- गोवा स्थित घर पर कार्डियक अरेस्ट से मौत, 45 मिनट तक CPR के बाद भी नहीं बची जान, दमदार आवाज और बेबाक अंदाज से बनाई अलग पहचान, ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘नटसम्राट’ से ‘वेलकम’ तक यादगार रहा करीब पांच दशक का सफर, पीएम मोदी ने कहा, पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी उनकी अदाकारी
भारत 19 डेस्क। अपने बेबाक अंदाज, तीखे संवाद, संवेदनशील व्यक्तित्व और किरदार में पूरी तरह उतर जाने वाली अदाकारी से हिंदी और मराठी सिनेमा में अलग पहचान बनाने वाले नाना पाटेकर नहीं रहे। 75 वर्षीय अभिनेता का गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके घर पर कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया। उन्हें तत्काल मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित किया गया। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने भी निधन की पुष्टि की है।
नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत और राजनीतिक गलियारों से श्रद्धांजलि का सिलसिला शुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि नाना पाटेकर की अभिनय की तीव्रता, बहुमुखी प्रतिभा और रचनात्मकता असाधारण थी। उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में नाना के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके निभाए किरदार और उनका काम आने वाली पीढ़ियों तक याद किया जाएगा।
थिएटर से शुरू हुआ सफर, ‘गमन’ से फिल्मों में कदम
नाना पाटेकर का अभिनय सफर थिएटर से शुरू हुआ और 1978 की फिल्म ‘गमन’ से उन्होंने सिनेमा में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने समानांतर सिनेमा और मराठी रंगमंच के साथ काम किया। ‘अंकुश’ और ‘प्रतिघात’ जैसी फिल्मों ने उन्हें अलग तेवर वाले अभिनेता के रूप में पहचान दिलाई। 1989 की ‘परिंदा’ उनके करियर का बड़ा पड़ाव बनी। फिल्म में उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली और उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तथा फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। इसके बाद वह हिंदी सिनेमा के उन अभिनेताओं में शामिल हो गए जिनके नाम के साथ ही दमदार अभिनय की उम्मीद जुड़ने लगी।
‘क्रांतिवीर’ से ‘नटसम्राट’ तक दमदार अभिनय
‘क्रांतिवीर’ में उनके अभिनय ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया। इसके बाद ‘अग्निसाक्षी’, ‘तिरंगा’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘अपहरण’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। मराठी सिनेमा में ‘नटसम्राट’ उनके करियर की सबसे चर्चित भूमिकाओं में शामिल रही। रंगमंच की पृष्ठभूमि और संवादों पर उनकी मजबूत पकड़ इस किरदार में खास तौर पर दिखाई दी।
गंभीर अभिनेता से कॉमेडी के ‘उदय शेट्टी’ तक
नाना पाटेकर की छवि केवल गंभीर और आक्रामक किरदारों तक सीमित नहीं रही। 2007 की ‘वेलकम’ में उनके किरदार उदय शेट्टी ने उनके अभिनय का एक बिल्कुल अलग रंग दर्शकों के सामने रखा। उनकी कॉमिक टाइमिंग, संवाद अदायगी और अनिल कपूर के साथ उनकी जोड़ी बेहद लोकप्रिय हुई। गंभीर भूमिकाओं के लिए पहचाने जाने वाले नाना ने ‘वेलकम’ से साबित किया कि उनकी अभिनय क्षमता का दायरा काफी व्यापक था। बाद में ‘वेलकम बैक’ में भी उन्होंने उदय शेट्टी की भूमिका निभाई।
अभिनेता के साथ निर्देशक और सामाजिक सरोकार
नाना पाटेकर ने अभिनय के अलावा निर्देशन में भी हाथ आजमाया। उन्होंने ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ का निर्देशन किया। सामाजिक सरोकारों से उनका जुड़ाव भी लंबे समय तक चर्चा में रहा। महाराष्ट्र में किसानों और सूखा प्रभावित ग्रामीण परिवारों की मदद के लिए किए गए उनके कामों का उल्लेख उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। निजी जीवन में वह फिल्मी ग्लैमर से दूरी और सादगी के लिए पहचाने जाते थे। पुणे के पास उनका फार्म हाउस मुंबई की फिल्मी दुनिया से दूर रहने और खेती-किसानी से जुड़े रहने की जगह रहा।
तीन राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्मश्री
नाना पाटेकर को अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कई फिल्मफेयर पुरस्कार मिले। वर्ष 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। करीब पांच दशक के करियर में उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा के साथ थिएटर में भी अपनी छाप छोड़ी। ‘परिंदा’ और ‘क्रांतिवीर’ के गंभीर किरदारों से लेकर ‘नटसम्राट’ की भावनात्मक गहराई और ‘वेलकम’ के उदय शेट्टी की कॉमिक टाइमिंग तक उनका सफर कई रंगों से भरा रहा।
बेबाक आवाज और अलग तेवर हमेशा याद रहेंगे
नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ उनके निभाए किरदारों से नहीं बनी। उनकी खुरदुरी आवाज, तीखी संवाद अदायगी, बेबाक राय और जमीन से जुड़ा व्यक्तित्व भी उनकी सार्वजनिक पहचान का हिस्सा रहे। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी उनके निधन पर कहा कि उनकी विशिष्ट संवाद अदायगी ने कई किरदारों को अमर बना दिया। नाना पाटेकर का जाना हिंदी और मराठी सिनेमा के उस दौर का अंत है, जिसमें अभिनेता की पहचान केवल स्टारडम से नहीं बल्कि अभिनय की अपनी विशिष्ट शैली से बनती थी। प्रधानमंत्री मोदी समेत देशभर से मिल रही श्रद्धांजलियां उनके व्यापक प्रभाव को रेखांकित कर रही हैं।


