इनमें 20 संपत्तियों से अवैध निर्माण पूरी तरह हटाया जा चुका है, जबकि शेष पर कार्रवाई जारी है। अब अदालत के ताजा निर्देशों से कार्रवाई का दायरा सेंट्रल मार्केट की इन संपत्तियों से आगे बढ़कर जोन-ए की 16,726 चिन्हित इमारतों तक पहुंच गया है।
अवैध निर्माण पुराना हो तो भी कार्रवाई संभव
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण की उम्र को लेकर भी स्पष्ट रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि नियमों के विरुद्ध किया गया निर्माण केवल समय बीतने से वैध नहीं हो जाता। यानी निर्माण पांच साल पुराना हो या 50 साल, यदि वह नियमों के खिलाफ है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है। यही टिप्पणी मेरठ में लंबे समय से मौजूद ऐसे निर्माणों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनमें स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण या आवासीय संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने के आरोप हैं।
16,726 भवनों की पहचान जोन-ए में हुई
6,726 का आंकड़ा मेरठ के जोन-ए में चिन्हित अनधिकृत इमारतों का है, न कि पूरे शहर में अंतिम रूप से चिन्हित सभी अवैध निर्माणों का। सूची में बेगमपुल, लिसाड़ीगेट, ब्रह्मपुरी, भगवतपुरा और तारापुरी समेत कई इलाके शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बाकी जोन में भी सर्वे और अनधिकृत निर्माणों की पहचान के निर्देश दिए हैं। इसलिए आगे कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है। अदालत के समक्ष यह मुद्दा भी रहा कि आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां कैसे संचालित हो रही थीं। इसी संदर्भ में मेरठ के अन्य इलाकों में भी अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल की पहचान की जा रही है।
अवैध कॉलोनियों पर भी सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुनवाई में मेरठ में विकसित की गई अवैध कॉलोनियों का मुद्दा भी उठा। अदालत ने उल्देपुर में ऐसी कॉलोनियों के अस्तित्व पर अधिकारियों से सवाल किए और अनधिकृत कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। इससे साफ है कि अदालत की निगरानी केवल सेंट्रल मार्केट तक सीमित नहीं है।
पहले सीलिंग, फिर आगे की कार्रवाई
ताजा निर्देशों में 16,726 चिन्हित संपत्तियों के मामले में कार्रवाई की शुरुआत सीलिंग से करने की बात सामने आई है। इसके बाद नियमों के अनुरूप अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसलिए इसे सीधे 16,726 इमारतों पर तत्काल बुलडोजर चलने का आदेश मानना सही नहीं होगा। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को निर्धारित की है। तब तक संबंधित प्राधिकरणों को अदालत के निर्देशों के अनुपालन और अलग-अलग जोन में चिन्हित अनधिकृत निर्माणों से जुड़ी स्थिति सामने रखनी होगी।
