- शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन हिंसक हुआ, हजारों गिरफ्तार, सैकड़ों घायल और स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित, पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल; बेल्जियम तक पहुंचा असर, ट्रंप ने फ्रांस की तस्वीरों को अप्रवासन नीति के समर्थन में इस्तेमाल किया
भारत 19 डेस्क। फ्रांस में स्कूलों की बदहाली और शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों की कमी को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब देशव्यापी हिंसक प्रदर्शन में बदल गया है। राजधानी पेरिस समेत कई बड़े शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हो रही हैं। कई जगह आगजनी और तोड़फोड़ हुई है, स्कूलों में पढ़ाई बाधित हुई है और हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है। मंगलवार को आंदोलन के सबसे बड़े प्रदर्शन में देशभर में ढाई लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे हैं। सरकार के मुताबिक आंदोलन शुरू होने के बाद से 6,100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें बड़ी संख्या नाबालिगों की है।
स्कूलों की बदहाली से शुरू हुई चिंगारी
मौजूदा संकट की शुरुआत सितंबर में पेरिस के उपनगर क्रेतेय के स्कूलों से हुई। छात्रों और शिक्षकों ने स्कूलों में खाली पदों, स्टाफ की कमी और बुनियादी सुविधाओं की खराब स्थिति के खिलाफ आवाज उठाई। कई स्कूलों में जर्जर भवन, भीड़भरी कक्षाएं और शिक्षकों की कमी को लेकर शिकायतें सामने आईं। धीरे-धीरे विरोध पेरिस के दूसरे इलाकों और फिर देश के अन्य हिस्सों में फैल गया। शिक्षक संगठनों, अभिभावकों और ट्रेड यूनियनों के एक हिस्से ने भी छात्रों का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में अधिक शिक्षकों की नियुक्ति, स्कूलों के लिए अतिरिक्त बजट और भवनों की मरम्मत शामिल हैं।
शांतिपूर्ण आंदोलन में हिंसा कैसे घुसी
शुरुआती प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण थे, लेकिन आंदोलन बढ़ने के साथ कुछ शहरों में स्थिति बिगड़ने लगी। प्रदर्शनकारियों के समूहों ने स्कूलों और सड़कों को अवरुद्ध किया। कई जगह पुलिस पर पथराव हुआ, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और वाहनों तथा दूसरी संपत्तियों में आग लगाने की घटनाएं सामने आईं। फ्रांसीसी पुलिस का कहना है कि आंदोलन में ऐसे बाहरी उपद्रवी और संगठित समूह भी शामिल हो गए हैं, जिनका शिक्षा संबंधी मांगों से सीधा संबंध नहीं है। पेरिस पुलिस प्रमुख ने प्रदर्शन के दौरान ऐसे लोगों के शामिल होने की बात कही जिन्हें पुलिस ने हिंसा भड़काने वाला बताया है। सरकार ने कुछ वामपंथी संगठनों पर भी आंदोलन को उग्र बनाने का आरोप लगाया है। खास तौर पर ला फ्रांस इंशुमीज (LFI) का नाम सामने आया है। हालांकि पार्टी ने इन आरोपों को खारिज किया है।
हिंसा कितनी बड़ी, पुलिस कैसे कर रही काबू
हिंसा का सबसे ज्यादा असर पेरिस, लियोन, टूलूज, स्ट्रासबर्ग और दूसरे बड़े शहरों में दिखाई दिया है। पुलिस ने कई जगह आंसू गैस का इस्तेमाल किया और हिंसा में शामिल लोगों को हिरासत में लिया। अब तक हुई 6,100 गिरफ्तारियों में बड़ी संख्या में नाबालिग हैं। न्यायिक कार्रवाई के लिए बड़ी संख्या में मामले अदालतों तक पहुंचाए गए हैं। प्रदर्शन के दौरान एक 15 वर्षीय छात्र गंभीर रूप से घायल हुआ। घटना के बाद सरकार ने छात्र प्रदर्शनों में इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ स्टन ग्रेनेड के उपयोग पर अस्थायी रोक लगा दी। पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों की जांच भी शुरू की गई है।
स्कूलों से आगे बढ़कर सामाजिक असंतोष
आंदोलन के विस्तार के साथ इसमें केवल स्कूलों की समस्याएं ही नहीं रह गई हैं। युवाओं में भविष्य को लेकर चिंता, सरकारी सेवाओं की स्थिति, सामाजिक असमानता और आर्थिक दबाव जैसे मुद्दे भी प्रदर्शनकारियों के बीच दिखाई दे रहे हैं। फ्रांस के गरीब और पिछड़े उपनगरों से बड़ी संख्या में छात्र आंदोलन में शामिल हुए हैं। इन इलाकों में स्कूलों को लंबे समय से संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब सरकारी नीतियों और सामाजिक असमानता के खिलाफ व्यापक असंतोष का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
हिंसा की आंच बेल्जियम तक
फ्रांस की सड़कों पर शुरू हुए विरोध का असर पड़ोसी देशों में भी दिखाई देने लगा है। बेल्जियम के लीज शहर में छात्रों ने शिक्षा की बढ़ती लागत और व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन किया। वहां प्रदर्शन हिंसक होने के बाद 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। आगजनी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई और मुख्य रेलवे स्टेशन को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा। बेल्जियम के छात्रों ने फ्रांस में चल रहे आंदोलन को अपने प्रदर्शन के लिए प्रेरणा बताया। हालांकि अभी फ्रांस जैसी व्यापक हिंसा यूरोप के दूसरे देशों में नहीं दिखाई दी है, लेकिन शिक्षा, सरकारी खर्च और युवाओं के भविष्य को लेकर असंतोष का मुद्दा कई यूरोपीय देशों में पहले से मौजूद है।
ट्रंप ने हिंसा को अप्रवासन से जोड़ा
फ्रांस में हिंसा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूरे घटनाक्रम को अप्रवासन और इस्लाम से जोड़ दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि फ्रांस में जो कुछ हो रहा है वह केवल स्कूलों की समस्या नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर अप्रवासन और इस्लाम से जुड़ा संकट है। ट्रंप के बयान के बाद फ्रांस की हिंसा को लेकर अमेरिका में अप्रवासन नीति पर बहस तेज हो गई। हालांकि फ्रांस में मौजूदा छात्र आंदोलन की शुरुआत स्कूलों की स्थिति, शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों की कमी को लेकर हुई थी।
मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप का अप्रवासन कार्ड
फ्रांस की हिंसा को ट्रंप ऐसे समय में अमेरिकी राजनीति में ला रहे हैं जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव का माहौल गर्म है। अप्रवासन, सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई ट्रंप और रिपब्लिकन राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। ट्रंप समर्थक फ्रांस की हिंसा की तस्वीरों और वीडियो को अमेरिकी जनता के सामने इस तर्क के साथ रख रहे हैं कि यूरोप में बड़े पैमाने पर अप्रवासन और कमजोर सीमा नीति के कथित परिणाम अमेरिका के लिए चेतावनी हैं। इस घटनाक्रम का इस्तेमाल ट्रंप अपनी सख्त अप्रवासन नीति, सीमा नियंत्रण और निर्वासन की नीति के समर्थन में राजनीतिक तर्क के तौर पर कर रहे हैं।


